Fri Sep 11, 2026 | 08:23 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

पीरियड में ब्लड क्लॉटिंग होना सही नहीं है, जानें इसको लेकर कब चिंता करें

Are Blood Clots While On Your Period Normal: कभी-कभी पीरियड में ब्लड क्लॉट होना नॉर्मल होता है। अगर किसी महिला के साथ ऐसा रेगुलर होता है, तो उन्हें इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। तो फिर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? जानने के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें।

Are Blood Clots In Menstrual Flow Normal: पीरियड्स में सब महिलाओं का ब्लड फ्लो अलग-अलग हो सकता है। किसी को हैवी फ्लो होता है, तो किसी को लाइट ब्लीडिंग (Light Bleeding) होती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सबके लिए नॉर्मल ब्लीडिंग के मायने अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए, किसी एक किस्म के फ्लो को नॉर्मल कहना सही नहीं है। बहरहाल, कई महिलाओं को तो पीरियड्स में रक्त के थक्के भी आते हैं। चूंकि, सामान्य तौर पर महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता है। इसलिए ऐसे में ज्यादातर महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर रहता है कि क्या पीरियड में ब्लड क्लॉटिंग होना सामान्य है या नहीं? आइए, Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं कि इसको लेकर कब चिंतित होना चाहिए?

पीरियड में ब्लड क्लॉटिंग नॉर्मल है या नहीं?- Is It Bad To Have Blood Clots In Period

when to worry about blood clots during period 1 (11)

पीरियड में थोड़े बहुत रक्त के थक्के आना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर किसी को बहुत ज्यादा ब्लड क्लॉट नजर आए, तो इसे लेकर लापरवाही नहीं न करें। इस बात की पुष्टि करते हुए डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "पीरियड के दौरान हैवी ब्लड क्लॉटिंग होती है और हर थक्का आकार में बड़ा है, तो इसे हल्के में न लें। साथ ही आप यह भी ध्यान रखें कि आप एक दिन में कितने पैड चेंज कर रही हैं। अगर आपको बार-बार या हर घंटे पैड चेंज करने की जरूरत महसूस हो रही है, तो सही संकेत नहीं है।" डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "अगर आपको 7 दिनों तक लगातार ब्लीडिंग हो रही है और हर बार ब्लड क्लॉट नजर आ रहा है, तो इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर से संपर्क करें।" Centers for Disease Control and Prevention | CDC (.gov) में प्रकाशित एक लेख से पता चलता है कि हैवी ब्लीडिंग होने पर ब्लड क्लॉट हो सकता है। इसमें थकान और सिरदर्द जैसे कई लक्षण नजर आ सकते हैं।

पीरियड में ब्लड क्लॉटिंग को लेकर कब जाएं डॉक्टर के पास?

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  • क्लॉट साइज देखेंः अगर आपको पीरियड में लगातार ब्लड क्लॉट आ रहा है, तो उसके साइज भी अंगूर जैसा बड़ा लग रहा है, तो उसे इग्नोर न करें। ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • हैवी ब्लीडिंग होनाः अगर ब्लड क्लॉटिंग के साथ-साथ हैवी ब्लीडिंग हो रही है और प्रत्येक दो घंटे के अंदर पैड बदलना पड़ रहा है, तो समझ जाएं कि यह सही संकेत नहीं है।
  • कई दिनों तक ब्लीडिंग होनाः आमतौर पर पीरियड 3 से 7 दिनों तक नॉर्मल माने जाते हैं। हालांकि, सबका पीरियड साइकिल अलग होता है और ब्लड फ्लो भी भिन्न रहता है। अगर किसी महिला को लगे कि उनका पीरियड 7 दिनों से अधिक चल रहा है, तो इसे हल्के में न लें।
  • पीरियड साइकिल में बदलावः अगर अचानक आप नोटिस करें कि आपका ब्लीडिंग फ्लो के साथ पीरियड साइकिल भी बदल गया है, तो यह भी चिंता का विषय है। अगर लगातार तीन महीनों तक ऐसा हो, तो बेहतर है कि आप डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवाएं।

निष्कर्ष

हर महिला को अपने पीरियड फ्लो को लेकर कॉन्शस रहना चाहिए। खासकर, तब जब पीरियड में ब्लड क्लॉट नजर आए। आमतौर ब्लड क्लॉट का साइज और फ्रिक्वेंसी यह तय करती है कि यह सही है या नहीं। अगर आपको लगे कि ब्लीडिंग के दौरान रक्त के भारी-भारी थक्के निकल रहे हैं और ऐसा कई दिनों तक हो रहा है, तो आप तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवा सकते हैं।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • पीरियड में ब्लड क्लॉट की चिंता कब करनी चाहिए?

    पीरियड में ब्लड क्लॉट की चिंता तब करनी चाहिए कि लगातार खून के थक्के निकल रहे हैं और ऐसा 7 दिनों तक लगातार हो रहा है। इसके साथ-साथ आपको थकान, कमजोरी और क्रैंपिंग महसूस हो, तो भी आप इसे हल्के में न लें।
  • क्या 10 दिन तक ब्लीडिंग होना नॉर्मल है?

    नहीं, 10 दिनों तक लगातार ब्लीडिंग होना नॉर्मल नहीं है। आमतौर पर से 2 से 7 दिनों तक रहे ब्लीडिंग को नॉर्मल कहा जा सकता है। अगर इससे ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग हो और लगातार कई महीनों तक ऐसा हो, तो बेहतर है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें।
  • लास्ट पीरियड के 2 हफ्ते बाद स्पॉटिंग क्यों होती है?

    आमतौर पर ऐसा किसी समस्या, हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। डॉक्टरों की मानें, तो एसटीआई या यूटीआई जैसे संक्रमण में ऐसी समस्या देखने को मिल सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Modified By : Meera Tagore
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