Does Your Metabolism Speed Up When Pregnant: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में तरह-तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसी वजह से कभी उन्हें मूड स्विंग होता है, कभी फूड क्रेविंग होती है, तो कभी उल्टी और मतली जैसी समस्याएं होने लगती है। असल बात ये है कि ये सभी बदलाव प्राकृतिक हैं और समय के साथ-साथ अपने आप इनमें बदलाव आ जाता है। बहरहाल, आपने देखा होगा कि महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पेट से संबंधित कई तरह की समस्या होती है। जैसे पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है और माना जाता है कि मेटाबॉलिज्म पर भी इसका नेगेटिव असर पड़ता है। ऐसे में यह सवाल जरूरत उठता है कि क्या वाकई प्रेग्नेंसी के दौरान मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है? आइए, Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं इस बात में कितनी सच्चाई है।
क्या प्रेग्नेंसी के दौरान मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है?
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यह कहना पूरी तरह गलत होगा कि प्रेग्नेंसी के दौरान मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसके उलट, प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। इस बात की पुष्टि करते हुए डॉक्टर कहते हैं, ‘प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिज्म हाई होता है, क्योंकि इन दिनों महिलाओं को अधिक एनर्जी की जरूरत होती है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को सही तरह से सपोर्ट कर सके। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि बेसल मेटाबॉलिक रेट 25 फीसदी तक बढ़ जाता है।’ सवाल है, ऐसा क्यों होता है? दरअसल, आराम करने से बेसल मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है, जिससे सेल्स और ऑर्गन सही तरह से काम करते हैं। गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बेसल मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है। इसे सरल शब्दों में समझें कि प्रेग्नेंसी के दौरान रेस्ट करते हुए शरीर अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न करता है, ताकि शरीर में हो रहे बदलाव सहज तरीके से हो सकें। जाहिर है, इसके होने के पीछे गर्भवती महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव मुख्य कारण के रूप में देखे जाते हैं।
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प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिज्म क्यों बढ़ता है?
हार्मोनल बदलाव
प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है। इसी वजह से प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है।
भ्रूण का विकास
गर्भ में पल रहे शिशु को विकास के लिए बहुत ज्यादा एनर्जी और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यह भी मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने के मुख्य कारणों में से एक है।
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प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिज्म बढ़ने पर क्या होता है?
प्रेग्नेंसी के दौरान आपने देखा होगा कि महिलाओं को अन्य दिनों की तुलना में अधिक भूख लगती है और उन्हें बार-बार खाने का मन करता है। ऐसा मेटाबॉलिक रेट बढ़ने के ही कारण होता है। यही नहीं, जब प्रेग्नेंसी में महिलाओं में मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, तो उनकी बॉडी फैट को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करती है, ताकि शिशु के विकास के लिए लिए पर्याप्त मात्रा में ब्लड शुगर मौजूद रहे। तभी शिशु की फिजिकल-मेंटल ग्रोथ बेहतर होती है।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिज्म का स्तर कम नहीं होना चाहिए। इसके उलट, प्रेग्नेंसी में मेटाबॉलिक रेट हाई होता है, जिससे महिला को पर्याप्त एनर्जी मिलती है और गर्भवस्थ शिशु को पर्याप्त सपोर्ट मिलता है। अगर महिला को लगे कि उनका मेटाबॉलिज्म धीमा है, तो उन्हें इस संबंध में बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए। साथ ही, अपनी डाइट ओर लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
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FAQ
मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा मेटाबॉलिज्म तेज है या धीमा?
मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर आपको कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे थकान, कमजोरी, ठंड लगना, पाचन संबंधी समस्या होना आदि। इसके अलावा, कुछ शारीरिक समस्याएं भी होने लगती हैं, जैसे नाखूनों का टूटना, स्किन से जुड़ी परेशानी होना और याददाश्त कमजोर होना।क्या प्रेग्नेंसी के बाद मेटाबॉलिज्म बदल जाता है?
प्रेग्नेंसी की तुलना में डिलीवरी के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। असल में, प्रेग्नेंसी के दौरान शिशु के विकास को सपोर्ट करने के लिए मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ जाता है।मेटाबॉलिज्म क्या खाने से तेज होता है?
मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए आप अपनी डाइट में हेल्दी चीजें शामिल कर सकते हैं, जैसे लीन प्रोटीन (अंडे, चिकन, मछली, दालें), ग्रीन टी, कॉफी, मिर्च, अदरक, साबुत अनाज आदि।
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Jan 18, 2026 17:33 IST
Modified By : Anurag Gupta Jan 18, 2026 17:33 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta