महिलाओं में वजाइनल इंफेक्शन यानी योनि संक्रमण एक आम समस्या है। खुजली, जलन, असामान्य डिस्चार्ज और योनि में असहजता जैसे लक्षणों को अक्सर महिलाएं सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। कई बार दवाइयां लेने के बाद राहत मिल जाती है, लेकिन कुछ समय बाद संक्रमण दोबारा हो जाता है। यदि किसी महिला को बार-बार वजाइनल इंफेक्शन हो रहा है, तो इसके पीछे केवल साफ-सफाई की कमी या हार्मोनल बदलाव ही जिम्मेदार नहीं होते। कुछ मामलों में यह अनियंत्रित ब्लड शुगर यानी डायबिटीज का संकेत भी हो सकता है। इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
डायबिटीज और वजाइनल इंफेक्शन के बीच क्या संबंध है?
Can Recurrent Vaginal Infection An Early Sign Of Diabetes
डायबिटीज होने पर शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। जब ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ती है, तो इसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों के साथ योनि के वातावरण पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से अनियंत्रित डायबिटीज में योनि के आसपास के टिश्यूज और स्राव में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कैंडिडा (Candida) नामक फंगस को पनपने का अनुकूल वातावरण मिलता है।
इसके अलावा, लंबे समय तक ब्लड शुगर अधिक रहने से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को बार-बार यीस्ट इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए जिन महिलाओं को बार-बार फंगल इंफेक्शन हो रहा है और सामान्य उपचार के बाद भी समस्या ठीक नहीं हो रही, उन्हें अपना ब्लड शुगर जांचने के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2023 में American Diabetes Association के क्लिनिकल जर्नल Clinical Diabetes में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में वल्वा और योनि से जुड़े संक्रमण—विशेष रूप से बार-बार होने वाले कैंडिडल संक्रमण (Candida vulvovaginitis/यीस्ट इंफेक्शन) —और अन्य वल्वर डर्मेटोलॉजिकल समस्याओं का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसके होने पीछे के कारण की बात करें, तो अनियंत्रित ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसीमिया) और टिश्यू में ग्लूकोज का उच्च स्तर फंगल और बैक्टीरियल विकास को बढ़ावा देता है। नतीजतन बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक कि इस तरह के वजाइनल संक्रमण ठीक होने में भी स्वस्थ महिलाओं की तुलना में अधिक समय लेते हैं।
साल 2021 में Journal of Medical Science में प्रकाशित शोध से भी इस बात की पुष्टि होती है कि डायबिटीज के मरीजों में जननांग क्षेत्र (Vulvovaginal Candidiasis) में कैंडिडा फंगस के संक्रमण का खतरा स्वस्थ लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है।
बार-बार वजाइनल इंफेक्शन के लक्षण
यीस्ट इंफेक्शन के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे-
- योनि और उसके आसपास तेज खुजली या जलन होना।
- सफेद, गाढ़ा और पनीर जैसा डिस्चार्ज होना, जिसमें आमतौर पर तेज दुर्गंध नहीं होती।
- पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना।
- यौन संबंध बनाते समय दर्द या असहजता होना।
- योनि के आसपास लालिमा, सूजन और त्वचा में जलन होना।
- यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो केवल सामान्य दवाइयों से इलाज करने के बजाय संक्रमण के वास्तविक कारण का पता लगाना जरूरी है।
क्या हर वजाइनल इंफेक्शन डायबिटीज के कारण होता है?
- ऐसा बिल्कुल नहीं है। योनि संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं। यीस्ट इंफेक्शन के अलावा बैक्टीरियल वेजिनोसिस, कुछ यौन संचारित संक्रमण, एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी भी संक्रमण जैसी परेशानियां पैदा कर सकती हैं।
- इसलिए केवल खुजली या डिस्चार्ज के आधार पर डायबिटीज का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। हालांकि, बार-बार होने वाले यीस्ट इंफेक्शन के मामलों में डायबिटीज की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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किन जांचों से पता चल सकती है समस्या?
- यदि किसी महिला को एक साल में तीन या उससे अधिक बार यीस्ट इंफेक्शन होता है, तो इसे बार-बार होने वाला या रिकरेंट वल्वोवैजाइनल कैंडिडायसिस माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ योनि स्राव की जांच, माइक्रोस्कोपी या जरूरत पड़ने पर फंगल कल्चर कराने की सलाह दे सकते हैं।
- डायबिटीज की आशंका होने पर फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c जांच कराई जा सकती है। एचबीए1सी पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर की जानकारी देती है। इसके आधार पर डॉक्टर आगे की जांच और उपचार तय करते हैं।
वजाइनल इंफेक्शन से बचाव के लिए क्या करें?
महिलाओं को योनि की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। निजी अंगों को साफ और सूखा रखें, सूती अंडरगारमेंट्स पहनें और पसीने या नमी वाले कपड़े लंबे समय तक न पहनें। योनि के अंदर साबुन, परफ्यूम या केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाएं लेने से बचें। यदि डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है।
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निष्कर्ष
बार-बार होने वाले वजाइनल इंफेक्शन को महिलाओं को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से यदि संक्रमण के साथ अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना कोशिश वजन कम होना या लगातार थकान जैसे लक्षण भी मौजूद हों, तो डायबिटीज की जांच करवाना जरूरी है। सही समय पर संक्रमण के कारण की पहचान और ब्लड शुगर की जांच से भविष्य में होने वाली परेशानियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
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FAQ
क्या डायबिटीज के लिए ली जाने वाली दवाएं भी बार-बार वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ाती है?
हां, ऐसा होना संभव है। दरअसल, दवा लेने के यूरिन के रास्ते अतिरिक्त ग्लूकोज बाहर निकलता है, जिससे योनि में शुगर बढ़ जाता है, जिससे फंगस पनपने का जोखिम बढ़ जाता है।क्या लगातार रहने वाले वजाइनल इंफेक्शन के दौरान सेक्शुअल पार्टनर का भी चेकअप जरूरी होता है?
हां, ऐसा करना जरूरी होता है। बार-बार रिकरेंट इंफेक्शन होने के मामलों में पार्टनर में बिना लक्षण वाले फंगल ट्रांसफर का रिस्क रहता है। इसकी जांच के लिए एक्सपर्ट की राय लेना जरूरी है।
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Oct 31, 2026 11:03 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
