जानलेवा है फ्लू का वायरस, नजरअंदाज न करें सर्दी-खांसी और बुखार जैसे लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 20, 2018
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Quick Bites

  • इंफ्लुएंजा को फ्लू के नाम से भी जाना जाता है।
  • जुकाम की तुलना में फ्लू के रोगी की हालत ज्यादा गंभीर होती है।
  • फ्लू के दौरान सबसे पहले रोगी की सांस नली प्रभावित होती है।

इंफ्लुएंजा को फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। ये एक वायरल रोग है जो आरएनए वायरस की वजह से होती है। आमतौर पर फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम से मिलते जुलते हैं इसलिए कुछ लोग फ्लू होने पर भी इसे सर्दी, जुकाम समझकर ही इलाज करते रहते हैं। फ्लू एक संक्रामक रोग है इसलिए इसके मरीज को संपर्क में आने से उसके खांसने, छींकने या छूने से ये रोग तेजी से फैल जाता है। जुकाम की तुलना में फ्लू के रोगी की हालत ज्यादा गंभीर होती है और कभी-कभी फ्लू जानलेवा भी हो सकता है। ज्यादातर लोगों में फ्लू के लक्षण एक या दो सप्ताह तक ही रहते हैं उसके बाद मरीज की हालत सुधरने लगती है।

फ्लू के लक्षण

 

फ्लू के दौरान सबसे पहले रोगी की सांस नली प्रभावित होती है इसलिए उसे गले में खराश, खांसी, छींक आदि शुरू हो सकते हैं। इसके अलावा नाक बंद होना, लगातार नाक बहना, सिर दर्द होना और मांसपेशियों में दर्द होना भी फ्लू के सामान्य लक्षण माने जाते हैं। फ्लू के संक्रमण के दौरान रोगी को 100 डिग्री फॉरेनहाइट से 103 डिग्री फॉरेनहाइट तक बुखार हो सकता है। बच्चों का तापमान इससे भी ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा ठंड लगना और बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस होना भी फ्लू के लक्षण हो सकते हैं। बच्चों में फ्लू के दौरान भूख में कमी, उल्टी, मतली, दस्त भी हो सकता है। कई बार फ्लू के वायरस के कारण ही नमोनिया जैसी गंभीर बीमारी की स्थिति पैदा हो जाती है इसलिए इससे तुरंत बचाव जरूरी है।

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जुकाम और फ्लू में है अंतर

फ्लू और जुकाम के लक्षण इतने समान होते हैं कि कुछ लोग फ्लू को जुकाम समझकर इसमें जुकाम का इलाज करते रहते हैं और ये रोग गंभीर होता चला जाता है। जुकाम एक सामान्य बीमारी है जो 100 से भी ज्यादा अलग-अलग वायरस के कारण हो सकता है। इंफ्लुएंजा ए, बी और सी वायरस के कारण होती है। इससे बचाव के लिए फ्लू का टीका लगाया जाता है। फ्लू का वायरस इंसानों के साथ कई जानवरों जैसे बतख, सुअर, मुर्गी, घोड़ा आदि में भी पाया जाता है। जुकाम की अपेक्षा फ्लू एक खतरनाक है क्योंकि ये जानलेवा होती है। भारत में एक साल में लगभग 36,000 लोगों की मौत फ्लू के कारण होती है।

इंफ्लुएंजा से बचाव

इंफ्लुएंजा से बचाव के लिए इसका टीका लगवाना सबसे आसान उपाय है। सर्दियों और बरसात के दौरान इसका खतरा बढ़ जाता है इसलिए अगर आपके आसपास फ्लू का वायरस फैल रहा है तो टीका जरूर लगवाएं। ये टीका हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी होता है। खासकर बच्चे और बूढ़े फ्लू के वायरस के संपर्क में जल्दी आते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को या जो महिलाएं इस वायरल बीमारी के फैलने के दौरान गर्भवती हो रही हैं, उनको फ्लू का टीका जरूर लगवाना चाहिए। अगर किसी को फेफड़ों संबंधित रोग, दिल की बीमारी, गुर्दे के रोग आदि पहले से हैं तो ये वायरस जल्दी प्रभाव छोड़ते हैं इसलिए ऐसे लोगों को भी फ्लू का टीका बिना देर किए लगवाना चाहिए। इसके अलावा ये टीका उन लोगों के लिए भी जरूरी है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है और जो जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं। फ्लू का टीका लगाने के बाद इसका संक्रमण फैलने की संभावना 70-90% तक कम हो जाती है।

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स्वच्छता जरूरी है

फ्लू के वायरस गंदगी के कारण भी तेजी से फैलते हैं इसलिए अगर आपके आसपास फ्लू का वायरस फैल रहा है तो आपको साफ-सफाई पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए। जैसे आपको ऐसी चीजों को छूने से पहले हाथों को सैनिटाइज करना चाहिए जो फ्लू के मरीज के संपर्क में थीं या जो पब्लिक प्लेस पर ज्यादातर लोगों के संपर्क में आती हैं। इसके अलावा आपको हमेशा छींकते और खांसते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए। इसके अलावा आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो आपकी इम्यूनिटी पावर यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

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