डेगू आघात सिंड्रोम के बारे में जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 05, 2011
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Quick Bites

  • बदलता मौसम बीमारियां और मच्छर लेकर आता है।
  • डेंगू बुखार भी ऐसी ही मच्छौर जनित बीमारी है।
  • डेंगु आघात सिंड्रोम, डेंगू हेमरेजिक बुखार के बाद होती है।
  • यह डेंगू की सबसे खतरनाक स्थिति होती है।

बदलता मौसम जहां एक ओर ताजगी और रोमानियत का अहसास होने लगता है वही बदलता मौसम बीमारियों के आगमन का समय भी होता है। बदलते मौसम में मच्छडर जनित बीमारियां अधिक पनपती है। डेंगू बुखार भी ऐसी ही मच्छौर जनित बीमारी है जिससे मौसम का मजा खराब हो जाता है। मलेरिया की भांति ही डेंगू के भी कई रूप है। इनमें डेंगू हेमरेजिक बुखार के बाद की तीसरी अवस्था  डेंगू आघात सिंड्रोम है। डेंगू आघात सिंड्रोम को डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) भी कहा जाता है। यह डेंगू की सबसे खतरनाक स्थिति होती है। आइए जानते है डेंगू आघात सिंड्रोम के बारे में।

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डेंगू आघात सिंड्रोम/ डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस)
डेंगू वायरस के तीन मुख्य प्रकार हैं। एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही किसी खास प्रकार के डेंगू से संक्रमित होता है। यदि वही व्यमक्ति दूसरी बार डेंगू से ग्रसित होता है तो वह डेंगू के दूसरे रूप से ग्रसित होगा। हालांकि डॉक्टकरों के मुताबिक ये जरूरी भी नहीं है लेकिन आमतौर पर यही डेंगू बुखार को लेकर यही मिथ बना हुआ है। साधारण डेंगू में मरीज थोड़े समय बाद अपनेआप ही ठीक हो जाता है यानी इस प्रकार के डेंगू में कोई खास फर्क नहीं पड़ता और इससे मृत्यु भी नहीं होती। लेकिन यदि डेंगू हेमरेजिक बुखार (डीएचएफ) और डेंगू आघात सिंड्रोम (डीएसएस) है और इसका तुरंत उपचार शुरू नहीं किया जाता तो ये दोनो ही डेंगू मरीज के लिए घातक हो सकते है। इसीलिए समय रहते डेंगू के स्वुरूप का पता लगाना बहुत आवश्यकक है। जब रोगी डेंगू आघात सिंड्रोम से ग्रसित होता है तो कई बार उसका बचना नामुमकिन हो जाता है।


आमतौर पर डेंगू की गंभीर और तीसरी अवस्था को डेंगू आघात सिंड्रोम कहा जाता है। डेंगू आघात सिंड्रोम की पहचान रोगी में कुछ लक्षणों को देखकर की जाती है।

 

  • मरीज तेज कंपकंपी के साथ पसीने से तर हो जाता है।
  • आघात सिंड्रोम की स्थिति आते ही मरीज के शरीर पर पड़ने वाले लाल चकते अधिक गहरे हो जाते है और उनमें खुजली होने लगती है। 
  • रोगी की नब्जऔ पर दबाव कम पड़ने लगता है साथ ही नब्जे सामान्यम से कम चलती है।
  • अधिक ठंड के साथ-साथ शरीर में बेचैनी होने लगती है। 
  • इसके अलावा साधारण और हेमरेजिक बुखार के लक्षणों के बावजूद संक्रमित व्य क्ति हर समय बेचैन रहने लगता है। 
  • मरीज धीरे-धीरे अपने होश तक खोने लगता है। जिससे मरीज को मानसिक आघात पहुंचने का भी खतरा रहता है।
  • मरीज का ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाता है।
  • डेंगू बुखार में लगतार बदलते लक्षणों और परिवर्तनों के दौरान समय-समय पर शारीरिक जांच करवानी चाहिए। डॉक्टर्स से परामर्श कर रक्तो जांच भी करवानी चाहिए।

 

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