डेंगू के उपचार में बहुत प्रभावी है बकरी का दूध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 18, 2015
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Quick Bites

  • डेंगू एजीज मच्‍छर के काटने से फैलता है।
  • ये मच्‍छर साफ पानी में ही पनपते हैं।
  • इसके मच्‍छर दिन में लोगों को काटते हैं।   
  • बकरी के दूध से प्‍लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं।

डेंगू का कहर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में महामारी बन चुका है। विकसित और विकासशील देश इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत के कई राज्‍य इसकी चपेट में आ चुके हैं, खासकर राजधानी दिल्‍ली। डेंगू के उपचार के लिए लोग महंगे हॉस्‍पीटल का रुख कर रहे हैं लेकिन इसके लिए वे सस्‍ते और अच्‍छे विकल्‍प की तलाश नहीं कर रहे। डेंगू के उपचार के लिए सबसे प्रभावी और जल्‍द से जल्‍द घटती प्‍लेटलेट्स को बढ़ाने वाले विकल्‍पों में से एक है बकरी का दूध। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं आखिर कैसे बकरी के दूध से डेंगू का उपचार होता है।

 

कैसे होता है डेंगू

डेंगू के बारे में शायद सभी जानते हैं। यह बीमारी एडीज मच्छर द्वारा काटने से होती है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों और सिर में तेज दर्द होता है। बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी फैलने वाली बीमारी है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिरता है, इसलिए इसका उपचार तुरंत कराने की जरूरत होती है नहीं तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
Dengue in Hindi

बकरी का दूध और डेंगू

बकरी के दूध से बहुत फायदे हैं खासकर डेंगू में। औषधीय गुणों के कारण यह विशेष गंध वाला होता है। डेंगू के लिए तो यह रामबाण ही है। दरअसल बकरियां जंगल में औषधीय पौधों को ही अपना आहार बनाती हैं और उनके दूध में इसकी सुगंध हो जाती है। इस दूध में औषधीय गुणों की मात्रा भी बहुत होती है। बकरी का दूध मधुर, कसैला, शीतल, ग्राही, हल्का, रक्त-पित्त, अतिसार, क्षय, खांसी एवं बुखार को दूर करता है। डेंगू बुखार के दौरान बकरी के दूध की उपयोगिता साबित हुई है।

बकरी के दूध में विटामिन बी 6, बी 12, सी एवं डी की मात्रा कम पाई जाती है। इसमें फोलेट बाइंड करने वाले अवयव की मात्रा ज्यादा होने से फोलिक एसिड नामक आवश्यक विटामिन होता है। बकरी के दूध में मौजूद प्रोटीन गाय, भैंस की तरह जटिल नहीं होता। इसके चलते यह हमारे प्रतिरोधी रक्षा तंत्र पर कोई प्रतिकूल असर नहीं डालता। इसे एक साल से छोटे बच्‍चों को नहीं पिलाना चाहिए, क्‍योंकि इससे उनको एलर्जी हो सकती है। गाय का दूध पचने में जहां 8 घंटे लगते हैं वहीं बकरी का दूध मात्र 20 मिनट में पच जाता है।

 

बकरी के दूध के अन्‍य फायदे

जो व्यक्ति लैक्टोज को पचाने की पूर्ण क्षमता नहीं रखते हैं वे भी बकरी का दूध आसानी से पचा सकते हैं। बकरी का दूध अपच की समस्‍या दूर करता है और आलस्य को भगाता है। इस दूध में क्षारीय भस्म पाए जाने के कारण आंत्रीय तंत्र में अम्ल नहीं बनाता। थकान, सिर दर्द, मांस पेशियों में खिंचाव, अत्यधिक वजन आदि विकार दूर होते हैं। इसके दूध के सेवन से म्यूकस नहीं बनता है। शरीर के लिए जरूरी सेलेनियम तत्व बकरी के दूध में अन्य पशुओं के दुग्ध से ज्यादा होता है। यह तत्व एण्टीऑक्सीडेंट के अलावा प्रतिरोधी रक्षा तंत्र को उच्च व निम्‍न करने का काम करता है। एचआईवी आदि रोगों में इसे कारगर माना जाता है।

डेंगू से बचने के लिए बकरी के दूध के अलावा अपने आसपास की सफाई का विशेष ध्‍यान दें। अगर इस मौसम में आपको बुखार भी हो तो चिकित्‍सक से तुरंत संपर्क करें।

 

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