अक्सर महिलाएं वजन कम करने की चाह में सबसे पहले फैट को अपनी डाइट से बाहर निकालती हैं। उन्हें लगता है कि वजन कम करने और खुद को फिट रखने के लिए यह सबसे आसान और अच्छा तरीका है। हालांकि, आपने एक्सपर्ट से सुना होगा कि हमें कभी भी फैट को पूरी तरह से डाइट से बाहर नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि हमारे शरीर को सुचारू ढंग से चलने के लिए फैट की आवश्यकता होती है। विशेषकर, महिलाओं में इसकी जरूरत अधिक होती है। माना जाता है कि कम फैट खाने से महिलाओं के हार्मोन पर असर पड़ता है? सवाल है, क्या वाकई यह सच है या यह महज एक भ्रम है? आइए, जानते हैं Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से।
क्या लो फैट खाने से महिलाओं के हार्मोन प्रभावित होते हैं?
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वैसे से किसी को भी बहुत कम फैट का सेवन नहीं करना चाहिए। जरूरत अनुसार सबको फैट का सेवन करना चाहिए। महिलाओं की बात करें, तो उन्हें भी जरूरत अनुसार हेल्दी फैट का सेवन करना चाहिए। अगर वे बहुत कम फैट लेती हैं, तो इसका बहुत बुरा असर उनके हार्मोन्स पर पड़ता है। इस संबंध में न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी बताती हैं, "हमारे शरीर में रिप्रोडक्टिव हार्मोन जैसे कि एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन को बनाने के लिए भोजन से मिलने वाला फैट बहुत जरूरी और बुनियादी तत्व है। इसमें कटौती करना किसी भी महिला के लिए सही नहीं है।"
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बहुत कम फैट खाने से महिलाओं के हार्मोन पर कैसे असर पड़ता है?
हार्मोन की बुनियादी जरूरत
इसका जिक्र हमने पहले भी किया है कि महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि वे जरूरत अनुसार फैट का सेवन करें। असल में, कोलेस्ट्रॉल वह बुनियादी तत्व है, जिसकी जरूरत हमारे शरीर को सेक्स हार्मोन्स बनाने के लिए होती है। अगर महिलाओं की डाइट में पर्याप्त मात्रा में हेल्दी फैट्स नहीं होंगे, तो एंडोक्राइन सिस्टम सही तरह से काम नहीं कर पाएगा।
ऊर्जा की कमी
बहुत कम फैट लेने के कारण अक्सर शरीर में लंबे समय तक कैलोरी की कमी बनी रहती है। ऐसे में वजन भी तेजी से कम होता है। जाहिर है, कम वजन और कैलोरी की कमी के कारण एनर्जी पर बुरा असर पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर ऊर्जा बचाने के लिए प्रजनन जैसे गैर-जरूरी कामों को बंद कर देता है।
थायराइड और तनाव
डाइट में फैट की बहुत ज्यादा कमी होने पर लेप्टिन हार्मोन के स्तर में गिरावट आ सकती है। यह गिरावट दिमाग को तनाव का संकेत देती है, जिससे पिट्यूटरी ग्लैंड का काम धीमा हो जाता है। ऐसे में थायराइड ठीक से काम नहीं कर पाता। कहने का मतलब है कि फैट में कमी करने की वजह से पूरे शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ सकता है।
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फैट की कमी के कारण महिलाओं में हार्मोन बदलाव के लक्षण
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने पर कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे
- अनियमित मासिक धर्मः हार्मोनल बदलाव होने पर महिलाओं को सबसे पहले पीरियड साइकिल अवरुद्ध होती है। कभी ब्लीडिंग बहुत कम दिनों के लिए हो सकती है, तो कभी लंबे समय के लिए भी हो सकती है।
- लगातार थकानः हार्मोनल बदलाव का एक बड़ा लक्षण हर वक्त थकान महसूस करना है। असल में, हार्मोनल बदलाव होने के कारण शरीर में एनर्जी का स्तर कम हो जाता है, जिससे महिलाएं आराम करने के बाद भी थकान से उबर नहीं पाती हैं।
- बालों और त्वचा में बदलावः हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं में बालों का पतला होना या झड़ना, ड्राई स्किन और नाखूनों का कमजोर होकर टूटने जैसे लक्षण भी नजर आते हैं।
निष्कर्ष
महिलाओं का शरीर बहुत संवेदनशील है। उन्हें तरह-तरह की पौष्टिक चीजों की जरूरत होती है, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे। इसमें फैट भी आवश्यक और बुनियादी तत्व है। फैट की कमी के कारण हार्मोनल परिवर्तन होने लगते हैं, जो कि महिलाओं के सेक्स हार्मोन पर असर डाल सकती है। इसके साथ-साथ उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। आपके साथ ऐसा न हो, इसके लिए बेहतर है कि हेल्दी फैट, जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड, अलसी के बीज और चिया सीड्स को डाइट का हिस्सा बनाएं।
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FAQ
बहुत कम फैट खाने से पीरियड्स अनियमित क्यों हो जाते हैं?
जब शरीर में फैट और कैलोरी की भारी कमी हो जाती है, तो दिमाग ऊर्जा बचाने के लिए प्रजनन प्रणाली को धीमा कर देता है। इसी वजह से पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए महिलाओं को अपनी डाइट में कौन से हेल्दी फैट्स शामिल करने चाहिए?
महिलाओं को अपनी रोजमर्रा की डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें जैसे अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट, देसी घी और ऑलिव ऑयल शामिल करना चाहिए।
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Jul 01, 2026 17:33 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 01, 2026 17:33 IST
Modified By : Meera TagoreJul 01, 2026 17:33 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi