Sat Nov 7, 2026 | 03:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

पटाखों की आवाज से कान में घंटी बजना: क्या यह नर्व डैमेज का संकेत है?

पटाखों की तेज आवाज से कानों में घंटी बजना आंतरिक कान के सेल्स कोशिकाओं को नुकसान का संकेत हो सकता है, लेकिन यह हमेशा नर्व डैमेज नहीं होता है। अगर लक्षण बने रहें या सुनने में कमी आए तो तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट से संपर्क करें।
पटाखों की आवाज से कान में घंटी बजना: क्या यह नर्व डैमेज का संकेत है?
पटाखों की आवाज से कान में घंटी बजना: क्या यह नर्व डैमेज का संकेत है?

पटाखों की तेज और अचानक बजने वाली आवाज कानों के नाजुक पर्दों और आंतरिक हिस्सों पर बहुत बुरा असर डाल सकती है। अगर पटाखे फोड़ने के बाद आपके कानों में लगातार घंटी बजने या सीटी जैसी आवाज आने की समस्या हो रही है तो यह इस बात का संकेत है कि आपके कान की अंदरूनी सेल्स पर ज्यादा प्रेशर के कारण नुकसान पहुंचा है। ऐसी तेज आवाजें सुनने की क्षमता को कंट्रोल करने वाली छोटी नर्व्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए, आइए इस लेख में Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, Consultant, MedFirst ENT Centre, New Delhi  से जानते हैं कि पटाखों की तेज आवाज से कान में घंटी बजना नर्व डैमेज का संकेत है?

पटाखों की तेज आवाज कान को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

Dr. Rajesh Bhardwaj बताते हैं कि हमारे कान का अंदरूनी हिस्सा सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। इसमें मौजूद कॉक्लिआ संरचना में बहुत छोटी और सेंसिटिव हेयर सेल्स होती हैं। ये सेल्स आवाज के कंपन को ऐसे संकेतों में बदलती हैं, जिन्हें सुनने वाली नर्व ब्रेन तक पहुंचाती है। जब कोई व्यक्ति बहुत तेज धमाके या पटाखे की आवाज के संपर्क में आता है, तो ध्वनि की तीव्रता इन सेंसिटिव सेल्स को प्रभावित कर सकती है। इससे अस्थायी या स्थायी सुनने की समस्या और कान में घंटी बजने की समस्या हो सकती है।
ध्यान रखें कि तेज आवाज से नुकसान सिर्फ सुनने वाली नस को ही नहीं, बल्कि अंदरूनी कान के हेयर सेल्स और सुनने की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली संरचनाओं को भी हो सकता है।

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कान में घंटी या सीटी बजना क्या नर्व डैमेज का संकेत है?

Dr. Rajesh Bhardwaj का कहना है कि कान में बिना किसी बाहरी सोर्स के आवाज सुनाई देना टिनिटस कहलाता है। यह आवाज घंटी, सीटी, भनभनाहट या लगातार बजने जैसी महसूस हो सकती है। पटाखों के धमाके के बाद ऐसा होना इस बात का संकेत हो सकता है कि कान तेज आवाज से प्रभावित हुआ है। हालांकि, टिनिटस का मतलब यह नहीं है कि सुनने वाली नस डैमेज हो गई है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं-

  • अंदरूनी कान की सेंसिटिव हेयर सेल्स पर तेज आवाज का असर
  • तेज धमाके के कारण सुनने की प्रक्रिया में अस्थायी बदलाव
  • शोर के कारण होने वाली सुनने की क्षमता में कमी
  • कान में पर्दे या मध्य कान में चोट
  • पहले से मौजूद सुनने की समस्या का तेज आवाज के बाद ज्यादा महसूस होना

National Institutes of Health के अनुसार, क्रोनिक टिनिटस से पीड़ित लोगों में कॉकलीयर नर्व की डैमेज या ध्वनि के प्रति कम प्रतिक्रिया के संकेत मिलने की संभावना ज्यादा होती है। यह तंत्रिका कान की संवेदी सेल्स से दिमाग तक ध्वनि से जुड़ी जानकारी पहुंचाती है।

किन लोगों को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए?

Dr. Rajesh Bhardwaj के अनुसार, अगर पटाखों की तेज आवाज के बाद आपको ये लक्षण दिखाई दें तो ENT स्पेशलिस्ट से जांच कराना जरूरी है-

  • कान में लगातार घंटी या सीटी बजना- अगर आवाज कुछ समय बाद भी कम नहीं हो रही है या बार-बार लौट रही है तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • सुनाई कम देना- बातचीत धीमी सुनाई देना, फोन पर आवाज समझने में परेशानी या एक कान से कम सुनाई देना अहम संकेत हो सकता है।
  • कान में दर्द या भारीपन- तेज धमाके के बाद कान में दर्द, प्रेशर या बंद होने जैसा एहसास चोट का संकेत हो सकता है।
  • चक्कर आना- कान की परेशानी के साथ चक्कर या संतुलन बिगड़ना भी हो सकता है। इसका मेडिकल टेस्ट करवाना जरूरी है।
  • कान से खून या लिक्विड निकलना- ऐसा होने पर कान के पर्दे या अन्य संरचनाओं में चोट लगने की आशंका हो सकती है।

अचानक सुनाई देना कम हो जाए तो क्या करें?

Dr. Rajesh Bhardwaj के मुताबिक, अगर पटाखे के धमाके के बाद अचानक एक या दोनों कानों से सुनाई कम देने लगे तो इसे टिनिटस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक होने वाला हियरिंग लॉस एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में उसी समय ENT स्पेशलिस्ट से मिलें। समस्या की जल्दी पहचान और इलाज समय पर शुरू करने से समस्या से राहत मिल सकती है। कान में घंटी बजने के साथ अचानक सुनाई कम देना या तेज चक्कर आना भी मेडिकल एमरजेंसी हो सकती है।

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कान में घंटी बजने पर क्या करें और क्या न करें?

Dr. Rajesh Bhardwaj ने बताया कि अगर पटाखों की आवाज के बाद कान में घंटी बज रही है तो कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी है-

  • कुछ समय तक पटाखों, तेज संगीत और लाउडस्पीकर से दूरी बनाएं।
  • हेडफोन और ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें, साथ ही तेज वॉल्यूम से बचें।
  • कान में तेल, किसी तरह की होम रेमेडी या बिना डॉक्टर की सलाह के ईयर ड्रॉप्स न डालें।
  • कॉटन बड्स या किसी नुकीली चीज से कान साफ करने की कोशिश न करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा लेना शुरू न करें।
  • अगर लक्षण बने रहें या सुनाई कम दे तो ENT स्पेशलिस्ट से जांच करवाएं।

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क्या टिनिटस ठीक हो सकता है?

Dr. Rajesh Bhardwaj के अनुसार, टिनिटस का इलाज इसके होने के कारण पर निर्भर करता है। अगर समस्या अस्थायी ध्वनि-संपर्क के कारण हुई है तो कुछ मामलों में आवाज धीरे-धीरे कम हो सकती है। लेकिन अगर अंदरूनी कान को नुकसान या सुनने की क्षमता में कमी हुई है तो इलाज जांच के आधार पर- बनाई जाती है। कुछ मरीजों में सुनने की मशीन, साउंड थेरेपी या टिनिटस मैनेजमेंट जैसी तकनीकों से राहत मिल सकती है। इसलिए, किसी भी घरेलू इलाज या खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

निष्कर्ष
पटाखों की तेज आवाज के बाद कान में घंटी या सीटी बजना टिनिटस का लक्षण हो सकता है। यह अंदरूनी कान पर तेज आवाज के प्रभाव का संकेत हो सकता है, लेकिन इसका मतलब हमेशा सुनने वाली नस का डैमेज होना नहीं होता है। इसलिए, Dr Shreya Garg सलाह देते हैं कि अगर घंटी बजने जैसी आवाज लगातार बनी रहे, सुनाई कम दे, कान में दर्द हो या चक्कर आए तो समय पर डॉक्टर से जांच कराएं।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या टिनिटस अपने आप ठीक हो सकता है?

    हल्का टिनिटस अक्सर कुछ घंटों या दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन पटाखों या तेज आवाज के कारण हुआ गंभीर टिनिटस स्थायी भी हो सकता है।
  • कान में ईयरफोन लगाने से कौन सी बीमारी होती है?

    लंबे समय तक और तेज आवाज में ईयरफोन का इस्तेमाल करने से हियरिंग लॉस, टिनिटस और कान में इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 07, 2026 14:27 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj