गर्मियों में तपती धूप और भीषण गर्मी का असर हमारे शरीर की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रभाव डालता है। इस मौसम में अक्सर कुछ चटपटा या नमकीन खाने की क्रेविंग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लोग अपनी नमकीन खाने की क्रेविंग को कम करने के लिए ज्यादा नमक और मसाले वाली चीजें खाने लगते हैं, जो आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह क्रेविंग सिर्फ स्वाद से जुड़ा नहीं है, बल्कि हमारे शरीर की एक खास जैविक प्रतिक्रिया है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि गर्मियों में नमकीन खाने की क्रेविंग क्यों बढ़ जाती है? आइए Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानते हैं।
गर्मियों में नमकीन खाने की क्रेविंग के कारण
साल 2008 में Physiology & Behavior में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, नमक की क्रेविंग हमारे शरीर का एक सेफ्टी अलार्म है, जो हमें जीवित रखने के लिए जरूरी है। जब भी शरीर में खून या पानी की कमी होती है तो हमारा दिमाग नमक खाने का संकेत देता है ताकि शरीर में जरूरी मिनरल्स का संतुलन बना रहे। इसके साथ ही, डॉ. पूजा पिल्लई का कहना है कि गर्मियों में नमकीन खाने की ज्यादा क्रेविंग के पीछे ये कारण हो सकते हैं।
1. इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी
गर्मियों में अक्सर नमकीन खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है, क्योंकि पसीने के जरिए शरीर ज्यादा नमक खो देता है और उसे पूरा करने की कोशिश करता है। दरअसल जब मौसम गर्म होता है तो शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना बहता है और पानी के साथ-साथ शरीर सोडियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी खो देता है। सोडियम शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन, नसों का काम और मांसपेशियों की हलचल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसलिए, जब शरीर में इसका स्तर कम हो जाता है तो शरीर, संकेत के रूप में नमकीन खाने की क्रेविंग बढ़ा देता है।
इसे भी पढ़ें: क्या ज्यादा नमकीन खाने से हाई बीपी हो सकता है? डॉक्टर से जानें
2. डिहाइड्रेशन
गर्मियों में नमकीन खाने की क्रेविंग का एक कारण पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन होना आम बात है, खासकर अगर आप पर्याप्त मात्रा में लिक्विड नहीं पीते हैं। जब शरीर में लिक्विड की कमी हो जाती है तो वह प्यास को भी भूख समझ सकता है, जिसमें नमकीन स्नैक्स खाने की इच्छा भी शामिल होती है। नमकीन खाना कभी-कभी आपको कुछ समय के लिए बेहतर महसूस करा सकता है, लेकिन इससे प्यास और भी ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे आप ज्यादा पानी पीने लगते हैं।
3. शारीरिक गतिविधि ज्यादा होना
गर्मियों में लोग ज्यादा एक्टिव रहते हैं, जिससे पसीना ज्यादा आता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बढ़ जाती है। इससे थकान, कमजोरी या चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं और शरीर अपना संतुलन वापस पाने के लिए नमक खाने की क्रेविंग दिखा सकता है।
नमकीन खाने की क्रेविंग रोकने के टिप्स
डॉ. पूजा पिल्लई का कहना है कि गर्मियों में नमक की क्रेविंग को हेल्दी तरीके से मैनेज करने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं-
- खुद को हाइड्रेटेड रखें- पानी, नारियल पानी या जरूरत पड़ने पर ORS पीकर खुद को अच्छी तरह हाइड्रेटेड रखें, ताकि पानी की कमी पूरी हो सके।
- हेल्दी विकल्प चुनें- प्रोसेस्ड सॉल्टी स्नैक्स के स्थान पर छाछ, हल्का नमक छिड़के हुए फल या संतुलित नमक वाला घर का बना खाना खाएं।
- बैलेंस्ड डाइट लें- फल, सब्जियां और पर्याप्त मात्रा में लिक्विड पदार्थों से भरपूर संतुलित आहार खाने की कोशिश करें। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने और ज्यादा क्रेविंग को कम करने में मदद करता है।
इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में नमक खाने की क्रेविंग क्यों होती है? डॉक्टर खुद बता रहे हैं इसके 4 कारण
निष्कर्ष
गर्मियों में नमक खाने की क्रेविंग काफी आम हो जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी, डिहाइड्रेशन और शारीरिक गतिविधियां बढ़ने के कारण नमक खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इसलिए, अगर आपको नमक की क्रेविंग बहुत ज्यादा हो या इसके साथ कमजोरी और चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस हों तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
Image Credit: Freepik
FAQ
नमकीन खाने की इच्छा किस कमी से होती है?
नमकीन खाने की बहुत ज्यादा क्रेविंग मुख्य रूप से शरीर में सोडियम की कमी, डिहाइड्रेशन या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण होती है।क्या गर्मी के मौसम में ज्यादा नमक खाना अच्छा है?
नहीं, गर्मियों में ज्यादा नमक खाना हेल्थ के लिए अच्छा नहीं माना जाता है, बल्कि यह हानिकारक हो सकता है। एक हेल्दी व्यक्ति को दिनभर में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
May 06, 2026 09:43 IST
Modified By : Katyayani Tiwari May 06, 2026 09:43 IST
Modified By : Katyayani TiwariMay 06, 2026 09:43 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr. Pooja Pillai