पुरानी से पुरानी बवासीर को सही करता है जिमीकंद, जानिए इसके लाजवाब फायदे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 27, 2018
Quick Bites

  • बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। 
  • बवसीर होने पर जिमीकंद का सेवन करना चाहिए।
  • जिमीकंद एक सब्जी है जो पोषक तत्वों से भरपूर है।

बवासीर जिसे पाइल्स भी कहा जाता है आजकल बहुत आम रोग हो गया है। खराब खानपान और बिगड़े लाइफस्टाइल के चलते आजकल यह रोग छोटे बच्चों को भी हो रहा है। बवासीर में होने वाला दर्द असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है। वैसे तो आपको मार्किट में बवासीर के लिए कई तरह की दवा और घरेलू नुस्खे मिल जाएंगे लेकिन आज हम आपको जिस नुस्खे के बारे में बता रहे हैं उसका नाम जिमीकंद है। आइए जानते हैं क्या हैं इसके फायदे।

बवासीर और जिमीकंद

जिमीकंद एक सब्जी है जो पोषक तत्वों से भरपूर है। पाइल्स रोग में इस सब्जी का सेवन करना वाकई बहुत फायदेमंद होता है। यह सब्जी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगती है। हाथी के पैरों की तरह दिखने के कारण, इसे जिमीकंद कहा जाता है। इस सब्जी का सेवन भारत में नहीं बल्कि ज्यादातर अफ्रीका में किया जाता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि पाइल्स में इस सब्जी का सेवन करने से पीड़ित को कुछ ही दिनों में आराम मिलता है। इसके अलावा भी इस सब्जी के सेवन से कब्ज भी दूर होती है।

पाइल्स के लिए अन्य नुस्खे

  • बड़ी इलायची भी बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्‍छा उपचार है। इसे सेवन करने के लिए लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस लीजिए। रोज सुबह इस चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर ठीक हो जाता है।
  • डेढ़-दो कागजी नींबू अनिमा के साधन से गुदा में लें। 10-15 मिनट के अंतराल के बाद थोड़ी देर में इसे लेते रहिए उसके बाद शौच जायें। यह प्रयोग 4-5 दिन में एक बार करें। इसे 3 बार प्रयोग करने से बवासीर में लाभ होता है।
  • करीब दो लीटर मट्ठा लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोडा नमक मिला दें। जब भी प्यास लगे तब पानी की जगह यह छाछ पियें। चार दिन तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्‍से ठीक हो जाते है। या आधा चम्‍मच जीरा पावडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें।
  • जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  • इसबगोल भूसी का प्रयोग करने से से अनियमित और कड़े मल से राहत मिलती है। इससे कुछ हद तक पेट भी साफ रहता है और मस्‍सा ज्‍यादा दर्द भी नही करता।
  • रात को 100 ग्राम किशमिश पानी में भिगों दें और इसे सुबह के समय में इसे उसी पानी में इसे मसल दें। इस पानी को रोजाना सेवन करने से कुछ ही दिनों में बवासीर रोग ठीक हो जाता है।

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