Gastroenteritis: इन कारणों से हो सकता है पेट का इंफेक्शन या पेट का फ्लू, एक्सपर्ट से जानें इससे बचाव के उपाय

गैस्ट्रोएंटेराइटिस या पेट के इंफेक्शन की समस्या कई कारणों से हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इस बारे में।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraUpdated at: Dec 10, 2020 15:13 IST
Gastroenteritis: इन कारणों से हो सकता है पेट का इंफेक्शन या पेट का फ्लू, एक्सपर्ट से जानें इससे बचाव के उपाय

गैस्ट्रोएंटेराइटिस को सामान्य भाषा में पेट में इंफेक्शन या फिर पेट का फ्लू (Stomach Flu) कहते हैं। आयुर्वेद की भाषा में इस बीमारी को जठरांत्र के नाम से भी जाना जाता है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis) की समस्या होने पर पेट में दर्द, आंतों में सूजन, जलन इत्यादि की परेशानी होने लगती है। मेट में मरोड़, दस्त और अत्यधिक उल्टी होना इसके सामान्य लक्षण हैं। गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis) की समस्या वायरल इंफेक्शन और बैक्टीरियल  इंफेक्शन के कारण हो सकता है। मनीपाल हॉस्पीटल के गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर कुणाल दास बताते हैं कि पेट में फ्लू या गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने का कारण बैक्टीरियल, परजीवा और दूषित भोजन खाने के कारण हो सकता है। कई लोग इस समस्या को फूड पॉइजनिंग समझने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन आपको बता दें कि दूषित भोजन खाने से शरीर में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। बुजुर्गों और शिशुओं को यह समस्या काफी जल्दी होती है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस के कारण डिहाइट्रेशन की परेशानी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में गंभीर हालात में मरीजों को अस्पताल भर्ती कराना पड़ सकता है।

गैस्ट्रोएंटेराइटिस के सामान्य लक्षण (Symptoms of Gastroenteritis)

  • पेट में ऐंठन और दर्द।
  • मतली, उल्टी या दोनों।
  • कभी-कभी मांसपेशियों में दर्द या सिरदर्द।
  • वजन कम होना।
  • डायरिया होना।
  • सिर दर्द होना।
  • बुखार आना।
  • कभी-कभी तेज बुखार भी आ सकता है।
  • ठंड लगना।

डॉक्टर कुणाल दास बताते हैं कि ये सभी लक्षण 1 से 3 दिनों तक दिखने बाद आपको इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा समय तक पेट में दर्द या मल में खून आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इसे भी पढ़ें - गैस और कब्ज का रामबाण इलाज हैं ये 3 नानी के नुस्खे, जानें इस्तेमाल का तरीका और फायदे 

बच्चों में दिखने वाले लक्षण

  • बिना कारण परेशान होना।
  • चिड़चिड़ापन की समस्या।
  • तेज बुखार होना।
  • बच्चा कमजोर होना
  • मल में खून आना
  • ज्यादा देर तक उल्टी होना
  • यूरिन त्यागने में परेशानी
  • अच्छे से नींद ना आना 

गैस्ट्रोएंटेराइटिस के कारण (Causes of Gastroenteritis)

डॉक्टर कुणाल बताते हैं कि पैरासाइट इंफेक्शन, वायरल इंफेक्शन और बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण लोगों को गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या होती है। बाहर का दूषित खाना, पानी या फिर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी आपको गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या हो सकती है। 

उन्होंने कहा कि नोरोवायरस (norovirus) और रोटावायरस (rotavirus) वायरल इंफेक्शन के मुख्य कारण होते हैं। ऐसे में अगर आप इन समस्याओं से ग्रसित हैं, जो आपको गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों को ई.कोली (E.coli) और साल्मोनेला (salmonella) के कारण भी गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या हो सकती है। इसका कारण अधपका भोजन हो सकता है। 

इसे भी पढ़ें - भूलकर भी न करें इन 5 सब्जियों का सेवन, बढ़ा देगी गैस और कब्ज की परेशानी

नवजात शिशुओं और वृद्ध व्यक्तियों को गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसका कारण कमजोर इम्यून सिस्टम होता है। ऐसे में हमें अपने डाइट में इम्यून को मजबूत करने वाले आहार को शामिल करने चाहिए। 

गंदे हाथों से खाना खाने वालों को भी यह समस्या हो सकती है। 

हाइजीन का ख्याल ना रखा भी गैस्ट्रएंटेराइटिस का मुख्या कारण हो सकता है। 

गैस्ट्रोएंटेराइटिस के निदान (diagnosis of Gastroenteritis)

डॉक्टर कुणाल बताते हैं कि अधिकतर मामलों में स्टूल टेस्ट के जरिए ही गैस्ट्रोएंटेराइटिस की जांच की जाती है। टूल टेस्ट से बैक्टीरिया या पैरासाइट की जानकारी ली जाती है।

कैसे किया जाता है गैस्ट्रोएंटेराइटिस का इलाज (Treatment of Gastroenteritis )

  • डॉक्टर लक्षणों के आधार पर मरीजों कुछ दवाइयां लेने की सलाह देते हैं। करीब 2 से 10 दिनों के अंदर मरीज इस समस्या से छुटकारा पा सकता है। 
  • शिशुओं को ORS घोल पिलाने की सलाह दी जाती है। 
  • गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। क्योंकि अधिक उल्टी और दस्त के कारण मरीज के शरीर में पानी का स्तर काफी कम हो जाता है।
  • इसके अलावा खूब सारा पानी और तरह पदार्थ का सेवन करने के लिए डॉक्टर कहते हैं।

गैस्ट्रोएंटेराइटिस का बचाव (Prevention of Gastroenteritis)

  • डॉक्टर्स के निर्देशों का पालन करें।
  • शिशुओं को गैस्ट्रोएंटेराइटिस का टीका लगवाना ना भूलें।
  • जूस और पानी पिएं। 
  • डॉक्टर की सलाहनुसार कुछ दिनों तक हैवी डाइट ना लें।
  • आसानी से पचने वाले डाइट को अपने आहार में शामिल करें। 
  • केला, चावल, खिचड़ी, दलिया इत्यादि चीजों का सेवन करें। 
  • फैटी युक्त आहार का सेवन ना करें। 
  • कमजोरी महसूस होने पर आराम करें।
  • खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। 
  • अपने वॉशरूम को अच्छी तरह साफ रखें। 
  • जंक फूड्स का सेवन ना करें।
  • हाइजीन का अच्छी तरह ख्याल रखें। 
  • बिना डॉक्टर्स की सलाह दे दवाई ना लें।
  • पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। 
  • अगर आपको तरल पदार्थ खाने में भी परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर्स के पास जाएं।
  • दस्त या उल्टी को रोकने के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें। 
  • यात्रा के दौरान साफ-सफाई का ख्याल रखें। ट्रेन या फिर बस स्टेशन पर खाने से बचें।

इन डाइट से करें परहेज (Avoid these Foods)

  • डेयरी उत्पादन का सेवन ना करें।
  • वसायुक्त आहार ना लें।
  • कैफीन से दूरी बनाएं। 
  • शराब और धूम्रपान का सेवन करने से बचें।
  • फाइबरयुक्त आहार लेने से बचें। इससे आपको दस्त और उल्टी की परेशानी बढ़ सकती है। ब्रोकली, नाशपाती, सेब, तिल के बीज, ओट्स इत्यादि चीजों में काफी ज्यादा फाइबर होता है। 
  • चीनी का सेवन ना करें। 
  • खट्टे फलों का सेवन ना करें।
  • ग्लूटेनयुक्त आहार का सेवन करने से बचें। जौ, राई ओट्स इत्यादि ग्लूटेन युक्त आहार होते हैं। यह दस्त और पेट में दर्द की परेशानी को बढ़ा सकते हैं। 

गैस्ट्रोएंटेराइटिस का घरेलू उपचार (Home Remedies for Gastroenteritis)

लौंग चबाएं

पेट में फ्लू या गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या होने पर सुबह-सुबह दो लौंग चबाएं। यह आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। लौंग में एंटी माइक्रोबियल प्रोपर्टीज के गुण पाए जाते हैं, जो इंफेक्शन की परेशानी को दूर करने में सहायक होते हैं और पाचनतंत्र को दुरुस्त करते हैं। 

लहसुन की कली

सुबह खाली पेट 2 से 3 लहसुन की कली का सेवन करें। यह आपके पेट के लिए काफी अच्छा होता है। इसमें प्राकृतिक रूप से एंटी-बायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो पेट में होने वाली गट की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं।

हल्दी और शहद

1 चम्मच हल्दी में 2 चम्मच शहद मिलाएं। इस पेस्ट का सेवन रोजाना करें। आप इस मिश्रण को स्टोर करके रख सकते हैं। रात में खाने के बाद रोजाना इसका सेवन करें।

 

Read more articles on Other-Diseases in Hindi

 

 

Disclaimer