Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या शुरुआती प्रेग्नेंसी में ज्यादा चाय-कॉफी मिसकैरेज का कारण बन सकता है? डॉक्टर से जानें

चाय या काॅफी में कैफीन पाया जाता है, इसलिए शुरुआती प्रेग्नेंसी शुरुआती प्रेग्नेंसी में इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। ऐसा न करना गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

शुरुआती प्रेग्नेंसी में हर गर्भवती महिला को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। असल में, इन्हीं दिनों गर्भपात का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए महिलाओं को सलाह दी जाती है कि इन दिनों अपने खानपान और फिजिकल मूवमेंट का ध्यान रखें। यहां तक कि कई प्रेग्नेंट महिलाएं इस दौरान काॅफी-चाय का सेवन करने से पूरी तरह बचती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि शुरुआती प्रेग्नेंसी में ज्यादा चाय या काॅफी पीने से मिसकैरेज हो सकता है। यहां सवाल उठता है कि क्या वाकई यह सच है? इस संबंध में जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता  से बात की है।

क्या वाकई ज्यादा चाय-काॅफी पीने से मिसकैरेज होता है?

does caffeine cause miscarriage in early pregnancy 01 (15)

साल 2008 में American Journal of Obstetrics & Gynecology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, "गर्भावस्था के दौरान कम मात्रा में कैफीन का सेवन करने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं की तुलना में अधिक कैफीन लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का जोखिम अधिक पाया गया।" इसका मतलब है कि यह सच है कि वाकई ज्यादा चाय या काॅफी पीने से मिकसैरेज का रिस्क हो सकता है। हालांकि, इसी स्टडी में यह भी बताया गया है कि सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन करने से इस तरह की समस्या नहीं होती है।

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प्रेग्नेंसी में कितनी मात्रा में पिएं चाय-काॅफी?

does coffee cause acid reflux in pregnancy 01 (13)

डाॅ. शोभा गुप्ता के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान 200 mg (लगभग 1 से 2 कप कॉफी) तक काॅफी पीना पूरी तरह सेफ होता है। इससे मिसकैरेज का रिस्क नहीं बढ़ता है। हां, अगर 200-300 mg तक रोजाना काॅफी पी जाए, तो यह गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यहां तक कि मिसकैरेज का रिस्क भी बढ़ जाता है। डाॅ. शोभा गुप्ता आगे सलाह देती हैं कि अगर किसी गर्भवती महिला को बीपी से संबंधित समस्या है, तो उन्हें काॅफी का सेवन करने से पहले अपने एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए।

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अधिक मात्रा में कैफीन क्यों रिस्की है?

  • अधिक मात्रा में कैफीन पीने से यह प्लेसेंटा को क्राॅस करके सीधे बच्चे तक पहुंच सकता है।
  • कैफीन की वजह से मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को विकसित होने के लिए जो एंजाइम चाहिए, उसमें कमी आने लगती है।
  • कैफीन के कारण ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं, जिस वजह से ब्लड फ्लो पर असर पड़ सकता है। यह स्थिति भी भ्रूण के विकास के लिए सही नहीं है।

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में चाय या काॅफी पीने में कोई बुराई नहीं है। हालांकि, इसकी मात्रा को सीमित रखना जरूरी है। साथ ही, इस बात का ध्यान रखें कि अगर पहले से ही कोई समस्या है, तो इसे अपनी बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा बनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • एक कप चाय या कॉफी में कितना कैफीन होता है?

    एक कप कॉफी में 95-100mg और एक कप चाय में 30-50mg कैफीन पाई जाती है। 
  • क्या डार्क चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक में भी कैफीन होता है?

    हां, सोडा, डार्क चॉकलेट और कुछ एनर्जी ड्रिंक्स में भी कैफीन होता है।
  • क्या कैफीन छोड़ने से गर्भपात का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है?

    नहीं, गर्भपात के कई अन्य कारण भी होते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। हालांकि, प्रेग्नेंसी में कैफीन की मात्रा सीमित रखना फायदेमंद है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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