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एग डोनेशन के सहारे मां बन सकती हैं निःसंतान महिलाएं, जानें एग डोनेशन की प्रक्रिया और सावधानियां

इनफर्टिलिटी की समस्या से ग्रसित महिलाओं के लिए एग डोनेशन के जरिए मां बनने की उम्मीद मिलती है, जानें एग डोनेशन के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 04, 2022Updated at: May 04, 2022
एग डोनेशन के सहारे मां बन सकती हैं निःसंतान महिलाएं, जानें एग डोनेशन की प्रक्रिया और सावधानियां

असंतुलित जीवनशैली और खानपान के कारण आज के समय में लोगों में इनफर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे लोग जो इनफर्टिलिटी या किसी अन्य शारीरिक कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते उनके लिए आईवीएफ उम्मीद की एक किरण है। आपमें से बहुत से लोगों को स्पर्म डोनेशन के बारे में जानकारी होगी। विकी डोनर फिल्म में भी इसके बारे में दिखाया गया था। जिस तरह से बच्चा पैदा करने के लिए पुरुष स्पर्म डोनेशन करते हैं ठीक उसी तरह से महिलाएं एग डोनेशन भी कर सकती हैं। एक डोनेशन (Egg Donation in Hindi) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक बच्चा पैदा कर सकने की क्षमता वाली महिला दूसरी इनफर्टिलिटी से ग्रसित महिला को बच्चे पैदा करने के लिए एग्स डोनेट करती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी इम्प्लांटेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। गर्भ धारण करने में असमर्थ महिलाओं को इससे बड़ा फायदा मिलता है। कंसीव करने में परेशानी झेल रही महिलाओं के लिए मां बनने का सपना पूरा करने के लिए एग डोनेशन का इस्तेमाल किया जाता है। आइये विस्तार से एग डोनेशन से जुड़ी जरूरी बातें।

क्या है एग डोनेशन? (What is Egg Donation in Hindi?)

किसी भी महिला को प्रेग्नेंट होने के लिए जितना जरूरी स्पर्म होता है उतना ही जरूरी एग्स या अंडाणु भी होते हैं। स्टार मैटरनिटी हॉस्पिटल की स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ विजय लक्ष्मी के मुताबिक महिलाओं के एग्स पुरुषों के स्पर्म से फर्टिलाइज होते हैं। इसके बाद महिला के बच्चेदानी में भ्रूण का निर्माण होता है। एग डोनेशन की प्रक्रिया में एक फर्टाइल महिला दूसरी असमर्थ महिला को अपने एग्स डोनेट करती है। जिसे लैब में शुक्राणुओं के साथ निषेचित करने के बाद महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद उस महिला के बच्चेदानी में इस भ्रूण का निर्माण होता है। आज के समय में कई महिलाएं एग डोनर के रूप में काम करती हैं।

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क्या है एग डोनेशन की प्रक्रिया? (Egg Donation Procedure in Hindi)

एग डोनेशन की प्रकिया में सबसे पहले जरूरतमंद महिला को डॉक्टर से संपर्क करना होता है। डॉक्टर सभी जरूरी जांच करने के लिए बाद एग डोनेशन की प्रक्रिया को शुरू करते हैं। इसक लिए सबसे पहले डोनर महिला और जिस महिला को एग्स की जरूरत है उनके बीच अस्पताल के साथ एक अग्रीमेंट तैयार होता है। यह एक प्रकार का लीगल डॉक्यूमेंट होता है। इसके बाद औपचारिकता पूरी करने के बाद डोनर महिला के नॉर्मल ऑव्यूलेशन को बंद करने के लिए डॉक्टर उसे कुछ दवाएं देते हैं। ऑव्यूलेशन बंद होने के बाद डॉक्टर एक और इंजेक्शन महिला को लगाते हैं। इसके बाद एग तैयार होने से पहले अल्ट्रासाउंड द्वारा जांच की जाती है। सब कुछ सही होने पर डॉक्टर डोनर महिला से इंजेक्शन की मदद से एग्स निकाल लेते हैं। इसके बाद इन एग्स को लैब में तैयार किया जाता है। एग डोनेशन की प्रक्रिया में एक सामान्य ऑपरेशन होता है। सरकार की तरफ से एग डोनेशन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गयी है जिसके तहत सर्टिफाइड डोनर बैंक से ही बैंक लिया जा सकता है। एग्स को लैब में तैयार करने के बाद दूसरी महिला के गर्भ में डाल दिया जाता है।

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एग्स डोनेट कौन कर सकता है? (Who Can Donate Eggs?)

एग डोनेशन करने से पहले महिला को कई तरह के टेस्ट और स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है। इसके लिए कुछ मापदंड निश्चित किये गए हैं जिनके आधार पर ही एक महिला एग डोनेट कर सकती है। आमतौर पर एक ऐसी महिला जिसकी उम्र 21 साल से 35 साल के बीच है और उसे किसी तरह की बीमारी या समस्या नहीं है को एग डोनेट करने के लिए सही माना जाता है। गाइडलाइन के मुताबिक महिलाओं को एग्स तभी डोनेट करना चाहिए वे सबसे ज्यादा फर्टाइल हों। इसके अलावा जिस महिला को पीरियड्स से जुड़ी समस्या नहीं है, जिसका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है और किसी तरह के नशे आदि की लत नहीं है वह आसानी से एग्स डोनेट कर सकती हैं। कोई भी महिला जो एग डोनर है वह सिर्फ 6 बार ही अपने एग्स डोनेट कर सकती हैं। एक बार एग्स डोनेट करने के बाद दूसरी बार डोनेट करने के बीच में कम से कम 3 महीने का गैप जरूर होना चाहिए।

एग डोनेशन के दौरान सावधानियां (Egg donation Precautions in Hindi)

एग डोनेशन की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही डोनर महिला और ग्राहक दोनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए हमेशा सभी नियमों का पालन करते हुए ही एग डोनेट करना चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक एग डोनेशन में करीब 8% प्रतिशत महिलाओं की मौत हो जाती है। ऐसे में इस प्रोसेस को सावधानीपूर्वक एक्सपर्ट डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

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ऐसी महिलाएं जो जरूरत से ज्यादा बार एग्स डोनेट करती हैं, कई उनके लिए यह जानलेवा हो जाता है। इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह और गाइडलाइन का पालन करते हुए एग्स डोनेट करने चाहिए। एग्स डोनेशन में किसी भी तरह की तकलीफ जैसे पेट में दर्द, सूजन आदि होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। एग डोनेशन से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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