इन 4 कारणों से बारिश में बढ़ जाती है अस्थमा की परेशानी, जानें बचाव के उपाय

बारिश में अगर आपको सांस की समस्या रहती है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते है। इसलिए जरूरी है कि आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें और बरसात का आनंद लें।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Jul 24, 2021 12:00 IST
इन 4 कारणों से बारिश में बढ़ जाती है अस्थमा की परेशानी, जानें बचाव के उपाय

बारिश के मौसम में जहां सभी को आनन्द की अनुभूति होती है वहीं यह मौसम सांस की बीमारी (Breathing problem) से पीड़ित लोगों के लिए एक चिंता का विषय होता है। क्योंकि इस मौसम में सांस लेने में  ज्यादा दिक्कत होती है। असल में सांस लेने की तकलीफ में इस मौसम में फेफड़ों तक हवा पहुंचने में दिक्कत होती है। वैसे भी यह एक क्रोनिक रेस्पिरेटरी बीमारी है। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, पालम विहार, गुरुग्राम के क्रिटिकल केयर और पल्मोनरी-सीनियर कंसल्टेंट डॉ पीयूष गोयल बताते हैं कि इसकी मुख्य वजह एलर्जी रिएक्शन है जोकि मोल्ड / फंगस, पालतू जानवर, एलर्जेन और वायरल संक्रमण से होते हैं। मानसून का मौसम इस समस्या को ट्रिगर्स करता है। बरसात के मौसम में कम धूप के कारण विटामिन डी की कमी और इस दौरान ठंडा वातावरण अस्थमा या सांस की बीमारी (Breathing problem) के लक्षणों को बढ़ाता है। इसी वजह से घरघराहट, खाँसी, सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों के वायु मार्ग में सूजन या वायु मार्ग में जकड़न का कारण बनता है और  सामान्य रूप से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। 

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बारिश में क्यों बढ़ जाती है अस्थमा की दिक्कत-Asthma during rainy season in hindi

1. बढ़ा हुआ पोलन (Dispersed Pollen)

इस परेशानी का सबसे बड़ा कारण पोलन ही होते हैं और बारिश के मौसम में वातावरण में इन पोलन की संख्या अधिक हो जाती है और इसके कारण सांस लेने की समस्या या अस्थमा अटैक भी बढ़ जाते हैं। इनका इस मौसम में बढ़ने का कारण हवा, फंगस और बाहर का वातावरण होता है। इसका प्रभाव अधिकतर रात में ही देखने को मिलता है।

2. टॉक्सिक गैस (Toxic Gases)

बारिश के मौसम में कुछ टॉक्सिक गैस जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का वाष्पीकरण अधिक होने लगता है। इन गैसों के कारण सांस ले पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि अस्थमा अटैक पड़ने का रिस्क भी बहुत बढ़ जाता है।

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3. बढ़ी हुई फंगस (Fungus)

धूल मिट्टी और लगातार बारिश होने के कारण आस पास के मौसम में फंगस का लेवल अधिक बढ़ जाता है। यह चीजें सांस के मरीजों के लिए नुकसानदायक होती हैं और ब्रांकाइटल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ा देती हैं। 

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4. वायरल इंफेक्शन (Viral Infection)

बारिश के मौसम में बहुत सारे बैक्टीरिया और वायरस वातावरण में फैल जाते हैं और इनके कारण आपको विभिन्न प्रकार की एलर्जी हो सकती है। जिससे आपको शॉर्टनेस आफ ब्रीदिंग, सांस लेने में तकलीफ या अस्थमा अटैक बढ़ जाते हैं।

बचाव के उपाय-How can we control asthma during rainy season

  • सांस के मरीजों को या दमा के रोगियों को पशुओं के साथ संपर्क में नहीं आना चाहिए और अगर आपके घर में कोई पालतू है तो आपको हमेशा उसे अपने कमरे से दूर ही रखना चाहिए।
  • अपने टॉयलेट और बाथरूम जैसी जगहों को अच्छी तरह से ब्लीच से सफाई करें। ताकि उनमें किसी प्रकार की फंगस का जमाव न हो सके।
  • आपको किसी भी हालत में अपनी दवाइयों को लेना नहीं छोड़ना है। 
  • इसके साथ ही एक संतुलित मील भी खाएं ताकि आपको पर्याप्त मात्रा में पोषण मिल सके। इसके लिए आप किसी प्रोफेशनल डायटिशियन से बात कर सकते हैं।
  • गर्म पानी की मदद से सभी तकिया, तकिया कवर, रग, बेड शीट को धोएं।

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मौसम के अलावा अगर आप अधिक गुस्से में रहते हैं या आप अधिक एक्सरसाइज करते हैं तो भी इससे आपको सांस लेने में दिक्कत का खतरा बढ़ जाता है। आपको यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि इस समस्या को ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है। इन टिप्स की मदद से अपनी सेहत का इस मौसम में खास ख्याल रखें। अगर आपको ज्यादा गुस्सा आता है या अधिक डर लगता है तो आपको अपने इन इमोशंस को नियंत्रित करने के लिए किसी परिवार के सदस्य या किसी प्रोफेशनल की मदद लेने में देर न करें।

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