फादर्स डे पर बेहतर स्वास्थ्य के लिए, पिता को दें इन 5 जरूरी टेस्ट्स का तोहफा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 16, 2018
Quick Bites

  • फादर्स डे हर साल जून के तीसरे संडे को मनाया जाता है।
  • इस फादर्स डे अपने पिता को एक बेहतर स्वास्थ्य का तोहफा।
  • ये 5 जरूरी मेडिकल टेस्ट, जो हर पिता को समय रहते करवाना चाहिए।

फादर्स डे, एक ऐसा दिन जो दुनियाभर के पिताओं के सम्मान में मनाया जाता है। पिता का रिश्ता खास होता है, जिसके दुलार और सख्ती के बीच हमारा जीवन आकार लेता है। इस फादर्स डे आपकी क्या प्लानिंग है? गिफ्ट तो आप हमेशा देते हैं और पापा खुश भी होते हैं।
मगर क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पिता ने आपको इनती खूबसूरत जिंदगी दी है, फादर्स डे पर आप उन्हें बेहतर स्वास्थ्य का तोहफा दें। जी हां! हम बता रहे हैं कुछ ऐसे जरूरी मेडिकल टेस्ट, जिन्हें करवाकर आप अपने पिता को दे सकते हैं एक बेहतर और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन।

बीएमआई

कब करवायें जांच – हर तीन साल में या जब भी आपको वजन बढ़ता हुआ लगे

मोटापा आजकल एक बड़ी बीमारी बन चुका है। दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे पीड़ित हैं। मोटापे के कारण उच्च रक्त चाप, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं। बीएमआई वह जांच होती है, जिसमें कद के अनुसार आपके लिए सही वजन का पता लगाया जा सकता है। इस जांच से पता चलता है कि कहीं आपका वजन अधिक तो नहीं या आप खतरे के करीब तो नहीं। 18.5 से 24.9 के बीच का बीएमआई सही माना जाता है। यदि आपका बीएमआई इससे अधिक है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको वजन कम करने की जरूरत है।

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डेंटल टेस्ट

कब करवायें जांच- दो साल में एक बार

दांतों की समस्या और हृदय रोग के बीच सीधा कनेक्शन होता है। जब मुंह में मौजूद बैक्टीरिया रक्त के जरिये शरीर में जाते हैं, तब वह हृदय तक रक्त ले जाने वाली धमनियों में सूजन का कारण बन सकते है। इस सूजन के कारण कई बार दिल की गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक स्वादिष्ट और पौष्टिक चीजों का आनंद लेना है, तो आपके दांतों का स्वस्थ होना जरू है। अच्छी बात यह है कि मसूड़ों की समस्या को अगर समय रहते पकड़ लिया जाए, तो दिल की कई बीमारियों से समय रहते बचाव संभव है।

डायबिटीज की जांच

कब तक करवायें – साल में एक बार

डायबिटीज कहने को एक सामान्य बीमारी है, लेकिन इसके कारण कई अन्य समस्यायें हो सकती हैं। एक अनुमान के अनुसार डायबिटीज के ग्रस्त एक चौथाई लोग समय रहते इसका निदान नहीं करवाते। डायबिटीज की इस जांच से यह पता चल जाता है कि क्या आप दिनचर्या में बदलाव लाकर इस बीमारी से बच सकते हैं। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में कहा गया है कि रोजाना 30 मिनट तक व्यायाम करने और केवल पांच फीसदी वजन कम करने से आप डायबिटीज का खतरा कम कर सकते हैं। इस शोध में कहा गया कि फल, सब्जियां और फाइबर युक्त पदार्थ खाने से आप डायबिटीज के खतरे को 58 फीसदी तक घटा सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल की जांच

कब करवायें जांच- साल में कम से कम दो बार

कोलेस्ट्रॉल की जांच करने के लिए लिपिड टेस्ट किया जाता है। कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कोलेस्ट्रॉल ही होता है। इस टेस्ट से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को जांचा जाता है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का कारण बनता है। कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में जीवनशैली के साथ, तनाव, धूम्रपान, स्मोकिंग सबसे अधिक जिम्‍मेदार है। इसलिए साल में दो बार कोलेस्‍ट्रॉल की जांच अवश्‍य करायें।

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स्‍क्रीनिंग फॉर मेटाबॉलिक सिंड्रोम

कब करवायें जांच- हर तीन से पांच वर्ष में जांच करवानी चाहिए। इसके साथ ही कोलेस्‍ट्रॉल और डायबिटीज के स्‍तर की भी जांच की जानी चाहिए।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम लक्षणों का ऐसा समूह होता है जो आपको डायबिटीज और हृदय रोग, दोनों होने का इशारा करता है। इसमें पहले लक्षणों की जांच पहचाने जाते हैं और अगर यह मौजूद हो, तो फिर जरूरत के हिसाब से जांच की जाती है। यदि किसी पुरुष में इन पांच में से तीन लक्षण नजर आएं, तो डॉक्‍टर उन्‍हें मेटॉ‍बॉलिक सिंड्रोम की जांच करने की सलाह देते हैं-

  • कमर का आकार 40 या उससे अधिक
  • गुड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा 40 मिग्रा/डेलि से कम
  • ट्रिग्‍लाईकेरिडस का स्‍तर 150 मिग्रा/डेलि से अधिक
  • रक्‍तचाप 130/85 से अधिक होना
  • फास्टिंग ग्‍लूकोज का स्‍तर 100 से अधिक होना

अगर आपको इनमें से कोई भी तीन लक्षण नजर आते हैं, तो आपका डॉक्‍टर सी-रेएक्टिव प्रोटीन यानी सीआरपी जांच भी कर सकता है। हृदय की सेहत पर नजर रखने का यह सबसे अच्‍छा तरीका माना जाता है।
यह क्‍या है- यह रक्‍त जांच है जिससे रक्‍तवाहिनियों में प्‍लाक जमने की स्थिति की जांच की जाती है।

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