
हम बीमार न पड़े इसके लिए जरूरी है कि हमारी इम्युन सिस्टम मजबूत हो। इसके लिए हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाते हैं। इसके बावजूद मौसम बदलते ही इसकी मार हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगती है। बीमार पड़ने के बाद तरह-तरह की दवाईयों का सेवन किया जाता है और प्रॉपर ट्रीटमेंट की हेल्प भी लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीमारियां जैसे कब्ज, एनीमिया में आप आयुर्वेदिक उपचार की भी मदद ले सकते हैं। अच्छी बात ये होती है इन आयुर्वेद में मौजूद इन जड़ी-बूटियों का उपयोग करने का कोई नेगेटिव इफेक्ट भी नहीं पड़ता है। विशेषकर महिलाओं की बात की जाए, तो उन्हें पुरुषों की तुलना में ज्यादा बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका रहती है। ऐसे में उन्हें खासतौर पर कुछ जड़ी बूटियों का सेवन करना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं कि वो कौन सी जड़ी बूटियां हैं, जो आपको कब्ज और एनीमिया जैसी बीमारियों से तो राहत देंगे ही साथ ही अन्य बीमारियों में भी कारगर साबित होंगे।
शतावरी
शतावरी भी बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जिसका कई तरह की बीमारियों का इलाज करने में उपयोग किया जाता है। शतावरी, बेल या झाड़ जैसी दिखती है। इसके उपयोग से तनाव, मूड स्विंग, हार्मोनल बदलाव जैसी बीमारियों में भी किया जाता है। इसके अलावा, शतावरी रेसमोसस पौधे से प्राप्त होती है और आयुर्वेद के अनुसार यह एनीमिया के लिए एक अच्छा उपाय माना जाता है। शतावरी को एक पेय के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। आप चाहें तो इसको दूध के साथ मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं।
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आमलकी फल
यह बेहतरी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। एनीमिया होने की स्थिति में इस फल के चूर्ण को रोजाना सुबह गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं। इससे खून बढ़ता है और रक्त कोशिकाओं की संख्या में इजाफा होता है। यह फल मूलरूप से खट्टा होता है, जो कि एनीमिया के इतर अन्य बीमारियों में भी उपयोगी है। खासकर पित्त से संबंधित बीमारियों में इस फल का इस्तेमाल किया जाता है। यह फल विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है और परिसंचरण तंत्र से जुडी बीमारियों का इलाज करने में मदद करता है।
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हरीतकी
हरीतकी के छिलके का पाउडर मुख्य रूप से एनीमिया के इलाज के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। इसके चूर्ण को गर्म पानी के साथ मिलाकर खाने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यह उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा स कता है। खैर, हरीतकी के सेवन से एनीमिया के साथ-साथ पाचन तंत्र भी बेहतर होता है। असल में हरीतकी ऐसे पोषक तत्व को अवशोषित करने में मदद करती है, जिससे शरीर में खून बढ़ता है। इस तरह यह एनीमिया के मरीजों के लिए उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बन जाती है।
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अशोक
अशोक का पेड़ कहीं भी आसानी से मिल जाता है। इसके फूल लाल रंग के होते हैं। यह आयुर्वेदिक जड़ी महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें इस्तेमाल से महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलती है जैसे रक्तस्राव की समस्याएं कम करता है, स्किन के लिए उपयोगी है और फीमेल हार्मोन को भी बैलेंन करेन का काम करता हैं। यह पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी कारगर हो सकता है। इसके अलावा यह कृमि संक्रमण के प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है। यहां तक कि दर्द कम करने के लिए प्रभावित जगह पर अशोक का लेप लगाया जा सकता है। इससे दर्द से राहत मिलती है।
शतपुष्पा
अन्य आयुर्वेदिक जड़ी बूटी की तरह शतपुष्पा भी कई बीमारियों से राहत दिलाने में मदद करता है। जैसे कब्ज की समस्या को बेहतर करता है, हड्डियों की कमजोरी दूर करता है और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाने में महति भूमिका निभाता है। आप किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह पर इसका सेवन कर सकते हैं।
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