Fri Sep 11, 2026 | 09:50 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

क्या फैटी लिवर में आलू खा सकते हैं? एक्सपर्ट से जानें

फैटी लिवर में आलू पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में और सही तरीके से करना जरूरी है। उबला या कम तेल में बना आलू बेहतर विकल्प हो सकता है।

आजकल बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड का बढ़ता सेवन और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि इस स्थिति में क्या खाएं और क्या नहीं। खासतौर पर आलू जैसी आम सब्जी को लेकर काफी कंफ्यूजन रहता है कि फैटी लिवर में इसे खाना सही है या नहीं? इसी विषय पर सही जानकारी पाने के लिए हमने जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Centre की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से बात की-

क्या फैटी लिवर में आलू खा सकते हैं?

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, ''फैटी लिवर के मरीज सीमित मात्रा में आलू खा सकते हैं। आलू को पूरी तरह से डाइट से हटाने की जरूरत नहीं होती। आलू में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे पोटैशियम, विटामिन C और फाइबर, लेकिन इसे सही मात्रा और सही तरीके से खाना जरूरी है। ज्यादा मात्रा में आलू खाने से शरीर में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट बढ़ सकते हैं, जो फैटी लिवर के लिए सही नहीं है। फैटी लिवर के मरीजों को आलू उबला या ग्रिल किया हुआ खाना चाहिए, जो कम नुकसान पहुंचाता है।''

आलू से बने चिप्स, ज्यादा तेल में बनी आलू की सब्जी से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि आलू का सेवन हमेशा फाइबर के साथ करना चाहिए, इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होगा और आलू से होने वाला नुकसान कम हो जाएगा।

इसे भी पढ़ें: क्या अल्ट्रासाउंड से फैटी लिवर की स्टेज पता चलती है? डॉक्टर से जानें सही जानकारी

can we eat potato in fatty liver

फैटी लिवर के अलग-अलग ग्रेड में आलू खाने की सलाह

ग्रेड आलू खाने की सलाह
फैटी लिवर ग्रेड 1 इस स्टेज में लिवर में हल्का फैट जमा होता है, जिसे सही डाइट और लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जा सकता है। इस दौरान आलू को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती। आप इसे हफ्ते में 2-3 बार सीमित मात्रा में खा सकते हैं। उबला, ग्रिल्ड या हल्का भुना आलू बेहतर विकल्प होता है। साथ ही इसे हमेशा फाइबर जैसे सलाद या हरी सब्जियों के साथ खाना चाहिए और तले हुए आलू से बचना जरूरी है।
फैटी लिवर ग्रेड 2 इस स्थिति में आलू बहुत कम मात्रा में और कभी-कभी ही खाना चाहिए। उबला या ठंडा किया हुआ आलू बाकियों की तुलना में बेहतर माना जाता है। साथ ही हाई कार्ब डाइट से बचना चाहिए और आलू को हमेशा प्रोटीन व फाइबर के साथ लेना चाहिए, ताकि इसका असर कम हो सके।
फैटी लिवर ग्रेड 3 इस दौरान आलू का सेवन बहुत सीमित मात्रा में या डॉक्टर/डाइटिशियन की सलाह से ही करना चाहिए। तले-भुने, मसालेदार और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले फूड से पूरी तरह परहेज करना जरूरी है। इस स्टेज में लो-कार्ब और हाई-फाइबर डाइट पर ज्यादा फोकस करना चाहिए, ताकि लिवर पर ज्यादा दबाव न पड़े।

फैटी लिवर की समस्या में आलू खाने का सही तरीका क्या है?

फैटी लिवर के मरीजों के लिए आलू खाने का तरीका भी बहुत मायने रखता है। तले हुए आलू जैसे फ्रेंच फ्राइज, आलू चिप्स या ज्यादा तेल में बने आलू के पराठे से बचना चाहिए। इसकी जगह उबला हुआ आलू, हल्का भुना हुआ आलू या कम तेल में बनी आलू की सब्जी बेहतर विकल्प हो सकती है। अगर आलू को छिलके सहित खाया जाए तो उसमें मौजूद फाइबर पाचन के लिए भी फायदेमंद हो सकता है लेकिन छिलके का इस्तेमाल करने से पहले इसे बहुत अच्छे से धोना चाहिए।

PLOS One के साल 2025 के  Peer review के अनुसार,  यह स्पष्ट होता है कि बैंगनी आलू (Purple Potato) का अर्क हाई फैट डाइट के कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में ज्यादा प्रभावी है। चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह अर्क शरीर के वजन को कम करने, ग्लूकोज सहिष्णुता (glucose tolerance) में सुधार करने और ब्लड में लिपिड के लेवल को कंट्रोल करने में सहायक है। यह लिवर में होने वाले नुकसान (ऑक्सीडेटिव तनाव) को कम करने में मदद करता है और शरीर में फैट को सही तरीके से इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। बैंगनी आलू का अर्क शरीर में फैट के बैलेंस को सुधारने में मदद कर सकता है। इसके रिजल्ट बताते हैं कि यह मोटापा और उससे जुड़ी लिवर की समस्याओं, जैसे फैटी लिवर और स्टीटोहेपेटाइटिस, को कंट्रोल करने में एक अच्छा नेचुरल विकल्प साबित हो सकता है।

हालांकि ध्यान रखें कि यह शोध चूहों पर और बैंगनी आलू के अर्क पर किया गया था, न कि सामान्य आलू के सेवन पर। इसलिए, इसके परिणामों को सीधे अपनी डाइट पर लागू नहीं किया जा सकता।

इसे भी पढ़ें: फैटी लिवर में सेब खाना फायदेमंद है क्या? एक्सपर्ट से जानें

Cell Metabolism, 2023 की रिसर्च रिपोर्ट क्या कहती है?

इस क्लिनिकल स्टडी से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रतिरोधी स्टार्च (Resistant Starch) का सेवन नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज (NAFLD-MASLD) के उपचार में अत्यधिक प्रभावी है। रिसर्च के अनुसार, प्रतिदिन 40 ग्राम प्रतिरोधी स्टार्च (जो ठंडे किए गए आलू, केलों और फलियों में पाया जाता है) लेने से मरीजों के लिवर में जमा फैट (Intrahepatic Triglycerides) में लगभग 40% की कमी आई। इसका मुख्य कारण गट माइक्रोबायोटा (आंत के बैक्टीरिया) में पॉजिटिव बदलाव है, जो विशेष रूप से बैक्टीरिया को बढ़ाकर लिवर की सूजन और लिपिड चयापचय में सुधार करता है।

इसे भी पढ़ें: क्या फैटी लिवर से लिवर डैमेज हो सकता है? जानें डॉक्टर की राय

डॉक्टर से कब मिलें?

फैटी लिवर एक ऐसी डिजीज है जिसकी शुरुआत होते समय व्यक्ति को कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं, इसलिए कई लोगों को इसका पता देर से चलता है लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आपको लगातार थकान महसूस होती है, पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन या दर्द रहता है, बिना कारण वजन बढ़ या घट रहा है, तो यह लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, अगर रिपोर्ट में लिवर एंजाइम (SGPT/SGOT) बढ़े हुए आ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डायबिटीज, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को तो खासतौर पर नियमित चेकअप कराना चाहिए, क्योंकि इनमें फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है। अगर आपको इस तरह के लक्षण दिखते हैं तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

फैटी लिवर सही खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए काफी हद तक शुरुआती स्टेज में कंट्रोल किया जा सकता है। जहां तक आलू का सवाल है, इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि संतुलित मात्रा और सही तरीके से सेवन करना ज्यादा जरूरी है। उबला हुआ, ग्रिल्ड या कम तेल में बना आलू एक बेहतर विकल्प हो सकता है, जबकि तले-भुने रूप से बचना चाहिए। फैटी लिवर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे नजरअंदाज किया जाए। समय रहते जागरूक होकर और छोटी-छोटी आदतों में सुधार करके आप अपने लिवर को हेल्दी रख सकते हैं।

FAQ

  • क्या उबला आलू फैटी लिवर के लिए सुरक्षित है?

    उबला हुआ आलू सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें तेल नहीं होता और यह पचने में भी आसान होता है।
  • फैटी लिवर में आलू के पराठे खा सकते हैं?

    कम तेल में बने पराठे कभी-कभी खा सकते हैं, लेकिन रोजाना या ज्यादा तेल-घी वाले पराठों से बचना चाहिए।
  • क्या ठंडा आलू फायदेमंद है?

    ठंडा किया हुआ उबला आलू रेजिस्टेंट स्टार्च का अच्छा सोर्स होता है, जो गट हेल्थ सुधारने और लिवर फैट कम करने में मदद कर सकता है।
  • क्या आलू को छिलके के साथ खाना बेहतर है?

    छिलके के साथ खाने से फाइबर ज्यादा मिलता है, जो पाचन और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है। बस इसे अच्छे से धोना जरूरी है।
  • फैटी लिवर में किन चीजों को खाने से बचना चाहिए?

    तले हुए फूड, जंक फूड, शुगर ड्रिंक्स, ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड से शरीर को ज्यादा नुकसान होता है, इसलिए इनसे दूरी बनाना ज्यादा जरूरी है।

Read Next

फैटी लिवर में सेब खाना फायदेमंद है क्या? एक्सपर्ट से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Apr 05, 2026 13:52 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 05, 2026 13:52 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 05, 2026 13:52 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Archana Jain

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content