बुरी खबर सुनने के बाद कैसे रखें अपनी भावनाओं पर काबू? जानें 5 आसान तरीके

लोकसभा चुनाव 2019 के रिजल्ट्स आ चुके हैं। ऐसे में ये परिणाम कई लोगों को गहरा दुख तो किसी को जबरदस्त खुशी दे सकते हैं। दुख के समय अपनी भावनाओं को काबू में न रखना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि गहरे दुख में किस तरह करें अपने

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: May 23, 2019
बुरी खबर सुनने के बाद कैसे रखें अपनी भावनाओं पर काबू? जानें 5 आसान तरीके

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम सामने आ चुके हैं। कुछ लोगों के लिए चुनाव परिणाम खुशियों की सौगात लाए हैं तो किसी के लिए दिल को ठेस पहुंचाने वाले साबित हो रहे हैं। इसके अलावा भी जीवन में कई बार आप ऐसी खबरों से गुजरते हैं, जिसे सुनने के बाद आपको गहरा दुख होता है और आप खुद को संभाल नहीं पाते हैं। घोर निराशा और दुख के समय अपनी भावनाओं पर काबू रखना आसान नहीं होता है। आइए आज हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही तरीके, जिनसे बुरी खबर सुनने के बाद आपको अपनी भावनाओं को काबू रखने में मदद मिलेगी।

कैसे करें बुरी खबर का सामना?

बुरी खबर से बचने का कोई तरीका नहीं है। जीवन में ऐसी बुरी स्थितियां कई बार आती हैं, जब आप कोई ऐसी खबर सुनते हैं, जो आपको दुख पहुंचाती है। ऐसे समय में कई बार निराशा, गुस्सा, तनाव, डिप्रेशन, चिंता आदि भावनाएं एक साथ व्यक्ति पर हावी होने लगती हैं और वो रो पड़ता है। इसका कारण यह है कि गहरा दुख पहुंचने पर व्यक्ति के मस्तिष्क में कई तरह के हार्मोन्स का स्राव शुरू हो जाता है, जिससे व्यक्ति का अपनी भावनाओं से नियंत्रण छूटने लगता है।

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गहरी सांसें लें, न रुके हृदय गति

दुख के समय आमतौर पर व्यक्ति की हृदयगति बढ़ जाती है, जिसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। सबसे जरूरी बात यही है कि इस दौरान आपको जल्दी-जल्दी गहरी सांसें लेनी चाहिए, ताकि आपके हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके। ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बार हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति व्यक्ति के लिए जानलेवा भी हो सकती है।

नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है

दुख के समय आपके मन में नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में नकारात्मक विचार आपके स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं। दरअसल शरीर का विज्ञान अलग तरह से कार्य करता है। गहरे दुख के समय अगर भावनाएं उमड़कर आंसू या गुस्से के रूप में निकल जाएं तो बेहतर है, वर्ना कई बार ये व्यक्ति को गहरे डिप्रेशन में ले जाती हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में व्यक्ति को अचानक ऐसा सदमा लगता है कि उसकी हृदयगति असंतुलित हो जाती है और स्थिति जानलेवा हो जाती है।

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इससे भी बुरे की कल्पना करें

एक दुख को उससे भी बड़ा दुख काट देता है या दर्द ही दर्द की दवा होता है- ऐसी बातें आपने भी सुनी होंगी। ये बातें ऐसे समय में बिल्कुल सटीक मालूम पड़ती हैं। दुख के समय जब आपके मस्तिष्क में पहले ही नकारात्मक से निराशा से भरी बातें चल रही हों, तब आप स्वयं ही और बदतर स्थिति के बारे में कल्पना लगने लगें। ये कल्पना आपको इस बात का एहसास दिलाएगी कि स्थिति जो भी है, मगर सबसे बुरी नहीं है।

अपने सबसे करीबी व्यक्ति से बात करें

दुख के समय सांत्वना हमारे लिए बहुत अहम हो जाती है। सांत्वना हमें इस बात का सहारा देती है कि बुरी स्थिति से लड़ने के लिए हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले दूसरे लोग भी हैं। इसलिए गहरे दुख में आप अपने सबसे करीबी मित्र को फोन करें या मिलने जाएं। उनकी सांत्वना आपके दुख को कम करेगी।

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