अब खत्‍म होगी चॉकलेट की लालसा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 05, 2013
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चॉकलेट का लालच बच्‍चे ही क्‍या कई बार बड़े भी नहीं छोड़ पाते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से चॉकलेट से बचने की सलाह के बावजूद वे अपने आपको चॉकलेट खाने से नही रोक पाते हैं। ऐसे चोकोहॉलिक (ज्‍यादा चॉकलेट खाने के आदी), लोगों के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई थैरेपी ढूढ़ निकाली है ताकि उनको कैलोरी से भरी हुई चॉकलेट खाने से रोका जा सके।

 

ऐसे लोग जो चॉकलेट खाना छोड़ना असंभव मानते है उनको कॉग्निटिव डिफ्यूजन नामक यह तकनीक अपनानी चाहिए। सिटी यूनिवर्सिटी लंदन के डाक्‍टर कैटी टापर और स्‍वानसिया यूनिवर्सिटी के किम जेनकिंस ने दावा किया है कि शोध में हुई उनकी खोज ऐसे लोगों को चॉकलेट खाना छोड़कर स्‍वस्‍थ डाइट की तरफ मोड़ सकती है़। शुरूआत में ऐसे चोकोहॉलिक लोगों को चॉकलेट के प्रति अपने आकर्षण पर काबू पाना होगा और इस बात को दिमाग में बैठाना होगा कि आप अपने मन की बात से संचालित नही हो सकते।

 

ब्रिटिश जर्नल ऑफ हेल्‍थ साइकोलॉजी के ऑनलाइन वर्जन में लिखे अपने अध्‍ययन में दोनों ने दावा किया है कि साधारण रणनीति यहां तक कि वजन कम करने में भी बड़ी मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं ने अपने इस प्रयोग में 135 प्रतिभागियों को शामिल किया जिनमें से ज्‍यादतार महिलाएं थी। ये प्रतिभागी ज्‍यादा चॉकलेट खाने की अपनी आदत से त्रस्‍त थे और इसको काबू में करना चाहते थे। इन प्रतिभागियों में से एक तिहाई को कॉग्निटिव डिफ्यूजन (संज्ञानत्‍मक विसरण) के बारे में सिखाया गया। उनको बताया गया कि आप कल्‍पना करो कि आप एक मिनीबस के ड्राइवर हैं और चॉकलेट के बारे में किसी तरह का विचार यात्रियों के सामने उनको फूहड़ स‍ाबित कर देगा। प्रतिभागियों को अपने विचारों या यात्रियों में से एक के बारे में सोचना था।

 

एक अन्‍य समूह को 'स्‍वीकृति' या 'सर्फिग का आग्रह' की तकनीक बताई गई। इसमें उनको अपनी लालसा के मुताबिक काम करने को कहा गया जिसमें वे अपने मन की बात मान सकते थे या फिर अपनी इच्‍छाओं को पराजित कर सकते थे।  



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