Thu Sep 24, 2026 | 05:05 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

भीगे बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है? जानें एक्सपर्ट की राय

सुबह के समय भीगे बादाम खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यहां न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए, सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है?
भीगे बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है? जानें एक्सपर्ट की रायभीगे बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है? जानें एक्सपर्ट की राय

बचपन से ही कई लोगों ने सुना होगा कि रोजाना बादाम खाने से दिमाग तेज होता है, याददाश्त बढ़ती है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में मदद मिलती है। यही वजह है कि कई पेरेंट्स बच्चों को सुबह खाली पेट भीगे बादाम खिलाते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या बादाम को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से वाकई याददाश्त तेज होती है? जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, बादाम में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें बैलेंस डाइट का हिस्सा माना जाता है लेकिन किसी एक चीज को दिमाग की क्षमता बढ़ाने का सीधा उपाय मान लेना सही नहीं है। याददाश्त और फोकस पर खान-पान के साथ-साथ नींद, तनाव, फिजिकल एक्टिविटी और पूरे डेली रूटीन का भी असर पड़ता है।

सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है?

न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, बादाम में मौजूद पोषक तत्व दिमाग की नॉर्मल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन याददाश्त बढ़ाने के लिए केवल बादाम पर निर्भर रहना सही नहीं है। दिमाग के फंक्शन पर नींद, फिजिकल एक्टिविटी, तनाव, उम्र, हाइड्रेशन और पूरी डाइट का भी असर पड़ता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति रोजाना भीगे बादाम खाता है, तो इसे हेल्दी डाइट की एक छोटी आदत माना जा सकता है लेकिन इसे याददाश्त तेज करने वाला निश्चित उपाय नहीं समझना चाहिए।

  • बादाम में विटामिन E, प्रोटीन, फाइबर के साथ हेल्दी फैट, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें मौजूद हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • विटामिन E हमारे शरीर की सेल्स को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है।
  • डाइटीशियन अर्चना जैन के मुताबिक, बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाकर बादाम खाना ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है।

साल 2021 में Nutritional Neuroscience में प्रकाशित स्टडी में यह पाया गया कि बादाम खाने से स्वस्थ बुजुर्गों के समग्र संज्ञानात्मक (मानसिक) कार्य में कोई बड़ा या समग्र सुधार नहीं हुआ। हालांकि, जिन लोगों ने प्रतिदिन बादाम खाए, उनके कुछ खास मानसिक पहलुओं जैसे कि याददाश्त, सीखने की क्षमता और विजुअल वर्किंग मेमोरी में 6 महीने के बाद सुधार देखा गया। भले ही ये रिजल्ट काफी उत्साहजनक हैं, फिर भी उम्र से जुड़ी मानसिक कमजोरी के खतरे वाले लोगों पर लंबे समय तक स्टडी करने की जरूरत है।

क्या बादाम भिगोकर खाना जरूरी है?

  • न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन का कहना है कि कई घरों में बादाम को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उसका छिलका उतारकर खाने की परंपरा है।
  • ऐसा माना जाता है कि भिगोने से बादाम नरम हो जाते हैं और उन्हें खाना आसान हो सकता है लेकिन इसके अलावा बादाम के छिलके में फाइटिक एसिड होता है जो मिनरल्स के अवशोषण को रोकता है।
  • भीगने से यह एसिड कम होता है और शरीर को पूरे पोषक तत्व मिलते हैं। हालांकि, बादाम को भिगोना अनिवार्य नहीं है।
  • सूखे बादाम भी पोषण देते हैं, किसी व्यक्ति को भीगे बादाम पसंद हैं या उन्हें पचाना आसान लगता है, तो वह इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकता है।

सुबह खाली पेट कितने बादाम खाएं?

न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन सलाह देती हैं कि बादाम की मात्रा व्यक्ति की पूरी डाइट, उम्र, एनर्जी की जरूरत और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करती है। आमतौर पर थोड़ी मात्रा में बादाम को रोजाना डाइट में शामिल किया जा सकता है। जरूरत से ज्यादा खाने पर इनकी कैलोरी और फैट की मात्रा भी बढ़ती है। इसलिए सिर्फ यह सोचकर कि ज्यादा बादाम खाने से दिमाग तेज होगा, इनका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

Does soaked almonds improve memoryDoes soaked almonds improve memory

किन लोगों को बादाम नहीं खाना चाहिए?

  • न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन सलाह देती हैं कि जिन लोगों को नट्स से एलर्जी है, उन्हें बादाम से बचना चाहिए।
  • बादाम खाने के बाद खुजली, चेहरे पर सूजन, सांस लेने में परेशानी या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  • इसके अलावा, जिन लोगों को किसी खास हेल्थ कंडीशन के कारण कैलोरी या फैट का सेवन सीमित रखने की सलाह दी गई है, उन्हें अपनी डाइट में बादाम की मात्रा तय करने से पहले डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन सलाह देती हैं क अगर आप याददाश्त और फोकस बेहतर रखना चाहते हैं, तो केवल बादाम खाने के बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। पर्याप्त नींद, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी और पोषक तत्वों से भरपूर बैलेंस डाइट के दिमाग की हेल्थ के लिए जरूरी हैं। डाइट में अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, बीज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना भी जरूरी है।

निष्कर्ष

भीगे बादाम पोषक तत्वों से भरपूर हैं और बैलेंस डाइट का हिस्सा बनकर सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इनमें मौजूद हेल्दी फैट, विटामिन E, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व शरीर और दिमाग की हेल्थ में योगदान देते हैं लेकिन सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से याददाश्त सीधे तेज होने का दावा करना सही नहीं है। बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए बैलेंस डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित फिजिकल एक्टिविटी और हेल्दी डेली रूटीन को साथ लेकर चलना जरूरी है।

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FAQ

  • बच्चों को रोजाना बादाम देना सही है?

    अगर बच्चे को नट्स से एलर्जी नहीं है और वह इन्हें आसानी से पचा लेता है, तो उम्र के अनुसार उचित मात्रा में बादाम बैलेंस डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।
  • क्या बादाम खाने के बाद चाय या कॉफी पी सकते हैं?

    आमतौर पर बादाम खाने के बाद चाय या कॉफी लेना अपने आप में सभी लोगों के लिए समस्या नहीं है। हालांकि, व्यक्ति की पाचन क्षमता और पूरी डाइट को ध्यान में रखना जरूरी है।
  • क्या बादाम वजन बढ़ा सकते हैं?

    बादाम पौष्टिक होने के साथ कैलोरी से भरपूर भी होते हैं। जरूरत से ज्यादा खाने पर कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 24, 2026 15:34 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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