जन्‍माष्‍टमी विशेष: कौन है ज्यादा हेल्दी, घी या मक्खन?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 14, 2017
Quick Bites

  • प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
  • त्वचा मुलायम होती है।
  • हारमोन संतुलित करता है।

घी और मक्खन दोनों ही हमारे यहां बड़े चाव से खाए जाते हैं। लेकिन ज्यादातर महिलाओं को मक्खन खाने और खिलाने में ज्यादा मजा आता है। हालांकि वे इस बात से अंजान हैं कि उनके स्वास्थ्य के लिए घी ज्यादा उपयोगी है या मक्खन? आपको बताते चलें कि घी असल में क्लेरिफाइड बटर है जो नमकहीन मक्खन से बनता है। बहरहाल घी, मक्खन से ज्यादा उपयोगी है। आयुर्वेद में भी इस बात को स्वीकारा है और मक्खन की बजाय घी खाने को महत्व दिया है। आइए जानते हैं कि घी मक्खन से ज्यादा उपयोगी क्यों है-

ghee

ओज को बढ़ावा

आयुर्वेद के मुताबिक गाय के दूध से बना घी सबसे शुद्ध घी होता है। यह हमारे अंदर की ओज को बेहतर करता है। ओज वास्तव में हमारे शरीर के टिश्यू और हारमोन को संतुलित करता है। यही नहीं हमारे शरीर में मौजूद ओज के जरिए ही हमारा दिमाग शांत और स्वस्थ रहता है। साथ ही ओज के जरिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है, जिससे हमारी आयु बढ़ती और हम हेल्दी जिंदगी जीते हैं। जबकि मक्खन में इस तरह के कोई गुण शामिल नहीं होते।  

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त्वचा संबंधी लाभ

जहां एक ओर घी सत्व गुणों से भरपूर है, वहीं दूसरी ओर मक्खन तमसिक भोजन में शामिल होता है। अगर आप थोड़ा घी लेकर अपनी नाभी में मलते हैं तो इससे आपके पूरे शरीर की त्वचा मुलायम होती है। आप कह सकते हैं कि घी एक तरह का मोएस्चराइजर है। यही नहीं अगर आपके होंठ सूख रहे हैं, तो आप अपने होंठों को मुलायम बनाने के लिए घी इस्तेमाल कर सकती हैं। आयुर्वेद में घी को बहुतायत रूप से मसाज क्रीम के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

कैलोरी, फैट और कोलेस्ट्रोल

कैलोरी, फैट और कोलेस्ट्रोल के लिहाज से भी घी, मक्खन से ज्यादा बेहतर है। घी, मक्खन की तुलना में बेहतर कंसन्ट्रेटेड वसा का स्रोत है। एक टेबलस्पून घी में जहां 13 ग्राम वसा और 117 कैलोरी होती हैं, वहीं एक टेबलस्पून मक्खन 11 ग्राम वसा और 100 कैलोरी होती है। घी नेचुरल एंटीआक्सीडेंट है। अतः इसे खाकर आप अपने शरीरक के स्वास्थ्य को बेहतर करते हैं। लेकिन यही बात मक्खन के लिए नहीं कही जा सकती।

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अल्कलाइन प्रभाव

जहां एक ओर घी का अल्कलाइन प्रभाव हल्का होता है, वहीं दूसरी ओर मक्खन में अल्कलाइनन प्रभाव न होकर एसिडिक प्रभाव देखने को मिलता है। अतः जिन्हें मक्खन सूट न करे, उन्हें इसे खाने से बचना चाहिए। एक बात और आपको बता दें कि घी हमारे शरीर द्वारा आसानी से अब्सोर्ब हो जाती है जबकि मक्खन होने में समय लेती है। इतना ही नहीं घी खाने वाले इस बात को निश्चय ही जानते होंगे कि यदि आप घी को कुछ मसाले विशेष से मिला दें तो इससे उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है।

सावधानी

ऐसा नहीं है कि घी के सभी फायदे ही मौजूद हैं। इसमें बहुत ज्यादा फायदे होते हैं, इसके बावजूद बेहतर यही है कि इसे लिमिट में खाया जाए। यदि आप इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाएंगी तो इससे कार्डियोवस्कुलर बढ़ने का खतरा होता है। इसी तरह की और भी कई बीमारी को यह जन्म दे सकता है। यदि आप घी के बहुत ज्यादा शौकीन हैं तो बेहतर है कि एक बार विशेषज्ञ से संपर्क कर लें ताकि घी खाने में आपके सामने कोई रुकावट न आए।

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