टीनएज बच्चों के साथ इन 5 तरीकों से घुल-मिल सकते हैं माता-पिता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 26, 2018
Quick Bites

  • आजकल कम करते हैं मां-बाप बच्चों से बातचीत।
  • बच्चों को ज्यादा से ज्यादा बोलने का दें मौका।
  • बच्चों को छोटी-छोटी बात पर टोकना ठीक नहीं।

कहते हैं बच्चे जब बड़े हो जाएं, तो उन्हें दोस्त समझना चाहिए। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर मां-बाप के पास बच्चों के लिए समय नहीं होता है। ऐसे में टीन एज आते-आते बच्चे मां-बाप से भावनात्मक रूप से इतने दूर हो जाते हैं कि उन्हें एक-दूसरे की बातों को समझने में भी परेशानी होने लगती है। बच्चे जब छोटे होते हैं तब उन्हें मां-बाप से प्यार चाहिए होता है और अपने जरूरत की चीजें चाहिए होती हैं। मगर बड़े होने पर बच्चों को प्यार से ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है क्योंकि टीन एज आते-आते बच्चे खुद जिम्मेदार और अपने फैसले खुद लेने लायक समझने लगते हैं। यही वो समय होता है, जब मां-बाप अपने बच्चे के दिल में उनके लिए जगह बना सकते हैं। आइये आपको बताते हैं कि आप अपने टीन एज बच्चों के साथ किस तरह घुल-मिल सकते हैं।

साथ में थोड़ा वक्त बिताएं

क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे दोस्तों की बातें आपसे ज्यादा क्यों मानते हैं? इसके पीछे एक सरल सा नियम है। और वो नियम ये है कि किसी को भी समझने और उसे अपनी बात समझाने के लिए उसके साथ वक्त बिताना बहुत जरूरी होता है। बच्चे ज्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ रहेंगे, तो उनकी बातों का असर उनके दिमाग पर जल्दी होगा। अगर आप अपने बच्चों के साथ वक्त नहीं बिताते हैं, तो वो आपसे दूर हो जाएंगे। ये समस्या शहरों में और खासकर नौकरीपेशा मां-बाप में ज्यादा होती है। इसलिए रोज थोड़ा सा ही सही मगर अपने बच्चों के साथ वक्त जरूर बिताएं। आप उनसे उनके दिन के बारे में पूछ सकते हैं, उनके दोस्तों के बारे में पूछ सकते हैं और थोड़ी बातें उनकी पढ़ाई और कैरियर के बारे में कर सकते हैं।

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बोलें कम सुनें ज्यादा

आजकल देखने में आता है कि मां-बाप और टीन एज बच्चों में होने वाली बातचीत ज्यादातर सवाल-जवाब में सिमटकर रह जाती है। याद कीजिए जब आपका बच्चा बहुत छोटा था तब आपकी बातचीत में कितनी सारी फिजूल की बातें शामिल थीं। ज्यादातर मां-बाप जब अपने बच्चों से बात करते हैं, तो खुद ज्यादा सवाल करते हैं और बच्चे उनका जवाब देते हैं। टीन एज बच्चों के साथ घुलना-मिलना है, तो बातचीत में उन्हें ज्यादा से ज्यादा बोलने का मौका दें। कोशिश करें कि आपके सवाल ऐसे हों, जिनके लंबे जवाब दिये जा सकें। जैसे- अगर आपका बच्चा कहे कि उसे दोस्तों के साथ पार्टी में जाना है, तो ये पूछने के बजाय कि कितने बजे लौटोगे, आप ये पूछ सकते हैं कि पार्टी में क्या-क्या होगा और कितना समय लगेगा।

हर समय उपदेश के मूड में न रहें

ज्यादातर मां-बाप अक्सर उपदेश के मूड में होते हैं और बच्चों को हर छोटी-छोटी बात पर टोकते हैं। अगर आप कभी-कभी बच्चों को डांटते हैं या टोकते हैं, तो टोके जाने का असर उनपर होता है और वो अपनी गलती का एहसास करते हैं। मगर अगर आप हर छोटी-छोटी बात पर उन्हें टोकते हैं और डांटते हैं, तो थोड़े समय बाद बच्चे आपको इग्नोर करने लगते हैं। गलतियां करना किसी काम को सीखने का ही हिस्सा है। जब बच्चे कोई काम गलती करने के बाद सही करना सीखते हैं, तो भविष्य में गलती की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसलिए बच्चों को छोटी-छोटी बात पर टोकने के बजाय उन्हें हंसी-मजाक में चीजें समझाएं।

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ईमानदार कोशिश की तारीफ करें

कई बार किसी काम में अपनी पूरी कोशिश के बाद भी बच्चे नाकाम हो जाते हैं। ऐसे में बहुत से मां-बाप काम के रिजल्ट के आधार पर बच्चों से निराश हो जाते हैं। लेकिन ऐसे समय में परिणाम से ज्यादा आपको बच्चे की ईमानदार कोशिश के बारे में सोचना चाहिेए और उसकी तारीफ करनी चाहिए। अच्छी कोशिश के बाद भी अगर आप उन्हें सफल न होने के लिए डांटते या टोकते हैं, तो उन्हें इस बात का बुरा लगता है।

बच्चों पर नजर रखें मगर आजादी भी दें

आजकल के समय को देखते हुए बच्चों और उनकी आदतों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। मगर नजर रखने का मतलब ये नहीं है कि आप उनसे उनकी आजादी छीन लें। बहुत दबावों के बीच रहने से बच्चों का प्राकृतिक टैलेंट उभरकर नहीं आ पाता है और दब जाता है।

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