पीरियड्स में कौन से योग आसन करें और कौन से नहीं, एक्सपर्ट से जानें

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में बहुत दर्द होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने में योग आसन मदद करते हैं। इन्हें घर पर कर सकते हैं। 

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: May 20, 2021Updated at: May 20, 2021
पीरियड्स में कौन से योग आसन करें और कौन से नहीं, एक्सपर्ट से जानें

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में दर्द से लेकर शरीर के कई अन्य अंगों में दर्द होता है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स में ज्यादा दर्द होता है कुछ को कम होता है। लेकिन माहवारी के इन दिनों में आप कुछ आसान योगासन कर सकते हैं जिनसे दर्द में राहत मिलेगी। इन दिनों में आपको ऐसे आसन करने चाहिए जिनसे आपके पेट पर ज्यादा प्रभाव न पड़े। यहां आपको इनोसेंस योगा की योग एक्सपर्ट भोली परिहार (Yoga Expert, Bholi Parihar) बता रही हैं कि आपको पीरियड्स के दौरान कौन से योग आसन करने चाहिए और कौन से नहीं करने चाहिए। भोली परिहार का कहना है कि माहवारी में रक्त का प्रवाह ठीक बना रहे उसके लिए योग आसन करना जरूरी है। एक्सपर्ट का कहना है कि ब्लीडिंग का फ्लो जितना ठीक होगा उतना दर्द कम होगा। यह सभी आसन माहवारी के दर्द (Periods pain) से राहत दिलाते हैं।

Inside5_yogaandperiods

माहवारी में करें ये योग आसन 

शशांक आसन (shashank asana)

शशांक आसन को करने से हमारे हिप्स, जांघ और हमारे पेट वाले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिल जाता है और वो रिलैक्स हो जाते हैं। ये हमारे पेट की मांसपेशियों को आराम दिलाता है जिसकी वजह से हमें माहवारी में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।   

करने का तरीका

  • -अपने दोनों पैरों को सामने खोलकर बैठ जाएं।
  • -एक-एक करके अपने घुटनों को मोड़ते हुए वज्रासन में आ जाएं।
  • -आपको ध्यान रखना है कि आप अपनी एड़ियों पर न बैठें।
  • -आपके पैर का लेफ्ट अंगूठा राइट अंगूठे के ऊपर रहेगा।
  • -अपने दोनों घुटनों के बीच में गैप कर लें। 
  • -दोनों हाथों को आसमान की ओर उठाएं।
  • -पूरी बॉडी में अच्छा खिंचाव दें।
  • -धीरे से सांस छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों की हथेलियों को जमीन पर दोनों घुटनों के बीच में रख दें।
  • -दोनों हाथों को आगे की ओर फैलाते जाएं। 
  • -अपने शरीर को दोनों घुटनों के बीच नीचे की ओर ले जाएं।
  • -जहां तक आप नीचे की ओर आसानी से अपने शरीर को ले जा पा रहे हैं वहां तक ही ले जाएं। 
  • -5-10 सेकेंड होल्ड करें।
  • -सांस भरते हुए धीरे से वापस आ जाएं।
  • इस आसन को दूसरी बार फिर करें जिसमें आप 20-25 सेकेंड होल्ड करें।

मल आसन (malasana)

यह आसन करने से हमारे पैरों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। माहवारी में दर्द कम होता है। हमारी जांघों पर खिंचाव डालता है जिसकी वजह से पीरियड्स का फ्लो ठीक हो जाता है। हमारे ब्लड फ्लो को ठीक करता है। 

Inside3_yogaandperiods

करने का तरीका

  • -दोनों पैरों को मोड़कर कुकड़ु होकर बैठ जाएं। 
  • -अब अपने दोनों घुटनों को एक-एक करके दूर कर दें और पंजे बाहर की तरफ कर दें और एड़ियां हल्की सी अंदर की तरफ रहेंगी।
  • -दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ लें और दोनों हाथों से नमस्कार करें। 
  • -दोनों कोहनियों से अपने घुटनों को सहारा देकर पीछे की तरफ प्रेस करें।
  • -कमर व गर्दन सीधी रखें। 
  • -15 सेकेंड होल्ड करें व धीरे से वापस आ जाएं। 

इसे भी पढ़ें : पीरियड्स के दर्द में ट्राई करें ये सेल्फ एक्युप्रेशर टिप्स, एब्डोमिनल पेन और मूड स्विंग्स से भी मिलेगी राहत

पवनमुक्तासान (pawanmuktasana)

जिन लोगों को पेट में दर्द बहुत होता है उस दर्द को कम करता है। ये पेट, कमर और जांघ के दर्द को ठीक करता है। 

Inside4_yogaandperiods

करने का तरीका

  • -पीठ के बल लेट जाएं।
  • -दोनों घुटनों को मोड़कर अपनी छाती से लगा लें। 
  • -दोनों हाथों से अपने घुटनों को पकड़ लें और घुटनों को सहारा दें। 
  • -इस आसन में 15 सेकेंड होल्ड करें।
  • -शरीर को बिल्कुल ढीला रखें और धीरे से वापस आ जाएं।

बद्धकोण आसन (baddakon asana)

बद्धकोण आसन हमारी लोअर बैली में दर्द या इनर थाइज, हिप्स की मांसपेशियां और जांघों की मांसपेशियों को ढीला व रिलैक्स कर देता है जिसकी वजह से पीरियड्स के दौरान आराम मिलता है।

Inside1_yogaandperiods

करने का तरीका

  • -कमर व गर्दन को सीधा करके बैठ जाएं।
  • -अपने दोनों पंजों को आपस में जोड़ लें।
  • -घुटने बाहर की तरफ रहेंगे। 
  • -दोनों हाथों से अपने पंजों को पकड़ लें और कुछ देर विश्राम करें।
  • -धीरे से वापस आ जाएं।

एक पाद पवनमुक्तासन (Ek pad muktasana)

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को गैस की समस्या होती है। क्योंकि माहवारी के दौरान गर्भाशय में जो अंडाणु होते हैं उनसे गर्मी निकलती है जिस कारण पेट में गैस बनती है। इस आसन को करने से गैस बाहर निकलती है जिसकी वजह से हमारा पेट रिलैक्स हो जाता है। माहवारी के समय कमर में दर्द होता है उस समस्या को भी यह आसन दूर करता है।  

Inside2_yogaandperiods

करने का तरीका

  • -पीठ के बल लेट जाएं।
  • -अपने दोनों पैरों को सीधा कर लें।
  • -दोनों पैर आपस में जुड़े रहेंगे।
  • -दोनों हाथों को अपने शरीर के बगल में रख लें उसके बाद 5-6 लंबे गहरे सांस भरें और छोड़ दें।
  • -पूरी बॉडी को रिलैक्स कर दें।
  • -धीरे से अपने सीधे पैर के घुटने को मोड़ें व अपने पेट से लगा लें। 
  • -अपने दोनों हाथों से अपने राइट लैग के घुटने को पकड़ कर रखें।
  • -कुछ देर इस आसन में होल्ड करें।
  • -जब तक आप कंफर्टेबल महसूस कर रहे हैं तब तक आप इस आसन में में रुकें।
  • -धीरे से पैर को सीधा कर लें और आराम से लेट जाएं। कुछ देर बाद दूसरे पैर से इस आसन को रिपीट करें। 

इसे भी पढ़ें : पीएमएस के दौरान महिलाओं में क्‍यों होता है चिड़चिड़ापन और अवसाद

शवासन (shavasana)

शवासन करने से हमारे शरीर की सभी मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं। शरीर तनाव मुक्त हो जाता है। शरीर के दर्द को कम करने में मदद करता है। माहवारी के दौरान कमर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। 

करने का तरीका

  • -जमीन पर लेट जाएं और अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें।
  • -अपने दोनों हाथों को शरीर से दूर रखें।
  • -अपने दोनों पैरों में सुविधाजनक गैप कर लें।
  • -अपनी आंख को धीरे से बंद करें।
  • -अपना सारा ध्यान आती-जाती सांसों पर लगाएं। 
  • -हर एक सांस के साथ अपने शरीर को और ढीला करते जाएं।
  • -पूरे शरीर में किसी भी प्रकार का तनाव न हो।
  • -अपने विचारों को कम करने का प्रयास करें।
  • -अपनी कमर, कंधे व गर्दन इन तीन पार्ट्स में किसी भी प्रकार का तनाव न हो। अगर फोकस नहीं कर पा रहे हैं तो अपनी दोनों आंखों के बीच में आंखों को बंद करके ओम की आकृति बन रही हो वैसा महसूस करना है। 

पीरियड्स में ये योग आसन न करें

जिस भी आसन को करने से आपके पेट पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है। उस आसन को बिल्कुल न करें। खासकर वे आसन जो पीछे मुड़ने वाले होते हैं। चक्रासान, व्याग्रासन, धनुरासन और पूर्ण उष्ट्रासन वे आसन हैं जिन्हें करने से पेट पर ज्यादा दबाव आता है इसलिए इन्हें नहीं करना नहीं चाहिए। 

इस लेख में जो भी आसन बताए गए हैं वे करने में बहुत आसान हैं। इन्हें आसानी से घर पर किया जा सकता है। यह सभी आसन पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करते हैं। तो वहीं उन आसनों पर भी ध्यान देना है जिन्हें नहीं करना है।

Read more Articles on Yoga in Hindi 

Disclaimer