Thu Oct 1, 2026 | 10:20 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

गॉलब्लैडर में पथरी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें रोजाना की 7 आदतें जो बढ़ा सकती हैं खतरा

गॉलब्लैडर या पित्त की थैली में पथरी होना आम समस्या बन गई है, लेकिन इसे आम बनाने की वजह लाइफस्टाइल की अनहेल्दी आदतें हैं, जिसे लोग रोजाना फॉलो भी कर रहे हैं। इस लेख में डॉक्टर ने रोजाना की 7 आदतों के बारे में विस्तार से बताया है।
गॉलब्लैडर में पथरी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें रोजाना की 7 आदतें जो बढ़ा सकती हैं खतरागॉलब्लैडर में पथरी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें रोजाना की 7 आदतें जो बढ़ा सकती हैं खतरा

पित्त की पथरी को अक्सर लोग पेट दर्द, गैस या एसिडिटी की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार लोगों को लगता है कि खाने-पीने में गड़बड़ी हो गई है, इसलिए पेट में दर्द हो रहा है, लेकिन अगर परेशानी लगातार हो रही हो, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में इसका कारण गॉलब्लैडर यानी पित्ताशय में पथरी की समस्या भी हो सकती है और इसके बनने के कारण रोजाना की आदतों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए हमने Dr. Sharad Malhotra, Senior Consultant & Director, Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy Aakash Healthcare, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि गॉलब्लैडर में बनने वाली पथरी आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या पित्त में मौजूद अन्य पदार्थों से बनती है। कई बार इसका कारण डाइट और लाइफस्टाइल भी हो सकता है।

पित्त की थैली में पथरी क्यों होती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, पित्त की पथरी पित्त के जमे हुए और कठोर टुकड़े होते हैं, जो गॉलब्लैडर में बनते हैं। लिवर पित्त बनाता है और पित्त नलिकाएं इसे बाइलेरी ट्रैक्ट के विभिन्न अंगों तक पहुंचाती हैं। अगर यह बीच में ही रुक जाए, तो रेत के छोटे-छोटे कण बनाने लगता है। इसे पथरी कहते हैं और यह पित्त की थैली में कई सारे हो सकते हैं या फिर एक गोल्फ की गेंद जितना बड़ा हो सकता है।

लाइफस्टाइल से जुड़ी 7 आदतें जो गॉलब्लैडर में स्टोन बना सकती हैं?

Dr. Sharad Malhotra कहते हैं, “पित्त की थैली में पथरी होने का कारण आनुवंशिकता, उम्र, वजन,  कुछ बीमारियां और तेजी से वजन कम करना जैसे फैक्टर्स हो सकते हैं। इसके अलावा, रोज की कुछ आदतें ऐसी हैं, जो खासतौर पर वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकती हैं।”

1. लंबे समय तक कुछ न खाना

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि अक्सर लोग सुबह के समय इतने बिजी होते हैं कि नाश्ता छोड़ देते हैं या कई घंटों तक खाना नहीं खाते। लंबे समय तक खाना न खाने से गॉलब्लैडर रेगुलर रूप से खाली नहीं हो पाता। कुछ लोगों में इससे पित्त के जमा होने और पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए दिनभर बहुत लंबे गैप के साथ खाने की आदत बनाने से बचना चाहिए।

2. तला-भुना और बहुत ज्यादा फैटी खाना

Dr. Sharad Malhotra ने कहा, “लोग खाने में तली-भुनी चीजें जैसे समोसा, पकौड़े, फ्राइड फूड, प्रोसेस्ड मीट और बहुत ज्यादा फैट वाली चीजें बहुत खाने लगते हैं। इससे वजन बढ़ने और मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसमें खासतौर पर ज्यादा सैचुरेटड फैट वाली डाइट को लंबे समय तक लेना शरीर के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसकी जगह खाने में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फाइबर वाले फूड्स ज्यादा लेने चाहिए।”

3. जल्दी वजन घटाने की कोशिश

Dr. Sharad Malhotra कहते हैं, “आजकल लोग तेजी से वजन कम करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए क्रैश कोर्स डाइट करने लगते हैं, लेकिन बहुत तेजी से वजन घटाने के चक्कर में बहुत कम कैलोरी वाला खाना या लंबे समय तक भूखे रहने लगते हैं। इससे गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।"

NIDDK के मुताबिक, जो लोग लंबे समय तक खाना नहीं खाते और तेजी से वजन घटाने की कोशिश करते हैं, उनका गॉलब्लैडर खाली नहीं हो पाता। कुछ लोग वजन घटाने वाली सर्जरी जिसे मेटाबोलिक और बैरिएट्रिक सर्जरी कराते हैं, उससे वजन तेजी से कम हो जाता है, जिससे गॉलब्लैडर में स्टोन बनने का रिस्क बढ़ सकता है।

4. सारा दिन बैठे रहना

Dr. Sharad Malhotra ने कहा, “जो लोग ऑफिस या घर में लंबे समय तक घंटों तक बैठे रहते हैं। इससे फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है और वजन बढ़ने का रिस्क बढ़ जाता है। जब वजन बढ़ता है, तो मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ये स्थितियां गॉलब्लैडर स्टोन का रिस्क बढ़ा सकती हैं। इसलिए लोगों को रोजाना थोड़ी देर चलना, एक्सरसाइज करना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए।”

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5. खाने में फाइबर कम होना

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि जो लोग सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज कम खाते हैं और उसकी जगह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाते हैं, तो डाइट में फाइबर की कमी हो सकती है। इसलिए फाइबर वाली डाइट वजन और मेटाबोलिक हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।

NIDDK के मुताबिक, पित्त की पथरी से बचाव के लिए ताजी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, बींस, मटर, ब्राउन राइस, ओट्स और गेहूं की रोटी डाइट में शामिल करनी चाहिए।

6. जंक और प्रोसेस्ड फूड खाना

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि कई लोगों की रोजाना की डाइट में पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स और दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने लगते हैं। हालांकि, ये चीजें कभी-कभार खाने बुरा नहीं है, लेकिन अगर ये रोज की डाइट का हिस्सा बन जाएं, तो परेशानी हो सकती है। इससे अतिरिक्त कैलोरी और अनहेल्दी फैट बढ़ सकता है। इससे वजन बढ़ सकता है और फिर इससे गॉलब्लैडर स्टोन का रिस्क बढ़ सकता है।

7. वजन बढ़ने के बाद भी लाइफस्टाइल न बदलना

Dr. Sharad Malhotra ने कहा कि मोटापे में खासतौर पर पेट के आस-पास ज्यादा फैट जमा होने लगता है। मोटापे में पित्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है और गॉलब्लैडर का फंक्शन पर भी असर पड़ सकता है, जिससे गॉलब्लैडर स्टोन का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए अगर लगातार वजन बढ़ रहा है, तो इसे समय रहते कंट्रोल करना जरूरी है।

निष्कर्ष
अगर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द हो रहा है, तो पित्त की पथरी की समस्या हो सकती है। अगर पेट दर्द तेज है या कई घंटों तक बना हुआ है और साथ में बुखार, ठंड लगना, लगातार उल्टी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसके साथ ही लोगों को अपनी लाइफस्टाइल की आदतों में भी बदलाव करने चाहिए, ताकि पित्त की पथरी के रिस्क को कम किया जा सकता है।

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FAQ

  • क्या गॉलब्लैडर की पथरी अपने आप गलकर या पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है?

    गॉलब्लैडर का रास्ता बहुत संकरा होता है और यह किडनी से बिल्कुल अलग अंग है। गॉलब्लैडर स्टोन पेशाब से बाहर नहीं निकल सकती।
  • महिलाओं में पुरुषों की तुलना में गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा ज्यादा क्यों होता है?

    एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण! एस्ट्रोजन पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाता है। गर्भावस्था, बर्थ कंट्रोल पिल्स या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के दौरान महिलाओं में पथरी बनने का रिस्क बढ़ सकता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 01, 2026 20:26 IST

    Published By : Aneesh Rawat
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