बार-बार पेशाब आना पुरुषों में हैं इस बीमारी के संकेत, जानें कारण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 06, 2018
Quick Bites

  • जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह ग्रंथि बढ़ने लगती है।
  • इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता है
  • इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं।

 

एक आंकड़े के मुताबिक 40 की उम्र के बाद ज्‍यादातर पुरुष प्रोस्‍टेट की समस्‍या से परेशान होते हैं। प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी माना जाता है। पौरूष ग्रंथि शरीर में कुछ बेहद ही जरूरी क्रिया करती है। जैसे यूरीन के बहाव को कंट्रोल करना और प्रजनन के लिए सीमेन बनाना। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह ग्रंथि बढ़ने लगती है। इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता है और इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं।

प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड बढ़ने पर क्‍या होता है?

प्रोस्टेट ग्लैंड ज्यादा बढ़ जाने पर कई लक्षण सामने आने लगते हैं जैसे यूरीन रूक-रूक कर आना, पेशाब करते समय दर्द या जलन और यूरीन ट्रेक्ट इन्फेक्शन बार-बार होना। प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने से मरीज बार-बार पेशाब करने जाता है मगर वह यूरीन पास नहीं कर पाता। अगर बार-बार यह परेशानी होती है तो पौरूष ग्रंथि बढ़ने की संभावना हो सकती है। ऐसी अवस्था मरीज के लिए कष्टदायक होती है। उसे समझ नहीं आता कि क्या किया जाना चाहिए।

प्रोस्‍टेट का उपचार संभव?  

दूसरे रोग की तरह प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने पर भी इसका उपचार संभव है। ऐसी बहुत सी दवाइयां हैं, जिससे मरीज को काफी आराम महसूस होता है और वह सामान्य दिनचर्या जी सकता है। ऐसे में प्रकृति में भी बढ़िया उपाय हैं। जैसे सीताफल के बीज इस बीमारी में बेहद लाभदायक होते हैं। सीताफल के कच्चे बीज को अगर हर दिन अपने खाने में इस्तेमाल किया जाए, तो काफी हद तक यह प्रोस्टेट की समस्या से बचाव करने में मददगार होता है। इन बीजों में ऐसे 'प्लांट केमिकल' मौजूद होते हैं, जो शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं नहीं बन पातीं।

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सीताफल  है फादेमंद है

कच्चे सीताफल के बीज में काफी मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जैसे आयरन, फॉस्फोरस, टि्रप्टोफैन, कॉपर, मैग्नेशियम, मैग्नीज, विटामिन के, प्रोटीन, जरूरी फैटी एसिड और फाइटोस्टेरोल। ये बीज जिंक के बेहतरीन स्रोतों में से एक माने जाते हैं। हर दिन 60 मिलीग्राम जिंक का सेवन प्रोस्टेट से जूझ रहे मरीजों में बेहद फायदा पहुंचाता है और उनके स्वास्थ्य में भी सुधार करता है। इन बीजों में बीटा-स्टिोसटेरोल भी होता है जो टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टेरोन में बदलने नहीं देता। जिससे इस ग्रंथि के बढ़ने की संभावना न के बराबर हो जाती है।

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सीताफल के बीज कच्चा या भून कर या फिर दूसरे बीजों के साथ मिलाकर खा सकते हैं। इसे अपने हर दिन के खाने में शामिल किया जा सकता है। इसे सलाद में मिलाकर भी खाया जा सकता है। पोहा में मिलाकर या सूप में डालकर भी खा सकते हैं। सीताफल के बीज नट्स के साथ एक बेहतरीन नाश्ता हो सकते हैं। दस ग्राम तक यह बीज हर दिन लेने से प्रोस्टेट को काबू किया जा सकता है।

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