Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या नींबू पानी पीने से पूरी हो सकती है विटामिन C की कमी? एक्‍सपर्ट से जानें

व‍िटाम‍िन सी एक एंटीऑक्‍सीडेंट है, जो शरीर की इम्‍यून‍िटी को मजबूत बनाता है। कई लोगों को लगता है क‍ि नींबू पानी पीकर व‍िटाम‍िन सी की कमी को दूर क‍िया जा सकता है। जानें यह सच है या नहीं?

खट्टे (सिट्रस) फल व‍िटाम‍िन सी के अच्‍छे स्रोत कहलाते हैं, ज‍िनमें से एक है नींबू। नींबू पानी से शरीर को फोलेट, पोटैश‍ियम, व‍िटाम‍िन बी1, बी2, बी5 जैसे पोषक तत्‍व म‍िलते हैं। साथ ही नींबू पानी से शरीर को व‍िटाम‍िन सी की कुल जरूरत का करीब 20 से 21 प्रत‍िशत म‍िल जाता है। एक नींबू में करीब 35 से 45 एमजी व‍िटाम‍िन होता है, लेक‍िन क्‍या व‍िटाम‍िन सी की कमी को दूर करने के ल‍िए केवल नींबू पानी का का सेवन काफी है? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

द‍िनभर में शरीर को क‍ितना व‍िटाम‍िन सी चाह‍िए?

  • एक मह‍िला को द‍िनभर में 75 एमजी व‍िटाम‍िन सी और पुरुषों को 90 mg (म‍िलीग्राम) व‍िटाम‍िन सी की जरूरत होती है।
  • गर्भवती मह‍िलाओं को 85 एमजी और ब्रेस्‍टफीड‍िंग मदर्स को 120 एमजी प्रत‍िद‍िन व‍िटाम‍िन सी की जरूरत होती है।
  • व‍िटाम‍िन सी एक वॉटर सॉल्‍युबल व‍िटाम‍िन है ज‍िसे शरीर स्‍टोर नहीं करता है इसल‍िए इसे रोजाना संतुल‍ित डाइट के जर‍िए लेना जरूरी है।

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स‍िर्फ नींबू पानी से व‍िटाम‍िन सी की कमी दूर नहीं होती

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Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि अगर आप यह सोच रहे हैं क‍ि केवल नींबू पानी पीकर व‍िटाम‍िन सी की कमी को दूर क‍िया जा सकता है, तो आप गलत हैं। यह मुमक‍िन नहीं है। नींबू पानी भले ही व‍िटाम‍िन सी का अच्‍छा स्रोत है, लेक‍िन इसमें व‍िटाम‍िन सी की सीम‍ित मात्रा होती है। नींबू पानी से शरीर को करीब 20 से 30 एमजी व‍िटाम‍िन सी म‍िलता है, जबक‍ि एक वयस्‍क व्‍यक्‍त‍ि को 75 से 90 म‍िलीग्राम व‍िटाम‍िन सी की जरूरत होती है।
डायब‍िट‍िक मरीज भी व‍िटाम‍िन सी के स्रोत के रूप में नींबू पानी को डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं। साल 2026 में AlQalam Journal Of Medical and Applied Sciences नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, खाने के साथ नींबू पानी लेने पर खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। विटामिन सी और नींबू के रस दोनों के सेवन के बाद पोस्ट-मील ग्लूकोज स्पाइक में कमी देखी गई।

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व‍िटाम‍िन सी की कमी कैसे दूर करें?

  • व‍िटाम‍िन सी की कमी दूर करने के ल‍िए केवल एक स्रोत पर न‍िर्भर न रहें बल्‍क‍ि अलग-अलग स्रोत को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। आंवला, संतरा, कीवी, अमरूद, स्‍ट्रॉबेरी, श‍िमला म‍िर्च, टमाटर व‍िटाम‍िन सी के अच्‍छे स्रोत हैं इन्‍हें अपनी डाइट का हि‍स्‍सा बनाएं।
  • व‍िटाम‍िन सी की कमी दूर करने के ल‍िए पर्याप्‍त मात्रा में आयरन का सेवन भी जरूरी है क्‍योंक‍ि आयरन, व‍िटाम‍िन सी के एब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया को बेहतर बनाता है। व‍िटाम‍िन सी की कमी को दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर व‍िटाम‍िन सी सप्‍लीमेंट भी ले सकते हैं।

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क‍िन लोगों में व‍िटाम‍िन सी की कमी का खतरा ज्‍यादा होता है?

  • धूम्रपान करने वाले लोग
  • खराब खान-पान लेने वाले लोग
  • पाचन की समस्‍या से परेशान लोग
  • अल्‍कोहल का अध‍िक सेवन करने वालों में 
  • बार-बार इंफेक्‍शन या बीमारी से पीड़ि‍त लोग

न‍िष्‍कर्ष:

केवल नींबू पानी पीकर व‍िटाम‍िन सी की कमी को दूर नहीं क‍िया जा सकता है। नींबू पानी से केवल 20 से 30 एमजी व‍िटामि‍न सी ही शरीर को म‍िलता है, जबक‍ि द‍िनभर में शरीर को 75 से 90 एमजी व‍िटाम‍िन सी की जरूरत होती है, ज‍िसे केवल नींंबू पानी पीकर नहीं बल्‍क‍ि अलग-अलग स्रोत को डाइट में शाम‍िल करके पूरा क‍िया जा सकता है।

FAQ

  • व‍िटाम‍िन सी की कमी के लक्षण क्‍या हैं?

    बार-बार थकान, कमजोरी, इम्‍यून‍िटी कमजोर होना, मसूड़ों से खून आना, बालों का कमजोर होना, शरीर या जोड़ों में दर्द होना व‍िटाम‍िन की कमी के लक्षण हो सकते हैं।
  • शरीर के ल‍िए व‍िटाम‍िन सी के फायदे क्‍या हैं?

    व‍िटाम‍िन सी कोलेजन बनाने में मदद करता है, यह फ्री रेड‍िकल्‍स के नुकसान से बचाता है, मसूड़ों और दांतों की सेहत को सपोर्ट करता है और शरीर में थकान, कमजोरी को दूर करता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 15, 2026 09:59 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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