कहीं आपकी खुशियां पूरी तरह आपके पार्टनर पर तो निर्भर नहीं करतीं? जानें ऐसा होना सही है या गलत

जब दो लोग एक रिश्ते में बंधते हैं तब, एक दूसरे की पसंद ही उनकी अपनी पसंद हो जाती है। ये पसंद निर्भरता में बदल जाती है और इस बात का एहसास ही नहीं होता।

Monika Agarwal
मैरिजWritten by: Monika AgarwalPublished at: Oct 09, 2021
कहीं आपकी खुशियां पूरी तरह आपके पार्टनर पर तो निर्भर नहीं करतीं? जानें ऐसा होना सही है या गलत

शादी के बाद कपल्स का एक दूसरे पर निर्भर रहना आम बात है। सुबह की चाय से लेकर, कपड़े धोने तक, खाना खाने से लेकर रात को सोने से पहले बिस्तर साफ़ करने तक...ऐसी तमाम चीजे होती हैं, जो आमतौर पर हम नजरअंदाज करते हुए, अपने साथी पर निर्भर हो जाते हैं। बात इमोशनली हो या फिजिकली, अपने साथी पर निर्भर रहना एक हद तक ही अच्छा होता है। उससे ज्यादा की निर्भरता आप पर आपके रिश्ते पर काफी भारी पड़ सकती है। इसका दावा शोध भी करते हैं। ऐसे में रिश्तों में सद्भावना को बनाए रखना बेहद जरूरी है। जिससे रिश्ते में गर्माहट बरकरार रहती है। अगर आपकी जिंदगी में भी कुछ इस तरह की चीजे होती रहती हैं, तो अब आपको सम्भलने की जरूरत है। इसमें आपकी मदद करेगा हमारा ये खास लेख।

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(image source: Bustle)

1. बनावटी मूड से रहें दूर

आपके साथी का मूड कैसा है, इससे आपके मूड पर भी गहरा असर पड़ता है। जरूरी नहीं है कि आपका मूड भी वैसा ही हो, जैसा आपके पार्टनर का हो। आप बिना डरे अपने मूड को अपने पार्टनर के सामने रखें। रिश्ते में बहुत ज्यादा शांति बनाए रखने के लिए आप उन पर निर्भर न हो जाएं। इससे भावनाएं नकली और दिखावटी नजर आती हैं।

2. हर वक्त साथी की जरूरत क्यों?

साथी का साथ हर पल रहे अच्छी बात है। लेकिन छोटी-छोटी बात के लिए भी अगर आप सिर्फ उन्हीं के पीछे पीछे चल रही हैं, तो इसमें आपकी अपनी पर्सनैलिटी छुपने लगेगी। हमेशा अपने साथी से समर्थन मांगना आपको कमजोर बना सकता है। आप खुद अपने लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करें।

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3. बाहर की ख़ुशी भी जरूरी

अगर आप या आपका पार्टनर एक दूसरे के साथ रहते रहते बोर हो गये हैं, तो जाहिर सी बात है कि, मन बाहर की ओर भटकता ही है। अगर आपकी पार्टनर या आपका पार्टनर किसी दोस्त या परिवार के साथ जब समय बिताते हैं, तो आपको जलन होती है। जो की स्वाभाविक सी बात है। आप इस बात पर अपनी बेचैनी को कम करें और अपनी लाइफ को एन्जॉय करने की कोशिश करें।

4. आपके फैसले आपका पार्टनर क्यों ले?

आप अगर अपने फैसले नहीं लेना चाहती या चाहते और आपके फैसले हमेशा आपका पार्टनर लेता है, तो इसका मतलब साफ़ है कि, आप अपनी जिम्मेदारी लेने से डरते हैं। आपकी स्वतंत्रता की डोर आपके साथी के हाथ में होती है। आपको ये बात भी ख़ुशी देती है तो, साफ़ है कि आप उनकी भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते।

5. साथी की पसंद न हो जाए हावी

आप अपने पार्टनर के आधार पर खुद को बदल चुके हैं। ये अच्छी बात है। लेकिन कभी कभी ये आपके लिए आपत्तिजनक भी हो सकता है। लेकिन उनकी ख़ुशी के आगे आप इस आपत्ति को भी हंसी ख़ुशी झेल लेते हैं। आप खुद की पसंद भी उनसे साझा करें, और जो पसंद नहीं है उन्हें ये भी बताएं। क्योंकि कभी कभी आपके पार्टनर को इस बात का एहसास ही नहीं होता कि, आप असल में चाहते क्या हैं।

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6. अपनी जरूरतों को कर रहे हैं नजरअंदाज

एक हेल्दी रिश्ते के लिए हर वो कोशिश करनी चाहिए, जिससे रिश्ता मजबूत हो सके। लेकिन साथी की जरूरतों के आगे जब आप अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करने लगती या लगते हैं, सिर्फ इतना सोचकर कि वो इसमें खुश रहेंगे/रहेंगी। आपका आत्मबलिदान आपको निराशा भी दे सकता है।

7. जब आपकी समाजिकता होने लगे खत्म

कभी कभी रिलेशनशिप में आप सामजिकता को भुला बैठते हैं। आप धीरे धीरे अपने परिजनों और दोस्तों से दूरी बनाने लगते हैं। भले ही ऐसा करने के लिए आपका साथी या साथिन आप पर कोई दबाव न बनाते हों, लेकिन आप उनकी ख़ुशी के चक्कर में खुद की खुशियों को तिलांजलि दे देते हैं।

अगर आपको ये लगता है, कि इस तरह की निर्भरता आपके रिश्ते को मजबूत बना रही है और आपके पार्टनर को ख़ुशी दे रही है, तो आप यहां थोड़े से गलत हो सकते हैं। आप नहीं दिखाना चाहते कि आप परेशान हैं, और आप इस बात का एहसास ही नहीं करना चाहते। कभी-कभी आपसी समांजस्य और ख़ुशी भी आपको कमजोर कर सकती है।

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