गोरा बनाने वाली क्रीम पहुंचा सकती है स्किन को नुकसान!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 05, 2016

आमतौर पर भारत से गोरा होना ही सुंदरता का प्रमाण माना जाता है। कई बार तो समाज में सांवले रंग वालों को तिरस्‍कार भी झेलना पड़ता है। इन्‍हीं चीजों का विज्ञापन दिखाकर कॉस्‍मेटिक कंपनियां लोगों को क्रीम लगाने की सलाह देती है, और गोरा होने का दावा करती हैं। शादी-विवाह के विज्ञापनों में भी गोरी लड़कियों की डिमांड ज्‍यादा रहती है। शायद इन्‍हीं कारणों से ही ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट के पीछे लोग पागल रहते हैं। लेकिन शायद उन्‍हें यह नही पता है कि इसके दुष्‍परिणाम बहुत ही भयावाह हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गोरा करने का दावा करने वाली क्रीम का लगातार इस्‍तेमाल आपको हमेशा के लिए परेशानी में डाल सकती है।

Beauty Products in hindi

विशेषज्ञों की मानें तो ज्‍यादातर क्रीमों में स्टेरॉयड होते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने से त्वचा को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो ग्लूटेथियोन को इंटरनेट पर गोरेपन के एंजेट के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन सच यह है कि यह हमारे शरीर में एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट है जो उम्र बढ़ने या बीमारी के कारण समाप्त हो जाती है। गोरेपन से इसके संबंध के बारे में वैज्ञानिकों ने पुष्टि नहीं की है। एक आंकड़े के मुताबिक इंडिया में गोरेपन की क्रीम का बाजार 2010 में 2,600 करोड़ रुपये था।

2012 में 233 टन गोरेपन की उत्पादों का प्रयोग भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा किया गया। दो साल बाद गोरेपन का जुनून नए स्तर पर तब पहुंचा जब एक ब्रांड ने योनि गोरी करने वाले उत्पाद को पेश किया। इसका मतलब यह साफ है कि 21 वीं सदी में भी गोरेपन के प्रति लोगों की दीवानगी में कमी नहीं आई है। जबकि तमाम ब्‍यूटी एक्‍सपर्ट भी यह मानते हैं कि त्वचा का रंग हल्का करने वाली क्रीम केवल एक निश्चित सीमा तक मेलानीन को हल्का कर सकती है। यह त्वचा को बिल्कुल गोरा नहीं कर सकती है। उनका मानना है कि गोरेपन के बजाय सुंदर त्वचा की प्रशंसा करनी चाहिए। कोई भी महिला या पुरूष उचित सफाई, टोनिंग, तेल लगाने, मॉश्चरॉइजिंग त्वचा में नमी बनाए रखकर साफ-सुथरी चमकदार त्वचा के जरिए सुंदर दिख सकता है।

Image Source : Getty

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