धूम्रपान का फेफड़ों पर प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 09, 2012

 

Dhumrapan se fefdo ko nuksaanनए शोध यह बताते हैं की धूम्रपान छोड़ने के बाद भी धूम्रपान से होने वाला स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम कम नहीं होता। यह सुनकर सिर्फ धूम्रपान करने वालो को ही धक्का नहीं लगा होगा बल्की उन लोगो को भी सदमा लगा होगा जिन्होंने आखिरी बार सिगरेट पी थी और यह संकल्प लिया था की वो अब इसे बंद कर देंगे । यूनिवर्सिटी आफ सिडनी के शोधको ने यह पाया है की धूम्रपान आपके हवा नाल की ऊतकों में ऐसे बदलाव कर सकता है की धूम्रपान छोड़ने के बाद भी वो क्षति रूकती नहीं है ।


धूम्रपान करने वाले क्रोनिक ओब्स्त्रक्तिव पल्मोनरी डिजीज से ग्रसित हो जाते है (सीओपीडी)जो की तब भी नहीं रूकती है जब व्यक्ति ने धूम्रपान छोड़ दिया होता है । स्वस्थ होने के अन्य संकेत भी नजर आते हैं लेकिन फेफडो में नुक्सान धूम्रपान छोड़ने के बाद भी लंबे समय के लिए चलता है । साल २०२० तक ऎसी गाडना की गयी है की सीओपीडी मौत के तीन मुख्य कारणों में से एक बन जाएगा ।इसका मुख्य कारण है की वातावरण में प्रदूषण और सिगरेट से धूम्रपान करने वालो की संख्या लगातार बढती जा रही है  ।


यूनिवर्सिटी आफ सिडनी के शोधक ने यह बताया है की धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफडो में कैंसर कराने वाले तत्व अपना आप बढते रहते है व्यक्ति के धूम्रपानछोड़ने के बाद भी ।सिगरेट के धुएं के द्वारा उत्तेजित होने के बाद कोशिआके के बहार की मेट्रिक्स का विकास उस तरह से नहीं होता है जैसा की तब होता था जब व्यक्ति धुएं के संपर्क में नहीं आया था ।


इस खोज से आपको यह नहीं समझना चाहिए की धूम्रपान बंद करने का कोई फायदा नहीं है ।फेफडो में प्रदाह रह सकता है लकिन इसको छोड़ने के अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं ।इस शोध से उन डॉक्टरो को नयी चुनौतीयाँ मिली है जो की धूम्रपान से सम्बन्धित फेफडो के रोगों का इलाज कर रहे हैं ।उर जैसे की धूम्रपान करने वाले लोगो के लिए यह एक बहुत ही पुख्ता कारण है की उन्हें धूम्रपान छोड़ देना चाहिए और उन्हें इस बात की उम्मीद करनी चाहिए की अह्बी तक उन्हें कोई क्षतिनाहीं पहुंची है ।

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