Fri Sep 11, 2026 | 09:07 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

ट्विन्स बच्चों की जिम्मेदारी और खुद की फिटनेस, पिंकी प्रधान इस तरह बन गईं सुपरमॉम; पढ़ें उनकी कहानी

ट्विन्स बच्चों की जिम्मेदारी आसान नहीं होती है। पिंकी के लिए भी यह बहुत मुश्किल है। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी व्यस्त जिंदगी से समय निकाला और खुद को फिट-एनर्जेटिक बनाया। पढ़ें, उनकी प्रेरणादायक कहानी। 

हम सभी जानते हैं कि पैरेंटिंग आसान नहीं है। इसके लिए कई तरह की मुश्किलें सामने आती हैं। विशेषकर, महिलाओं को डिलीवरी के बाद से लेकर कई तरह की परेशानियों को झेलना पड़ता है, जैसे हेयर फॉल, शारीरिक कमजोरी थकान आदि। ऐसा हर महिला के साथ होता है। हालांकि, अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं। वहीं, अगर हम ट्विंस बच्चों की बात करें, तो चुनौतियां जैसे अपने आप बढ़ जाती हैं। ट्विंस बच्चों की मांएं बच्चों में इतनी ज्यादा उलझ जाती हैं कि उनके पास खुद की केयर करने का समय नहीं होता है। आपने देखा होगा कि ट्विंस बच्चों की मांएं अक्सर थकान और कमजोरी की शिकायत करती हैं। ऐसा ही कुछ दिल्ली कर रहने वाली पिंकी प्रधान के साथ भी होता था। वह अक्सर खुद को परेशान और उलझा हुआ महसूस करती थीं। एक समय बाद वह चिड़चिड़ी तक रहने लगी, लेकिन पिंकी ने एक ऐसा यू-टर्न लिया, जिसने उसकी कई समस्याओं का समाधान कर दिया। अब फिट और एनर्जेटिक भी फील करती है। पढ़ें ट्विंस बच्चों की मां पिंकी प्रधान की कहानी।

डिलीवरी के बाद से ही थी परेशानी

वैसे तो डिलीवरी के बाद हर महिला को कमजोरी और थकान का सामना करना पड़ता है। अगर हम पिंकी की बात करें, तो वह अपने शब्दों में अपनी समस्या समझाती हैं, "यकीन मानिए, ट्विंस बच्चों को संभालना सिंगल बच्चे को संभालने की तुलना में बहुत मुश्किल और चुनौती भरा होता है। मेरी सिजेरियन डिलीवरी थी। ऐसे में मेरे लिए खड़ा होना और उठना बैठना भी काफी टफ था। ऐसे में अपने बच्चों, एक बेटा और बेटी, दोनों को फीड कराना, बहुत मुश्किल और पेनफुल हो गया था।"

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कुछ महीनों बाद समस्या बढ़ती चली गई

पिंकी अपनी कहानी आगे जारी रखते हुए कहती हैं, "मेरे लिए मुश्किलें इसलिए ज्यादा थी क्योंकि कई बार दोनों बच्चे एक साथ रो पड़ते थे। दोनों फीडिंग टाइम, नहलाना धुलाना और न जाने क्या कुछ। इस दौरान मैं अपने लिए जरा भी समय नहीं निकाल पाती हूं। मैं एक वर्किंग वूमेन रही हूं। घूमना-फिरना या अपनी पर्सनालिटी पर वर्क करना मुझे पसंद है, लेकिन बच्चों के होने के बाद मेरी प्राथमिकता पूरी तरह बदल गई और मैंने अपने खानपान को भी इग्नोर किया। यहां तक कि मेरी रूटीन से एक्सरसाइज तक निकल गया। जैसे-जैसे महीने बीतते गए, मेरा स्वास्थ्य बिगड़ता गया। मैंने वेट गेन कर लिया और अब थोड़ा बहुत काम करने के बाद से ही थकान और कमजोरी महसूस होने लगी।"

किया समस्या का समाधान

थकान, कमजोरी और वेट गेन से जूझ रही पिंकी ने अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह चेंज कर लिया। हालांकि, यह सब उनके लिए मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पिंकी का कहना है, "दो-दो बच्चों के साथ कभी-कभी कंघी करने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी। फिर एक दिन मुझे मेरे पति आनंद प्रधान ने सुझाव दिया कि खुद पर ध्यान दो। अगर ऐसा नहीं किया, तो चिड़चिड़ापन भर जाएगा। मुझे अपनी फैमिली से हमेशा से ही पूरा सपोर्ट मिला है। हमारे पास नैनी और हाउस हेल्प है। इसलिए, मैं अपने रेस्ट के लिए कंप्लीट समय निकालती हूं। मैं अपनी डाइट को पूरी तरह इग्नोर कर चुकी थी। मगर थकान और कमजोरी को दूर करने के लिए मैंने रोजाना सुबह-शाम दो गिलास दूध पीना शुरू किया। डाइट में और भी बदलाव किए, जैसे रेगुलर बादाम, अखरोट, काजू खाती हूं, डेयरी प्रोडक्ट लेती हूं और चिकन-मटन भी मेरी रेगुलर डाइट का हिस्सा बन गए।"

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रेगुलर वॉक ने बनाया एनर्जेटिक

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पिंकी यहीं नहीं रुकीं। वह आगे बताती हैं, "मैं अपनी डाइट में सुधार करके अपनी कमजोरी को भले ही दूर कर लिया था, लेकिन वेट गेन भी अब भी मेरे लिए किसी चुनौती जैसा था। मुझे पता था कि जब तक अपना वजन कम नहीं करूंगी, तब तक मेरी थकान और कमजोरी की समस्या पूरी तरह दूर नहीं होगी। इसके लिए मैंने रेगुलर वर्कआउट शुरू किया। हालांकि, मैं बहुत ज्यादा एक्सरसाइज नहीं करती हूं। घर के पास एक पार्क है, वहां कुछ देर के लिए वॉक जरूर करती हूं। पिछले कुछ महीनों से रेगुलर वॉक और साइक्लिंग करने से मुझे काफी एनर्जेटिक फील होने लगा है। मैं सच बताऊं रेगुलर वॉक करने से मुझे अंदर से खुशी का एहसास होता है। जो चिड़चिड़ापन मुझे महसूस होता था, वह अब कम हो गया है। हालांकि, इस बात से इंकार नहीं करूंगी कि बच्चों को संभालना अब भी आसान नहीं है।"

एक्सपर्ट की सलाह

Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "यह सच है कि सही डाइट फॉलो करने से नई मांओं को रिकवरी करने में मदद मिलती है। उन्हें बैलेंस्ड डाइट फॉलो करना चाहिए। अगर आप नॉन-वेज खाती हैं, तो चिकन, अंडा और मछली का सेवन जरूर करें। अगर इसके साथ-साथ आप वर्कआउट करते हैं, तो यकीन मानिए आपकी खोई हुई एनर्जी लौट आती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रेगुलर वर्कटाउट करने से ब्लड फ्लो में सुधार होता है और फील गुड हार्मोंस रिलीज होते हैं। इससे महिलओं का मूड एन्हैंस होता है और जिंदगी में आ रही परेशानियों को आसानी से डील कर लेती हैं।"

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निष्कर्ष

बच्चों के होते ही मांएं अपनी ओर ध्यान देना पूरी तरह बंद कर देती हैं। यहां तक कि मेकअप, कंघी करना तक भूल जाती हैं। नतीजा यह होता है कि एक समय बाद महिला चिड़चिड़ी हो जाती है और इसका नेगेटिव असर उनकी पर्सनल रिलेशनशिप पर भी पड़ता है। महिलाओं को पिंकी की कहानी से सीख लेनी चाहिए और खुद के लिए पूरे दिन में महज आधा घंटा जरूर निकालना चाहिए। सही वर्कआउट और हेल्दी डाइट आपके जीवन को पूरी तरह बदल  सकती है।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Feb 16, 2026 16:23 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Feb 16, 2026 16:23 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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