पुरुषों में इंफर्टिलिटी (बच्चा न होने) के हो सकते हैं कई कारण, डॉक्टर से जानें आयुर्वेद में इसका इलाज

शादी के कई साल बाद तक बच्चा न होने का कारण पुरुषों की इंफर्टिलिटी भी हो सकती है। डॉक्टर से जानें इसके क्या कारण होते हैं और कैसे करें सही इलाज।

डॉ. चंचल शर्मा
Written by: डॉ. चंचल शर्माPublished at: Jan 11, 2021
पुरुषों में इंफर्टिलिटी (बच्चा न होने) के हो सकते हैं कई कारण, डॉक्टर से जानें आयुर्वेद में इसका इलाज

संतानहीन दंपत्ति के लिए सबसे ज्यादा सुख का क्षण तब होता है जब उनके संतान सुख का सपना पूरा होता है। संतान सुख जीवन के अनमोल क्षणों में से एक क्षण होता है। संतान सुख की कामना हर विवाहित जोड़े करते है। लेकिन कई ऐसे कारण है जिनके चलते उनके आंगन में बच्चे की किलकारियाँ नही गूंज पाती हैं। पुरुष निःसंतानता (Male Infertility) को इस प्रकार से समझ सकते है कि जब कोई पुरुष एक वर्ष या इससे अधिक समय तक अपने महिला साथी के साथ संबंध स्थापित करता है परंतु वह महिला को गर्भवती करने में सक्षम नहीं रहता है। इस असमर्थता को ही पुरुष निःसंतानता या पुरुष बांझपन (मेल इनफर्टिलिटी) कहते हैं।

देश की एक बड़ी आबादी पुरुष निःसंतानता जैसी समस्या का सामना कर रही है। गुजरे लगभग 30 सालों (तीन दशक) में पुरुष निःसंतानता में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण पुरुषों में शुक्राणुओं (स्पर्म) की कमी या फिर शुक्राणुओं का न बनना होता है। आमतौर पर हमारे समाज में बच्चा न होने के कारण महिलाओं की शारीरिक कमी को माना जाता है, लेकिन सच्चाई ये है कि भारत में 40 प्रतिशत निःसंतानता के मामलों में पुरुष जिम्मेदार होते हैं। आज इस आर्टिकल में आशा आयुर्वेद की इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. चंचल शर्मा पुरुष निःसंतानता (मेल इंफर्टिलिटी) का कारण और इलाज बता रही हैं।

male infertility causes

डॉ. चंचल के अनुसार पुरुषों में इंफर्टिलिटी का कारण वर्तमान की जीवनशैली, नशीले पदार्थों का सेवन, असामान्य तापमान, दूषित पर्यावरण एवं खानपान आदि है। आयुर्वेद के अनुसार जब पुरुष के शुक्राणुओं की गुणवत्ता खराब हो जाती है या शुक्राणुओं की संख्या में कमी आ जाती है तो वीर्य में स्पर्म काउंट कम (निल शुक्राणु) हो जाता है जिसकी वजह से गर्भधारण में परेशानी आने लगती है।

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पुरुष निःसंतानता का कारण हो सकती हैं ये समस्याएं (Causes of Male Infertility)

  • ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia)
  • टेरैटोज़ोस्पर्मिया (Tretozospremia-)
  • एज़ूस्पर्मिया(Azoospremia)
  • अस्थानोजोस्पर्मिया (Asthenospremia)
  • नपुंसकता (erectile dysfunction)
  • शीघ्रपतन (Premature Ejaculation)
  • वैरीकोसेल (Varicocele) इत्यादि

उपरोक्त सभी कारणों से कारण पुरुष निःसंतानता उत्पन्न होती है । यह पुरुष निःसंतानता के मुख्य कारण हैं।

पुरुष निःसंतानता का आयुर्वेदिक उपचार (Treatment of Male Infertility in Ayurveda)

आयुर्वेद सीधा रोग की जड़ में वार करता है। आयुर्वेद चिकित्सा का मुख्य उद्धेश्य होता है रोग के विकारों का जड़ से खत्म करना । किसी भी रोग का आयुर्वेद उपचार शुरु करने से पूर्व आयुर्वेद उचित पोषक एवं स्वस्थ डाइट पर पूरा जोर देता है। आयुर्वेद में ऐसी-ऐसी जड़ी बूटियां है जिसके सेवन से न केवल शारीरिक मजबूती लाई जाती है बल्कि यौन स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जाता है। पुरुष प्रजनन क्षमता को बढ़ाकार बांझपन जैसी समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में पुरुष प्रजनन को बढ़ाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक औषधियों तथा काढ़ों की मदद ली जाती है जिससे पुरुष प्रजनन हार्मोन का बढ़ाया जा सके। आयुर्वेदिक औषधियों के द्वारा पुरुष की प्रजनन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

male infertility treatment

पंचकर्म से पुरुष निःसंतानता का उपचार (Panchakarma Therapy for Male Infertility)

  • पंचकर्म चिकित्सा एक प्राचीन और प्रभावी चिकित्सा है । पंचकर्मा चिकित्सा का असर तुरंत देखने को मिलता है। पंचकर्म के द्वारा किसी भी बीमारी या रोग को जल्द से जल्द ठीक किया जाता है। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत वमन कर्म, विरेचन कर्म, नास्य कर्म, बस्ती कर्म ( उत्तरबस्ती उपकर्म चिकित्सा) एवं रक्त मोक्षण कर्म शामिल है।
  • पंचकर्म में चिकित्सा में रोगी के शरीर की प्रकृति के अनुसार त्रिदोष अर्थात कफ दोष, पित्त दोष तथा वात दोष को नियंत्रित किया जाता है। पंचकर्म चिकित्सा पुरुष बांझपन को दूर करने के लिए सबसे प्रभावी एवं असरकारक चिकित्सा है। पंचकर्म चिकित्सा के द्वारा पुरुष के शरीर का शुद्धिकरण करके उसको संतान उत्पत्ति के योग्य बनाया जाता है।
  • पंचकर्म चिकित्सा के द्वारा पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं में वृद्धि होती है जो संतान प्राप्ति में सहायक होते है। पंचकर्म चिकित्सा के द्वारा ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia), टेरैटोज़ोस्पर्मिया (Tretozospremia), एज़ूस्पर्मिया(Azoospremia), अस्थानोजोस्पर्मिया (Asthenospremia), नपुंसकता (erectile dysfunction),शीघ्रपतन (Premature Ejaculation),वैरीकोसेल (Varicocele) इत्यादि बीमारियों को ठीक करके प्रजनन हार्मोन में वृद्धि की जाती है।
  • सुश्रुत संहिता के अनुसार पंचकर्म चिकित्सा के उपरांत पुरुष के  शुक्राणुओं में अच्छी गुणवत्ता आती है। पंचकर्म से स्वस्थ शुक्राणु का निर्माण होता है। पंचकर्म चिकित्सा से गतिशीत तथा अच्छी क्वालिटी के शुक्राणु तैयार होते है जो पुरुष के पिता बनने के सपने को साकार करते है। पंचकर्म से यौन इच्छा में वृद्धि होती है और इससे पुरुष का स्टेमिना अच्छा होता है। पंचकर्म से यौन स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है। पंचकर्म एंजाइम और ग्‍लाइकोजन के स्तर में भी सुधार करता है।

पुरुष बांझपन को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियाँ (Ayurvedic Medicine for Treatment of Male Infertility)

  • शीलाजीत
  • शिसांद्रा जड़ी
  • अश्वगंधा
  • सफेद मुसली
  • गोक्षुर
  • कपिकच्छू
  • शतावरी
  • वंगभस्म एवं माषादिवटी

इन आयुर्वेदिक औषधियों को कैसे और कितनी मात्रा में प्रयोग करना है इसकी जानकारी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से मिलकर कर लें क्योंकि आपकी शारीरिक स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर इन औषधियों की मात्रा कम ज्यादा हो सकती है।

ऊपर बतायें गये सभी उपाय एवं उपचार आशा आयुर्वेदा की आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से हुई बातचीत के दौरान प्राप्त हुए है।

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