40 साल के बाद कभी ना खाएं ये 2 चीजें, पड़ जाएंगे बीमार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 06, 2018
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Quick Bites

  • लंच और नाश्‍ते के बीच 4 से 5 घंटे का अंतर होता है।
  • रात के खाने में चिकन या मछली खा सकती हैं।
  • डाइट और एक्सरसाइज दोनों का संतुलन जरूरी होता है।

आॅफिस की भागदौड़ और अन्य काम चलते लोग अक्सर सही तरह से खा नहीं पाते हैं। जिसका असर हमें बीमारी के रूप में मिलता है। वैसे तो हर उम्र के इंसान को अपनी डाइट पर ध्यान रखना चाहिए। लेकिन 40 साल से 45 साल तक लोगों के लिए ये चीज और भी जरूरी हो जाती है। इस उम्र में शरीर में कई तरह के हॉर्मोंस में परिवर्तन आते हैं। इसलिए आपको अपनी डाइट में भी बदलाव लाने की जरूरत होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को स्‍वस्‍थ रहने के लिए अपने डाइट चार्ट में जरूरी पोषक तत्‍वों को शामिल करने की ज्यादा जरूरत पड़ती है। खाने में विटामिन, जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषणयुक्‍त की भरपूर मात्रा हो। फिट और हेल्‍दी रहने के लिए हेल्‍दी डाइट चार्ट होना जरूरी है। आज हम आपको कुछ ऐसी चीजें बता रहे हैं जो आपकी डाइट में जरूर होनी चाहिए।

लंच और नाश्‍ते में रखें इतना अंतर

लंच और नाश्‍ते के बीच 4 से 5 घंटे का अंतर होता है। लंच में स्वास्थ्यवर्धक आहार लीजिए, इससे आप चुस्त दुरुस्त रहेंगी। लंच में सब्जी, दाल, दही व चपाती को शामिल कीजिए। लंच में सीजनल और हरी सबिज्‍यों को जरूर शामिल कीजिए। इसके लिए ब्रोकली, पालक, सीताफल, लौकी आदि का सेवन करें या कम तेल में बनी पनीर की भुजिया भी लंच में ले सकती हैं।

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मांसाहारी के लिए डाइट

यदि आप मांसाहारी हैं तो रात के खाने में चिकन या मछली खा सकती हैं। लेकिन यदि आप रेड मीट खा रही हैं तो सप्‍ताह में केवल एक ही दिन इसका सेवन कीजिए। इसके अलावा एक प्‍लेट ब्राउन चावल टमाटर के सॉस के साथ खाइए, इसमें लाइकोपीन होता है जो प्रोस्‍टेट के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा गाजर, पालक या बीन्‍स की सब्‍जी के साथ गेंहू की रोटी खाइए।

फाइबर है बहुत जरूरी

आमतर लोगों को अधिक बीमारी शरीर में फाइबर की कमी के चलते होती है। जब शरीर में फाइबर की कमी होती है तो इसका सीधा असर पाचन शक्ति पर पड़ता है। इसलिए अपनी डाइट में खासकर फाइबर, आयरन और कैल्शियम का प्राथमिकता दें। 40 की उम्र के बाद बीच बीच में टेस्ट कराते रहें ताकि इनकी कमी का पता चल सके। कोशिश करें कि इन्हें प्राकृतिक स्रोतों से ही प्राप्त करें, लेकिन यदि डॉक्टर इनकी गोलियां लेने को कहें तो इनसे भी परहेज न करें।

रोजाना नापे वजन

रोजाना वजन जांचना कुछ लोगों को अपना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है, लेकिन 40 की उम्र के बाद यह काम करना लाभदायक साबित नहीं होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कई हॉर्मोन संबंधी बदलाव होते हैं, जिसके चलते वजन में परिवर्तन होना लाजिमी होता है। तो ऐसे में खानपान पर ध्यान और नियमित व्यायम भर काफी होता है। रोजाना अपना वजन नापना ऐसे में आवश्यक नहीं होता है। इससे मानसिक तौर पर असहजता होती है।

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खानपान के लिए रहें सक्रिय

लोगों में एक आम धारणा होती है कि वे यदि थोड़ी ज्यादा एक्सरसाइज कर लेंगे तो उनके द्वारा खाया गया ज्यादा कैलोरी वाला भोजन भी मोटापा नहीं बढ़ाएगा और न ही इससे कोई समस्या होगी। दरअसल उम्र के साथ शरीर की शक्ति भी कम होती जाती है और शरीर को सभी चीजों की संतुलित मात्रा की जरूरत होती है। ऐसे में डायट और एक्सरसाइज दोनों का संतुलन जरूरी होता है।

धूम्रपान और शराब से रहें दूर

बढ़ती उम्र के साथ-साथ शरीर की मसल्स भी कम होती जाती हैं और उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी। खासतौर पर 40 पार कर चुकी महिलाओं में तो इसका प्रभाव साफ देखा जा सकता है। ऐसे में उनका शरीर एल्कोहल के दुष्प्रभाव को झेलने योग्य नहीं रहता है। शोध भी बताते हैं कि 40 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में एल्कोहल के नियमित सेवन से गंभीर नुकसान होते हैं। तो इस उम्र में एल्कोहल कम नहीं, बल्कि बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए।

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