पेट में इंफेक्शन और फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों में ना हो कंफ्यूज, जानें इन दोनों के बीच का फर्क

बरसात के मौसम में अक्सर पेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में आपको पेट में इन्फेक्शन और फूड प्वाइजनिंग के अंतर को जानना चाहिए। 

 
Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariUpdated at: Aug 09, 2021 13:13 IST
पेट में इंफेक्शन और फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों में ना हो कंफ्यूज, जानें इन दोनों के बीच का फर्क

पेट में इंफेक्शन (stomach flu) और फूड प्वाइजनिंग (food poisoning) दोनों ही पेट से जुड़ी समस्या है। अक्सर लोग पेट में इंफेक्शन के लक्षण और फूड प्वाइजनिंग के बीच कंफ्यूज हो जाते हैं।  पर इन दोनों के बीच फर्क है। दरअसल, पेट में इंफेक्शन वायरस के कारण होता है तो,  फूड पॉइजनिंग खान-पीने की चीजों में रहने वाले हानिकारक बैक्टीरिया के कारण होता है। हालांकि, ये दोनों ही एक तरह से इंफेक्शन हैं पर दोनों दो अलग-अलग कारणों से होते हैं, जिनका इलाज भी अलग तरह से किया जाता है। पर प्रश्न ये है कि हम कैसे पहचानेंगे कि हमें  पेट में इंफेक्शन हुआ है कि फूड प्वाइजनिंग हुआ है? इसी बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने डॉ. सुनील जैन (Dr. Sunil Jain), प्रमुख, आपातकालीन चिकित्सा विभाग, जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र से बात की। 

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पेट में इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग-Stomach flu vs food poisoning

डॉ. सुनील जैन (Dr.Sunil jain), की मानें तो, काफी हद तक  पेट में इंफेक्शन जो कि वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस ( viral gastroenteritis) है और फूड पॉइजनिंग के लक्षण एक से होते हैं। पर फूड पॉइजनिंग जैसे संक्रमण के मामले में खून के साथ दस्त होना इसे  पेट में इंफेक्शन के लक्षणों से अलग कर देता है। चूंकि पेट का इंफेक्शन वायरल होता है, यह 24 से 48 घंटे से अधिक नहीं रहता है, जबकि फूड पॉइजनिंग अधिक समय तक रहता है। इस तरह हम इन दो कारकों से इन दोनों का फर्क आसानी से समझ सकते हैं। अब आइए विस्तार समझते हैं पेट में इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग का अंतर। 

पेट में इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग के बीच अंतर -Difference between stomach flu and food poisoning in hindi

पेट में इंफेक्शन (stomach flu)

डॉ. सुनील जैन कहते हैं कि पेट में इंफेक्शन व्यक्ति के संपर्क में आने या दूषित भोजन पानी के सेवन से होता है। पेट में इंफेक्शन का कारण (Causes of Stomach flu) आमतौर पर दो वायरस हैं। पहला नोरोवायरस (Norovirus) जो कि दूषित भोजन के साथ-साथ संक्रमित लोगों और सतहों के संपर्क से फैल सकता है। तो, दूसरा है  रोटावायरस (Rotavirus), जो कि पेट में सूजन का कारण बनता है और ये शिशुओं और बच्चों में पेट से जुड़ी परेशानियों का सबसे बड़ा कारण है। नोरोवायरस और रोटावायरस भोजन के माध्यम से फैल सकते हैं, जो आगे चलकर फूड पॉइजनिंग और पेट में इंफेक्शन के बीच आपको कंफ्यूज कर सकते हैं। दरअसल, ऐसे में अगर कोई संक्रमित व्यक्ति के भोजन, उल्टी या मल के कणों के संपर्क में आ जाता है, तो इससे बीमार हो जाता है।

पेट में इंफेक्शन के लक्षण -Symptoms of stomach flu

पेट में इंफेक्शन गैस्ट्रोएंटेराइटिस की परेशानी है इसलिए इसमें पेट और आंत दोनों ही प्रभावित होता है। जिसके कारण शरीर में कई लक्षण नजर आते हैं। जैसे कि

  • -उल्टी के साथ या बिना जी मिचलाना
  • -हल्के दस्त
  • -हल्का बुखार
  • -पेट में मरोड़ 
  • -पेट में सूजन 

इसके ये लक्षण दवा लेने के बाद 24 से 48 घंटे में ठीक हो जाते हैं।  इस दौरान आपको एक खास का खास ध्यान रखना है कि पानी खूब पिएं ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन ना हो। 

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फूड पॉइजनिंग (food poisoning)

डॉ. सुनील जैन की मानें, तो फूड पॉइजनिंग (Causes of food poisoning) आमतौर पर बहुत मसालेदार भोजन या कभी-कभी दूषित भोजन के सेवन के कारण होता है। जिसमें बैक्टीरिया का सबसे बड़ा हाथ होता है। पर अन्य कारणों में कैमिकल्स, परजीवी और विषाक्त पदार्थों के कारण भी लोगों को फूड पॉइजनिंग की समस्या हो जाती है। आमतौर पर फूड पॉइजनिंग इन खाद्य पदार्थों के कारण होते हैं। जैसे कि

-प्याज के साल्मोनेला बैक्टीरिया के कारण होने वाला साल्मोनेला इंफेक्शन

-अंडे या मीट से

- दूध या अन्य तरल पदार्थ से जो कि सही से गर्म ना किया गया हो 

-कच्चे फल और सब्जियां (आमतौर पर बिना धोए)

-मसालों से

-बासी खाने से

-गंदा पानी से

फूड पॉइजनिंग के लक्षण-Symptoms of food poisoning

  • -पेट में ऐंठन और उल्टी
  • -खून के साथ दस्त 
  • -उल्टी में भी खून आना
  • -तेज डिहाइड्रेशन
  • -तेज बुखार
  • -दस्त जो 3 दिनों से अधिक समय तक रहता है
  • -सिर दर्द
  • -कमजोरी
  • -बेहोशी
  • -हाथ-पांव में सुन्न, झुनझुनी या जलन महसूस होना
  • - कुछ गंभीर मामलों नें मौत भी हो सकती है। 
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उपचार -Treatment

पेट फ्लू और फूड पॉइजनिंग के लिए डॉक्टर इनके लक्षणों की जांच करके दवाइयां देते हैं। पर इसमें सबसे ज्यादा जरूरी शरीर में हाइड्रेशन बढ़ना है क्योंकि इनमें व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी सबसे ज्यादा हो जाती है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स, हल्का ठोस भोजन का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो पचने में आसान हो। पर्याप्त आराम करना उपचार का एक अनिवार्य हिस्सा है क्योंकि निर्जलीकरण से बहुत अधिक कमजोरी हो सकती है। भोजन के सेवन के लिए अस्वच्छ स्थानों से बचना बहुत जरूरी है। 

पेट में इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग से बचाव के उपाय-Prevention tips

बात चाहे पेट में इंफेक्शन की हो या फूड पॉइजनिंग की, दोनों दो अलग-अलग प्रकार के इंफेक्शन हैं और दोनों से बचाव जरूरी है। बचाव के लिए इन टिप्स को अपने जीवन में शामिल करें। जैसे कि  

  • -अपने हाथों को हमेशा साफ रखें।
  • -खाना-खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।
  • -वायरस और खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों को अच्छी तरह से साफ करें। जैसे कि डाइनिंग टेबल और किचन की साफ-सफाई करें।
  • -बचे हुए खाने को फ्रिज में रखें और फिर खाने से पहले उसे गर्म करके खाएं।
  • -बासी खाना खाने से बचें।
  • - अंडे और मीट को सही तापमान पर पकाएं।
  • -बरसात में कच्ची सब्जियों को खाने से बचें। बरसात में सलाद खाने का सही तरीका जानें और सब्जियों को उबाल कर सलाद बनाएं।

फूड पॉइजनिंग की पहचान आमतौर पर तब होती है जब लोगों का एक बड़ा समूह प्रभावित होता है, जबकि पेट के इंफेक्शन के मामले में एक व्यक्ति या कभी-कभी 2 या 3 लोग प्रभावित होते हैं। फूड पॉइजनिंग के हल्के से मध्यम लक्षणों वाले अधिकांश व्यक्तियों में, लक्षण लगभग 24 से 48 घंटों में ठीक हो जाते हैं और किसी विशेष चिकित्सा उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, अगर डिहाइड्रेशन यानी कि पेशाब में कमी या कोई चक्कर आना और कमजोरी,  बुखार, उल्टी या दस्त 72 घंटे से अधिक समय तक रहता है, तो व्यक्ति को डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी है। 

Image Credit: freepik

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