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डायबिटीज मरीजों के लिए क्यों जरूरी है रेगुलर ग्लूकोज लेवल चेक करना? डॉक्टर से जानें इसके फायदे

डायबिटीज के मरीजों के लिए कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (Continuous Glucose Monitoring) बहुत उपयोगी मानी जाती है, जानें इसके बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Nov 16, 2021 18:05 IST
डायबिटीज मरीजों के लिए क्यों जरूरी है रेगुलर ग्लूकोज लेवल चेक करना? डॉक्टर से जानें इसके फायदे

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खानपान और जीवनशैली में असंतुलन पैदा होने से इंसान तमाम बीमारियों का शिकार हो जाता है। गलत जीवनशैली और असंतुलित खानपान की वजह से लोगों में डायबिटीज की बीमारी आम है। यह बीमारी पहले आमतौर पर सबसे ज्यादा अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या आम हो गयी है। डायबिटीज के मरीजों को चिकित्सक शारीरिक गतिविधि, खानपान और लाइफस्टाइल को लेकर बेहद सतर्क रहने की सलाह देते हैं। मधुमेह यानी डायबिटीज के साथ जीना बहुत आसान नहीं होता है। इस समस्या में खानपान के साथ-साथ रोजमर्रा की गतिविधियों का भी ध्यान रखना होता है। जिन लोगों को टाइप 1 डायबिटीज की समस्या होती है उनके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अचानक लो और हाई होने का खतरा रहता है। लेकिन आप इस बीमारी में नियमित रूप से अपने शरीर में मौजूद ग्लूकोज के स्तर की निगरानी करने से आप ब्लड शुगर को अनियंत्रित होने से रोक सकते हैं। रेगुलर ग्लूकोज लेवल चेक (Continuous Glucose Monitoring) करने से आपको डायबिटीज मैनेजमेंट में सहायता मिलती है। आइये जानते हैं इसके बारे में।

क्या है रेगुलर ग्लूकोज मॉनिटरिंग? (What Is Continuous Glucose Monitoring?)

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(image source - freepik.com)

मेडिकल साइंस की लगातार प्रगति ने इंसान की बहुत मदद की है। आज के समय में मौजूद तकनीकी उपकरणों की सहायता से आप आसानी से अपने शरीर के स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग एक ऐसी ही डिवाइस है जिसकी सहायता से आप आसानी से अपने ब्लड शुगर को बढ़ने या घटने से रोक सकते हैं। ऐसी डिवाइस अलर्ट सिस्टम के साथ भी आती हैं जो आपके शरीर में ग्लूकोज या ब्लड शुगर के स्तर में उतार चढ़ाव होने पर आपको अलर्ट भी करते हैं। आज के समय में भी तमाम ऐसे लोग हैं जो सीजीएस से परिचित नहीं है। आइये कंसल्टेंट डायबेटोलॉजिस्ट और बीट ओ में मेडिकल अफेयर्स के हेड डॉ मुदित सभरवाल से जानते हैं विस्तार से इसके बारे में। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग या सीजीएम एक उपकरण है जो आमतौर पर पेट या बांह के नीचे डाला जाता है। यह डिवाइस अंतरालीय द्रव (कोशिकाओं के बीच तरल पदार्थ में पाया जाने वाला ग्लूकोज) के आपके शरीर में मौजूद ब्लड शुगर को ट्रैक करता है और समय- समय पर इसके बारे में आपको अलर्ट भी करता है। इसके माध्यम से आपके शरीर में मौजूद ब्लड शुगर की नियमित रूप से 24 घंटे मॉनिटरिंग की जाती है।

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कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डायबिटीज मैनेजमेंट में कैसे है उपयोगी? (How Continuous Glucose Monitoring Can Help Diabetes Control?)

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सीजीएम डायबिटीज के मैनेजमेंट और उसके कंट्रोल में बहुत उपयोगी साबित हुई है। इसकी सहायता से डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए नियमित रूप से ग्लूकोज या ब्लड शुगर की मॉनिटरिंग की जाती है। इस डिवाइस की मदद से किसी भी व्यक्ति के आहार, लाइफस्टाइल और व्यायाम आदि को मॉनिटर करने का काम करता है। इससे ब्लड शुगर को अधिक प्रभावी ढंग से कंट्रोल करने में मदद मिलती है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन में साल 2020 में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक इसकी सहायता से औसत eA1C में 0.6 यूनिट (6.9% से 6.3%) तक सुधार देखा गया है। 2020 में एंडोक्राइन प्रैक्टिस जर्नल में डॉ मुदित द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों में बिना माइक्रोवैस्कुलर समस्याओं के सीजीएम का उपयोग करके ग्लाइसेमिक इंडेक्स का विश्लेषण किया जाता है। इसके आंकड़े भी बेहद सटीक माने जाते हैं और काफी प्रभावी होते हैं।

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कैसे काम करता है कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम? (How Continuous Glucose Monitoring Works?)

सीजीएम के माध्यम से ग्लूकोज रीडिंग को ट्रैक किया जाता है। इन रीडिंग को ट्रैक करने के बाद इसे डायनेमिक डेटा में ट्रांसलेट किया जाता है। इन रिपोर्ट्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स, हाइपरग्लेसेमिया, हाइपोग्लाइसीमिया और ग्लूकोज परिवर्तनशीलता के साथ-साथ इससे जुड़े कई अन्य फैक्टर्स का अध्ययन किया जाता है। इसकी सहायता से चिकित्सक मरीज की स्थिति को आसानी से समझ पाते हैं और उन्हें डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए उचित सलाह भी देते हैं। डायबिटीज के मरीज जो कंटीन्यूअस हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपोग्लाइसीमिया के बारे में नहीं जानते हैं और उन्हें बार-बार ब्लड शुगर के स्तर में उतार या चढ़ाव की समस्या होती है या फिर इंसुलिन थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं उनके लिए यह बहुत उपयोगी माना जाता है। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग के द्वारा आपको डायबिटीज मैनेजमेंट के साथ ही इसे कंट्रोल में रखने के लिए अलर्ट भी मिलता रहता है। इसकी सहायता से इन चीजों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

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  • सीजीएम की सहायता से डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों को ग्लूकोज लेवल और ब्लड शुगर की निगरानी में सहायता मिलती है।
  • एडवांस्ड डायबिटीज टेक्नोलॉजी एंड थेरेप्यूटिक्स 2019 की सिफारिश के बाद अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन द्वारा भी अनुमति दी गयी है।
  • सामान्य परिस्थितियों में मधुमेह वाले व्यक्ति को दिन का कम से कम 70% (लगभग 17 घंटे) की सीमा में खर्च करना चाहिए, 70-180 मिलीग्राम/डीएल, दिन के 4% से कम (लगभग 1 घंटे) 70 मिलीग्राम/डीएल से नीचे, 180 mg/dL से ऊपर हर दिन समय कम से कम रहना चाहिए।

डायबिटीज से बचाव के टिप्स (Diabetes Prevention Tips)

डायबिटीज एक ऐसा रोग है जिसका इलाज किसी दवा पर निर्भर नहीं है। यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ा हुआ रोग है और आप अपने लाइफस्टाइल को बदलकर ही इस रोग से छुटकारा पा सकते हैं। जो लोग डायबिटीज जैसे खतरनाक रोग की चपेट में आने के बाद भी गंभीर नहीं होते हैं यानि कि मीठा खाना नहीं छोड़ते, फास्ट फूड का शौक रखते हैं, बढ़ते वजन पर ध्यान नहीं देते, व्यायाम या योग नहीं करते, शराब पीते हैं व मीठा खाना बंद नहीं करते उन लोगों के लिए जीना बहुत मुश्किल हो जाता है। जबकि अगर रोगी अपने रोग को लेकर गंभीर रहें और अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें तो डायबिटीज से छुटकारा पाना संभव है।डायबिटीज के कारण इंसुलिन के कम निर्माण से रक्त में शुगर अधिक हो जाती है क्योंकि शारीरिक ऊर्जा कम होने से रक्त में शुगर जमा होती चली जाती है जिससे कि इसका निष्कासन मूत्र के जरिए होता है। इसी कारण डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब आता है। डायबिटीज के होने का मुख्य कारण अनुवांशिक भी होता है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य मां-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो भविष्य में आपको भी डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा जो लोग मोटापे के शिकार होते हैं उन्हें भी डायबिटीज होने का ज्यादा खतरा रहता है। आपका वजन बहुत बढ़ा हुआ है, आपका बीपी बहुत हाई है और कॉलेस्ट्रॉल भी संतुलित नहीं है तो भी आपको डायबिटीज हो सकता है। इसक अलावा व्यायाम की कमी भी डायबिटीज को निमंत्रण देती है।

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एक्सपर्ट्स के अनुसार कनेक्टेड केयर इकोसिस्टम में ब्लड शुगर की निगरानी ग्लाइसेमिक स्तरों को कम करने, एचबीए1सी स्तरों, ग्लाइसेमिक परिवर्तनशीलता, माइक्रोवैस्कुलर जटिलताओं की रोकथाम, हाइपोग्लाइसीमिया को रोकने और नियंत्रित करने बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसके अलावा इसकी सहायता से आप नियमित रूप से अपने शरीर में ब्लड शुगर को भी संतुलित रख सकते हैं। इसके इस्तेमाल आर फायदों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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