गर्भावस्था में पेट बढ़ने के बारे में ये भी जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 06, 2013
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क्या आपको गर्भावस्था के बारे में सब कुछ पता है, शायद नहीं। गर्भावस्‍था के 40 हफ्तों के दौरान तमाम ऐसी बातें होती हैं जो कि आपके लिए जानना बहुत जरूरी होता है। इस लेख के जरिए हम आपको पेट बढ़ने के बारे में कुछ ऐसी ही बातें बता रहे हैं। इन बातों की जानकारी हर महिला को होनी चाहिए।

 

गर्भवती महिलागर्भावस्था का समय हर महिला के बहुत ही सुखद समय होता है। यह वह समय होता है जब उसे प्‍यार और देखभाल की जरूरत होती है। गर्भवती होने के बाद शिशु के विकास के साथ ही आपका पेट बढ़ता जाता है। इस दौरान थकान और चक्‍कर आना सामान्‍य होते हैं। बढ़े हुए पेट के साथ काम करने में भी परेशानी होती है। बच्चे के पेट के अंदर लात मारने पर आपको खुशी मिलती है। कई महिलाओं के लिए यह समय बहुत ही यादगार होता है।


गर्भावस्था में पेट से जुड़े कुछ मिथ
ऐसा कहा जाता है कि गर्भ को देखकर बच्चे का लिंग पता लगाया जा सकता है। हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। आपने दादी या मां के मुंह से सुना होगा कि पेट नीचे की ओर झुका हो तो लड़का होगा, यदि ऊपर की तरफ हो तो लड़की होगी। महिलाओं के गर्भ का आकार उनके पेट और मांसपेशियों की बनावट के आधार पर बढ़ता है।

बच्‍चे के लिंग का पता केवल जांच से ही चल सकता है, जो कि कानूनन रूप से गलत है। पेट के आकार से बच्‍चे के लिंग का पता नहीं चलता है। पेट का आकार बच्‍चे के वजन के हिसाब से बढ़ता है। बच्‍चे की दिल की धड़कन से बच्‍चे के लिंग का कोई मतलब नहीं होता, सभी सामान्‍य बच्‍चों के दिलों की धड़कन बराबर होती है। वहीं प्रेग्‍नेंसी में अच्‍छी देखभाल और शारीरिक परिवर्तनों के कारण चेहरे का रंग और टोन बदल जाता है। कई बार जुड़वा बच्चों या गर्भ में बच्चे की स्थिति की वजह से भी पेट का आकार बदल सकता है।

 

पेट से जुड़े कुछ अन्य तथ्य
गर्भावस्था के दौरान महिला को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- उल्टी होना, पीठ दर्द, सिर दर्द, चक्कर आना और स्तनों के आकार में परिवर्तन आदि। इस दौरान महिला के शरीर व पेट पर सूजन आने से परेशानी होती है। प्रसव का समय नजदीक आने पर कई बार सूजन ज्‍यादा हो जाती है। ऐसा होने पर आराम करना जरूरी होता है। पहली तिमाही में बायीं तरफ करवट लेकर सोने की आदत डालें। ऐसा करने से आपके गुर्दों को अपशिष्‍ट पदार्थों और द्रवों को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है और सूजन कम होती है।


पेट में फीटल मूवमेंट होने पर
हर महिला गर्भवास्था की तीसरी तिमाही में फीटल किक से गुजरती है। बच्चा बड़ा हो जाता है और अपनी मौजूदगी का अहसास कराता है। फीटल मूवमेंट मां के लिए बहुत मायने रखती है। यह गर्भावस्था के अनुभव को जीवंत बना देती है। पहली बार जब भ्रूण लात मारता है तो पेट में सनसनाहट महसूस होती है। कई बार पेट में गैस भी बनती है। जिससे आपको लगता है आपका बच्चा पैर मार रहा है, लेकिन धीरे-धीरे आप बच्चे के किक मारने के अनुभव को सहजता से महसूस करने लगती हैं।

 

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