सेहत का दुश्‍मन है डिप्रेशन, शरीर के इन 7 हिस्‍सों पर सीधे करता है वार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 19, 2017
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Quick Bites

  • डिप्रेशन की स्थिति में शरीर शिथिल पड़ जाता है
  • ज्य़ादा लंबी अवधि तक गहरी उदासी
  • ऐसी मनोदशा को डिप्रेशन कहा जाता है

व्‍यक्ति के जीवन में मौजूद परेशानियों और उससे जुड़ी चुनौतियों ने डिप्रेशन जैसी कई मनोवैज्ञानिक समस्‍याओं ने जन्‍म दिया है। इसके बारे में ऐसी धारणा बनी हुई है कि यह केवल मन से जुड़ी समस्या है पर बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि हमारे ब्रेन का एक खास हिस्सा, जो हमारी भावनाओं को नियंत्रित करता है, गहरी उदासी या डिप्रेशन की स्थिति में वह शिथिल पड़ जाता है। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के दो सप्ताह से ज्य़ादा लंबी अवधि तक गहरी उदासी में डूबा रहे और इससे उसकी रोज़मर्रा की दिनचर्या प्रभावित होने लगे तो ऐसी मनोदशा को डिप्रेशन कहा जाता है। आइए एम्‍स दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ साइकिएट्री के एडिशनल प्रोफेसर, डॉक्‍टर नंद कुमार से जानते हैं कि, यह मनोवैज्ञानिक समस्या शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित करती है।

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इम्यून सिस्टम

डिप्रेशन की स्थिति में तनाव बढ़ाने वाले हॉर्मोन कार्टिसोल का सिक्रीशन तेज़ी से होने लगता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के शरीर में मौज़ूद एंटीबॉडीज़ नष्ट होने लगते हैं, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता तेज़ी से घटने लगती है। इसी वजह से डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों को सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं बार-बार परेशान करती हैं।

ह्रदय

चिंता या एंग्ज़ायटी डिप्रेशन की एक प्रमुख वजह है और इसका हमारे दिल से बेहद करीबी रिश्ता है। दरअसल तनाव या चिंता होने पर व्यक्ति के शरीर में सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इस दौरान हमारे शरीर में नॉरपिनेफ्राइन नामक हॉर्मोन का स्राव बढ़ जाता है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। ऐसे में दिल तेज़ी से धड़कने लगता है, हृदय की रक्वाहिका नलियां सिकुड़ जाती हैं, खून का प्रवाह तेज़ हो जाता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है, व्यक्ति को पसीना और चक्कर आने लगता है। लंबे समय तक डिप्रेशन में रहने वाले लोगों में हार्ट अटैक की भी आशंका बढ़ जाती है।

पाचन तंत्र

आपने भी यह महसूस किया होगा कि जब हम किसी बात को लेकर बहुत ज्य़ादा चिंतित या उदास होते हैं तो हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता। दरअसल डिप्रेशन के दौरान सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता के कारण आंतों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का सिक्रीशन बढ़ जाता है, जिससे पेट में दर्द और सूजन, सीने में जलन, कब्ज़ या लूज़ मोशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

श्‍वसन तंत्र

तनाव का असर सबसे पहले गले पर दिखना शुरू हो जाता है। दरअसल, तनाव वाली स्थिति में गले में मौजूद तरल पदार्थ शरीर के दूसरे भागों के लिए आपूर्ति करने लगते हैं। इससे गला सूखने लगता है और उसकी मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। ऐसा होने के बाद कुछ भी खाने में दिक्कत आती है। डिप्रेशन की स्थिति में कभी तेज़ सांस चलती है तो कभी इसकी गति बहुत धीमी हो जाती है। ये दोनों ही स्थितियां सेहत के लिए ठीक नहीं हैं। डिप्रेशन में फेफड़े की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इससे सांस लेने में कठिनाई और घबराहट महसूस होती है। अगर किसी को पहले से एस्थमा हो तो डिप्रेशन की स्थिति में उसकी यह तकलीफ और बढ़ जाती है।

लिवर

तनाव और चिंता की स्थिति में लिवर में ग्लूकोज का सिक्रीशन बढ़ जाता है। इसके अलावा कॉर्टिसोल हॉर्मोन शरीर में फैट की मात्रा और भूख भी बढ़ा देता है। इसी वजह से डिप्रेशन में कुछ लोग मोटे हो जाते हैं तो कुछ के शरीर में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। अगर किसी को ज्य़ादा लंबे समय तक डिप्रेशन हो तो उसे डायबिटीज़ की समस्या हो सकती है। जब लिवर सही ढंग से काम नहीं करता तो किडनी पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।

दांत

हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अवसाद और चिंता से दांत उम्र से पहले ही गिर जाते हैं। अमेरिकन एसोसिएशन फॉर डेंटल रिसर्च (एएडीआर) के शोधकर्ताओं ने दांतों के नष्ट होने और अवसाद व चिंता के बीच संभावित संबंध का पता लगाने के लिए अध्ययन किया। चिकित्सकों के मुताबिक चिंता के दौरान शरीर से कुछ ऐसे हॉर्मोन्स का सिक्रीशन होता है, जो धीरे-धीरे दांतों को कमज़ोर कर देते हैं।


त्वचा, आंखों, बालों पर

डिप्रेशन की अवस्था में लोग अपने खानपान पर ध्यान नहीं देते, जिससे उनका पेट साफ नहीं रहता, जिससे बालों का झडऩा, सफेद होना, आंखों की दृष्टि कमज़ोर पडऩा और त्वचा पर जल्दी झुर्रियां, एडिय़ों का फटना जैसी समस्याएं परेशान करने लगती है। ऐसी स्थिति में लोग अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं, जिससे आंखों के आगे डार्क सर्कल्स दिखने लगते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि डिप्रेशन में लोग अपनी फिजि़कल अपियरेंस के प्रति उदासीन हो जाते हैं। ऐसे में वे अपनी त्वचा और बालों का अच्छी तरह ध्यान नहीं रख पाते। इससे भी उन्हें ऐसी समस्या हो सकती है।

जरूरी सलाह

डॉक्‍टर नंद कुमार के मुताबिक, यह समस्या इंसान को असमय बूढ़ा और बीमार बना देती है। जब इस एक डिप्रेशन की वजह से इतनी सारी समस्याएं होती हैं तो हमें शुरुआत से ही सचेत हो जाना चाहिए। हमें खुद से यह वादा करना चाहिए कि चाहे हमारे सामने कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, हम अपने सामने उदासी को ज्य़ादा देर तक टिकने नहीं देंगे और हर हाल में मुसकुराते रहेंगे।

 

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