प्रेग्नेंसी में कब फटती है पानी की थैली? डॉ. नीरा सिंह से जानिए वॉटर ब्रेक होने के क्या हैं कारण

प्रेग्नेंसी के दौरान वॉटर ब्रेक होना सामान्य है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में वॉटर ब्रेक समय से पहले हो जाता है। आइए डॉक्टर नीरा से जानते हैं इसके कारण

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Nov 26, 2020Updated at: Nov 26, 2020
प्रेग्नेंसी में कब फटती है पानी की थैली? डॉ. नीरा सिंह से जानिए वॉटर ब्रेक होने के क्या हैं कारण
कई बार आपने प्रेग्नेंट महिला के बारे में आपने सुना होगा कि उसकी पानी की थैली फट (Water Break During Pregnancy) गई। ऐसा सुनकर आपके मन में सवाल जरूर आया होगा आखिर ये पानी की थैली फटना क्या (What is Water Break During Pregnancy) है? नाम से ही आपको लग रहा होगा कि पेट में कोई पानी की थैली होगी जो फट जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, गर्भ के अंदर भ्रूण एक झिल्ली के अंदर होता है, जिसके अंदर द्रव भरा होता है। इस थैली या झिल्ली को एमनियोटिक थैली कहा जाता है। ये थैली शिशु की गर्भ में रक्षा करती है। प्रेगनेंसी के अंतिम दिनों में शिशु जब पूरा विकसित हो जाता है, तो लेबर पेन (Labour Pain) शुरू होने से पहले गर्भवती महिलाओं को जांघों के बीच पानी की बौछार जैसी महसूस होती है। कुछ महिलाओं को ऐसा महसूस होने के बाद लेबर पेन शुरू हो जाता है, लेकिन सभी महिलाओ के साथ ऐसा हो ये जरूरी नहीं है। गाजियाबाद इंदिरापुरम की डॉक्टर बताती हैं कि पानी की थैली फटना लेबर पैन का संकेत हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में अन्य कारणों से भी पानी की थैली फट सकती है।
 
डॉक्टर नीरा कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के 28 से 37 सप्ताह के बीच अगर पानी की थैली फटती है, तो इसे Premature Rupture Of Membrane कहा जाता है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वहीं, अगर 37 सप्ताह के बाद पानी की थैली फटती है, तो यह लेबर पेन का संकेत (Sign of Laobor Pain) होता है। पानी की थैली फटने के करीब 24 घंटे के अंदर बच्चे का डिलीवर हो जाना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो गर्भवती महिला के शरीर में इंफेक्शन फैल सकता है।

पानी की थैली फटने पर क्या होता है? (What happens when water breaks during pregnancy?)

जब किसी महिला का गर्भावस्था के दौरान वॉटर ब्रेक होता है, तो उसे मेडिकल भाषा में झिल्ली का टूटना कहते हैं। डॉक्टर कहती हैं सामान्य स्थिति में यह डिलीवरी से 24 घंटे पहले होता है। वॉटर ब्रेक होने के बाद लेबर पेन, योनि से पानी निकलना और हल्की ब्लीडिंग होना सामान्य है। लेकिन कुछ असमान्य स्थिति पर वॉटर ब्रेक होने के बाद भी लेबर पेन शुरू नहीं होता है। ऐसी स्थिति पैदा होने पर डॉक्टर्स गर्भवती महिला को लेबर पेन होने के लिए दवा देते हैं। ताकि बच्चे और मां को इंफेक्शन के खतरे से बचाया जा सके।
 
 
डॉक्टर नीरा कहती हैं कि वॉटर ब्रेक होने के बाद गर्भाशय में सिकुड़न होने के कारण ऐमनियोटिक सैक पर दबाव पड़ता है। ऐमनियोटिक थैली का बाहरी आवरण कोरियॉन (जरायू) से बना होता है। वहीं, अंदरुनी हिस्सा ऐमनियॉन (उल्व) झिल्ली से। ऐसे में जब इस थैली पर प्रेशर पड़ता है, तो थैली फट जाती है। इस दौरान गर्भाशय में तीव्र संकुचन होने के कारण म्यूकस प्लग पर भी दबाव बनाता है। 

प्रेग्नेंसी में पानी की थैली फटने के कारण (Causes of Water Breaks During pregnancy) 

  • यूरीनल इंफेक्शन (Urinal Infection)
  • वैजाइनल इंफेक्शन (vaginal Infection)
  • बच्चेदानी का मुंहाना छोटा होना (बच्चेदानी का मुहाना कमजोर होना)
  • मल्टीपल प्रेग्नेंसी के कारण (Multipal Pregnancy)
  • बच्चा का वजन अधिक होना (heavy Weight Child)
  • बच्चे का सिर बड़ा होना 

जल्दी वॉटर ब्रेक होने के कारण लक्षण (Reason of Water Break During  pregnancy)

  • लेवल पैन शुरू
  • पेट में दर्द
  • ब्लीडिंग शुरू
  • डिस्टार्च होना

जल्दी वॉटर ब्रेक न होने के बचाव (Prevention of Water Break)

  • डॉक्टर नीरा बताती हैं कि अबतक कोई ऐसा इलाज नहीं है, जिससे वॉटर ब्रेक होने के खतरे को रोका जा सके। कई केसेस में गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं द्वारा धूम्रपान करना जल्दी वॉटर ब्रेक होने का कारण बन सकता है। ऐसे में कभी भी प्रेग्नेंसी के दौरान धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान अपने वैजाइनल डिस्चार्ज पर ध्यान रखें।
  • वॉटर ब्रेक महसूस होने पर तुरंत अस्पताल जाएं। 
  • अगर लेबर पेन शुरू नहीं हुआ है, तब भी डॉक्टर की निगरानी में रहने की कोशिश करें।
  •  गर्भावस्था के दौरान अपने खान-पान का ध्यान दें। अधिक आयरनयुक्त आहार का सेवन करें। 
  • प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही एक्सरसाइज करें।
  • गर्भावस्था में अपने शरीर को एक्टिव रखें लेकिन भारी काम करने से बचें


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