क्या है त्वचा के नीला पड़ने (सायनॉसिस) का कारण? जानें इसके खतरे और बचाव के लिए जरूरी टिप्स

Cyanosis or Bluish Skin : कई लाेगाें के शरीर पर नीला-नीला रंग यानी नील पड़ना नजर आता है। इसे सायनॉसिस कहा जाता है। जानें इसके खतरे और बचाव टिप्स

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jul 22, 2021Updated at: Jul 22, 2021
क्या है त्वचा के नीला पड़ने (सायनॉसिस) का कारण? जानें इसके खतरे और बचाव के लिए जरूरी टिप्स

क्या आपके शरीर पर भी नीला पड़ता है? कई लाेगाें के उंगुलियाें, पंजाें, नाखूनाें, हाेंठाें और त्वचा पर नील पड़ जाता है। इसे नीलराेग या सायनॉसिस (Cyanosis or Bluish Skin) भी कहा जाता है। इस समस्या का मुख्य कारण खून में ऑक्सीजन की कमी हाेना हाेता है। यह समस्या बच्चाें से लेकर बुजुर्गाें तक किसी भी व्यक्ति काे हाे सकती है। इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी हाेता है। सायनॉसिस के इलाज में देरी हृदय और श्वसन तंत्र काे प्रभावित कर सकता है।

सायनॉसिस के लक्षण (Cyanosis or Bluish Skin Sysmptoms) 

  • सीने में दर्द
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार और सिरदर्द
  • नाखूनाें के नीचे की त्वचा बढ़ जाना
  • तेजी से सांस लेना
Cyanosis or Bluish Skin

सायनॉसिस के प्रकार (Cyanosis or Bluish Skin Types)

सायनॉसिस कई प्रकार का हाे सकता है। इसमें किसी में हाथ पर नील पड़ता है, ताे किसी में पैराें पर। इतना ही नहीं कई बार शरीर के ऊपरी ताे कभी शरीर के निचले हिस्से पर नील पड़ता है।

पेरीफेरल सायनॉसिस

पेरीफेरल सायनॉसिस में हाथाें, पैराें के उंगुलियां और नाखूनाें काे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। ब्लड सर्कुलेशन की कमी, चाेट की वजह से ऐसा हाे सकता है। सर्दी के मौसम में अकसर रह समस्या हाेती है।

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सेंट्रल सायनॉसिस

सेंट्रल सायनॉसिस में जीभ और हाेंठाें पर नीला रंग दिखाई देता है। खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हाेने की वजह से अकसर यह समस्या हाेती है। सेंट्रल सायनॉसिस हृदय और श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।

डिफरेंशियल सायनॉसिस

डिफरेंशियल सायनॉसिस में शरीर के कुछ हिस्से में नील पड़ता है, ताे कुछ हिस्सा सामान्य रहता है। इसमें या ताे शरीर के ऊपरी हिस्से में नील पड़ता है या फिर निचले हिस्से में।

एक्राे सायनॉसिस

इसमें हाथाें और पैराें के आसपास नील पड़ जाता है और शरीर एकदम ठंडा हाे जाता है। इस स्थिति में शरीर काे गर्मी चाहिए हाेती है।

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सायनॉसिस के खतरे

सायनॉसिस में शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हाे पाती है। यानी शरीर काे ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जाे कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। सायनॉसिस के लक्षण दिखते ही आपकाे इसका समय पर इलाज करवाना चाहिए, अन्यथा यह बाद में गंभीर राेगाें का कारण बन सकता है। सायनॉसिस हृदय और श्वसन तंत्र काे नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही इससे हार्ट फेल हाेने की भी संभावना बढ़ती है।

Cyanosis or Bluish Skin prevention tips

सायनॉसिस के बचाव टिप्स (Cyanosis or Bluish Skin Prevention Tips)

सायनॉसिस की समस्या काे दूर करने के लिए आप कुछ बचाव टिप्स काे फॉलाे कर सकते हैं। यह हृदय और श्वसन तंत्र काे सबसे अधिक प्रभावित करता है। इसलिए आपकाे

  • धूम्रपान करने से बचना चाहिए।
  • नियमित रूप से याेगाभ्यास और एक्सरसाइज करें।
  • रेगुलर हेल्थ चैकअप करवाएं।
  • अगर आप पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, ताे अपनी जांच करवाते रहें।

अगर आपके शरीर पर भी नील पड़ते हैं, ताे इस समस्या काे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। समस्या बढ़ने पर यह कई तरह के गंभीर राेगाें का कारण भी बन सकता है। इसलिए इसके लक्षण दिखते ही आपकाे तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। 

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