Budget 2019: सस्‍ती और सुलभ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की है मांग, विशेषज्ञों ने कहा- आयुष्‍मान योजना का हो विस्‍तार

बजट में विशेषज्ञों ने प्रमुख रूप से सस्‍ती और सुलभ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं देने के साथ केंद्र सरकार की आयुष्‍मान भारत योजना के विस्‍तार की मांग जैसी चीजों को आज की

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jul 04, 2019
Budget 2019: सस्‍ती और सुलभ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की है मांग, विशेषज्ञों ने कहा- आयुष्‍मान योजना का हो विस्‍तार

भारत की वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को 'Budget 2019' पेश करेंगी। यह बजट देश की आर्थिक दशा और दिशा को बेहतर रास्‍ते पर लाने में मदद करेगा। खासकर स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को बजट से काफी उम्‍मीदे हैं। खासकर स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रमुख रूप से सस्‍ती और सुलभ स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं देने के साथ केंद्र सरकार की आयुष्‍मान भारत योजना के विस्‍तार की मांग जैसी चीजों को आज की जरूरत बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में बुनियादी चीजों पर लगने वाले टैक्‍स कम होने चाहिए।  

 

पोर्टिया मेडिकल की एमडी व सीईओ, मीना गणेश के अनुसार, "यह देखकर खुशी होती है कि सरकार भारत में हेल्‍थकेयर स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रही है और हेल्‍थकेयर पर खर्च बढ़ा रही है। हालांकि, यह देखकर निराशा होती है कि जीवन रक्षक उपकरण जैसे वेंटिलेटर, बीआईपीएपी और सीपीएपी आदि को भारी टैक्स के अंतर्गत रखा गया है। यहां तक कि बैसाखी और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी चीजों को 5 से 7.5 प्रतिशत जीएसटी के ब्रैकेट में रखा गया है। ये जरूरी आइटम हैं और इन पर टैक्स नहीं लगना चाहिए था। यह देखना भी चिंताजनक है कि चिकित्सा उपकरणों के पुर्जों को 28 प्रतिशत जीएसटी के उच्चतम स्लॉट के तहत लिया गया है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवा उद्योग को कमजोर करेगी। हमें उम्मीद है कि स्थिति का एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन किया जायेगा और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक उपकरणों को कर मुक्त बनाने पर विचार किया जायेगा।"  

मेडलाइफ.कॉम के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) सौरभ अग्रवाल कहते हैं, "स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है और देश के सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत है। हालांकि, यह कुछ संस्थानों पर अधिक निर्भरता, समय पर और क्वालिटी ट्रीटमेंट मिलने में देरी, प्राथमिक देखभाल के बुनियादी ढांचे की कमी और उच्च लागत जैसे मुद्दों के कारण भी बंटा हुआ है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में एक बार फिर पदभार ग्रहण करने के साथ, हम आगे के बजट में इस क्षेत्र के लिए कुछ अनुकूल नीतियों के प्रति आशान्वित हैं। बजट से हमारी अपेक्षाओं में बेहतर स्वास्थ्य देखभाल और बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य बीमा, निवारक देखभाल पर ध्यान और डायग्नोस्टिक्स में आयुष्मान भारत की पहुंच का विस्तार और देश भर में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ई-फार्मेसी के नियमों का अनुमोदन शामिल है। देश में नवीन, तकनीक आधारित, किफायती स्वास्थ्य समाधानों की तत्काल और बड़े पैमाने पर आवश्यकता है। सरकार द्वारा अपने अंतिम समय में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देने के साथ, हम इस वर्ष के बजट में कुछ ठोस कदम उठाये जाने की उम्मीद करते हैं।"  

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के प्रेसीडेंट, पद्म श्री अवार्डी डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार, "वन हेल्‍थ की अवधारणा पिछले कुछ वर्षों से धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इस अवधारणा में वनस्पतियां, पशु, पर्यावरण और मानव शामिल हैं। वन हैल्थ का कांसेप्ट यह मानता है कि लोगों का स्वास्थ्य प्रकृति के अन्य तत्वों से जुड़ा हुआ है। हम एक ऐसे बजट की आशा करते हैं जो भारत में वन हैल्थ के लिए एजेंडा तय करेगा। विभिन्न योजनाओं के तहत सभी योजनाओं, जो मनुष्यों, पशुओं, पर्यावरण-जलवायु परिवर्तन, कृषि उत्पादन और रोग नियंत्रण के साथ एक ही छत के नीचे काम करती हैं, उनमें प्रशासनिक और बजटीय नियंत्रण लाना महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि सरकार एक आम बजट आवंटित करेगी या इन कार्यक्रमों को सुनिश्चित करने के लिए बजट को लिंक करेगी, ताकि विविध सेक्टरों में सहयोग और ज्ञान का बंटवारा हो सके।"

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