बच्चों में गैस और बदहजमी का कारण बन सकते हैं ये 8 फूड्स, एक्सपर्ट से जानें इनसे बचाव के उपाय

क्या आपके बच्चे को गैस, बदहजमी और कब्ज की समस्या रहती है? ऐसे में आपको बच्चों में गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जानना चाहिए। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 14, 2021
बच्चों में गैस और बदहजमी का कारण बन सकते हैं ये 8 फूड्स, एक्सपर्ट से जानें इनसे बचाव के उपाय

बच्चे हो या बड़े गैस, कब्ज और बदहजमी जैसी पेट की समस्याएं हर किसी को परेशान करती हैं। बात अगर बच्चों में गैस की समस्या (gas in toddlers) की करें तो, ये कई कारणों से हो सकता है। सबसे पहला कारण है डाइट, जिनमें कि कुछ ऐसे फूड्स आते हैं जो कि पेट में गैस बनाते हैं। दूसरा खराब मेटाबोलिज्म, जिसकी वजह से बच्चे जो भी खाते हैं वो आसानी से पचता नहीं है और बदहजमी व कब्ज का कारण बनता है। तीसरा एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी की कमी, जिसकी वजह से बच्चों का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और उन्हें क्रेविंग व अनहेल्दी चीजों को खाने की आदत लग रही है। पर आज हम बात बच्चों में गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थों (gas causing foods in toddlers) की करेंगे जिन्हें, बच्चों को खाने से बचना चाहिए। इसी बारे में हमने डेलनाज चंदूवाडिया (Delnaaz Chanduwadia), जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के मुख्य आहार विशेषज्ञ से बात की। साथ ही हम उनसे ये भी जानेंगे कि इन फूड्स के ऐसे नुकसानों से कैसे बचें। 

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बच्चों में गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ-Gas causing foods in toddlers

1. चना 

बच्चों के लिए चना खाना कई बार नुकसानदेह भी हो सकता है। दरअसल, चना प्रोटीन से भरपूर फूड है पर इसे पचाना आसान नहीं है। दरअसल, चना जब पेट द्वारा मेटाबोलाइज होता है तो इससे कुछ शुगर भी बाहर निकलता है। जब ये शुगर छोटी आंत में पहुंचती हैं तो बड़ी आंत की ओर बढ़ने पर वे पानी को आकर्षित करती हैं, जहां वे आंत के बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंटेट होती हैं। पानी के अवशोषण से आंतों की दीवार में खिंचाव और विस्तार होता है, जिससे दर्द और परेशानी होती है, जबकि फर्मेंटेशन के कारण पेट में अतिरिक्त गैस का उत्पादन होता है। इस वजह बच्चे जब चना खाते हैं तो उनके पेट में ये गैस बनाने का काम करता है। इसलिए कोशिश करें बच्चों को ज्यादा चने ना दें और दें भी तो उसमें हींग और काला नमक मिला कर दें। 

2. गोभी

पत्ता गोभी, ब्रोकली, फूलगोभी, स्प्राउट्स, केल और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं और यह सब आपके शरीर में पचने के लिए थोड़ा समय लेती हैं। लेकिन आपकी आंत में बैक्टीरिया इसे ऊर्जा के लिए उपयोग करना करते हैं और इन्हें तोड़ने में लग जाते हैं जिसकी वजह से ये बच्चों में गैस बनाती है। इसके अलावा हर किसी की सहनशीलता अलग होती है और इसलिए बहुत अधिक फूलगोभी खाने पर बच्चों में पेट से जुड़ी परेशानी,  होती है जैसे अतिरिक्त गैस और सूजन। ऐसे में गोभी खाने के बाद गैस से बचाव का एक उपाय यही है कि पर्याप्त पानी पीना पिएं। साथ ही इसे अच्छे से पका कर खाएं जो कि पाचन संबंधी समस्याएं को दूर करती है। 

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3. आलू

आलू खाने का नुकसान ये भी है कि आलू से कई लोगों को गैस की समस्या होती है। दरअसल, इसमें स्टार्च की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। आलू, मक्का, नूडल्स और गेहूं सहित अधिकांश स्टार्च गैस का उत्पादन करते हैं क्योंकि वे बड़ी आंत में टूट जाते हैं। साथ ही आलू का फाइबर कई बार सूजन, गैस, ऐंठन और दस्त आदि का कारण बनता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा आलू खाने से ये बच्चों में मोटापे का कारण बनता है। इसके अलावा ज्यादा आलू खाने से इसका फाइबर जिंक, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे कुछ पोषक तत्वों के अवशोषण को भी रोक सकता है, जिससे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। ऐसे में आलू खाने पर गैस बनने से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीते रहें। क्योंकि फाइबर पाचन तंत्र के माध्यम से चलता है, यह स्पंज की तरह पानी को सोख लेता है। अगर आपके पाचन तंत्र में इसके लिए पर्याप्त पानी नहीं होता है तो, फाइबर मतली और कब्ज पैदा कर सकता है।

4. दूध

लैक्टोज एक चीनी है जो दूध और पनीर और आइसक्रीम सहित अधिकांश डेयरी उत्पादों में पाई जाती है। जो लोग पर्याप्त एंजाइम लैक्टेज का उत्पादन नहीं करते हैं उन्हें लैक्टोज को पचाने में कठिनाई होती है, जिसे लैक्टोज असहिष्णुता के रूप में जाना जाता है। बढ़ी हुई गैस लैक्टोज असहिष्णुता का एक लक्षण है। ये सभी लक्षण इसलिए होते हैं क्योंकि छोटी आंत डेयरी उत्पादों में पाए जाने वाले शुगर को ठीक से पचा नहीं पाती है। नतीजतन, आंत में बैक्टीरिया बिना पचे लैक्टोज को फर्मेटेंट करते हैं, जिससे गैस, ब्लॉटिंग और कब्ज की समस्या हो जाती है। 

5. मूली

मूली में रैफिनोज होता है। रैफिनोज एक प्रकार का शुगर है जो कि ब्रसेल्स स्प्राउट्स, ब्रोकोली, मूली, अजवाइन, गाजर और गोभी में पाई जाती है। ये सब्जियां घुलनशील फाइबर से भी भरपूर होती हैं, जो छोटी आंत तक पहुंचने तक टूटती नहीं हैं और गैस का कारण भी बन सकती हैं। मूली खाने से होने वाली गैस से निपटने के लिए आप पानी के साथ कुछ अजवाइन या काले नमक के साथ पुदीना के पत्ते भी ले सकते हैं।

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6. नट्स

नट्स में केवल प्रोटीन, फैट और विटामिन और खनिज नहीं होते बल्कि इसमें फाइटेट्स और टैनिन नामक ये छोटे यौगिक होते हैं जो अंततः हमारी पाचन प्रक्रियाओं को खराब कर सकते हैं।अगर आपके बच्चे को नट्स खाने के बाद कभी गैस या ब्लॉटिंग की समस्या होती है, तो इसके पीछे यही कारण हो सकता है। यह एक आम साइड इफेक्ट है। इसके अलावा ज्यादा मात्रा में  नट्स खाने से ये दस्त का कारण बन सकती है। बादाम और मूंगफली जैसे नट्स में कार्ब्स होते हैं जो पिस्ता और काजू जैसे कुछ अन्य नट्स की तुलना में पचाने में आसान होते हैं। इसलिए गैस से बचाव के लिए अपने बच्चे को ये दो नट्स दे सकते हैं। सुनिश्चित करें कि बादाम और मूंगफली अनसाल्टेड दें। 

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7. दाल

दाल में प्रोटीन और यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है जिसकी वजह से ये बच्चों में गैस की समस्या का कारण बन सकता है। साथ ही कई बार हमारे बच्चे का पाचनतंत्र दाल पचा नहीं पाता है। दरअसल, जब हम दाल खाते हैं तो बड़ी आंत में बैक्टीरिया इन कार्बोहाइड्रेट को तोड़ देते हैं। ऐसे में इन दौरान गैस का प्रोडक्शन होता है जो कि पेट फूलने का कारण बनता है। साथ ही इसमें शुगर और फाइबर होते हैं जिन्हें हमारे शरीर को पचाने में मुश्किल होती है। जब ये शुगर हमारी बड़ी आंतों में बैक्टीरिया से मिलती है, तो भी ये गैस पैदा करती है। 

8. स्प्राउट्स 

दाल की तरह ही कई बार बच्चों का शरीर स्प्राउट्स पचा नहीं पाता है। दरअसल, स्प्राउट्स में जटिल फाइबर होता है, जिसे पचाने में समय लगता है और ये गैस पैदा करता है। इसलिए बच्चों को ज्यादा स्प्राउट्स ना खिलाएं। कभी खाना भी हो तो पैन में थोड़ा तेल डालें और स्प्राउट्स को बैक्टीरिया को मारने के लिए थोड़ी देर के लिए भूनें या 5-10 मिनट के लिए नमक के पानी में उबाल लें। इन्हें पकाना आपके पाचन तंत्र और पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए और भी बेहतर है।

बच्चों को इन फूड्स के गैस से बचाने के लिए डायटिशियन डेलनाज चंदूवाडिया का कहना है कि दाल और अंकुरित फलियां आदि को गैस पैदा करने से रोकने के लिए 8-12 घंटे भिगोकर रख देना चाहिएऔर पानी निकाल दें। यह पेट फूलने को कम करने में मदद करता है। अगर बच्चे को दूध नहीं पचता है दही या पनीर एक बेहतर विकल्प है क्योंकि दूध में लैक्टोज पहले से ही पच जाता है। साथ ही खाना बनाते समय हींग और अदरक का उपयोग करें, जो खाने आसानी से पचाने और गैस कम करने में मदद करता है।

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