लेबर पेन में अरंडी तेल का इस्तेमाल क्यों हैं फायदेमंद, जानें इससे जुड़े खतरे और नुकसान भी

अरंडी के तेल के कई फायदे हैं, उन्हीं में से एक है लेबर पेन में इसका प्रयोग करना। आइए जानते हैं इसके बारे में।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Feb 06, 2020Updated at: Feb 06, 2020
लेबर पेन में अरंडी तेल का इस्तेमाल क्यों हैं फायदेमंद, जानें इससे जुड़े खतरे और नुकसान भी

सदियों से, लोग विभिन्न बीमारियों के लिए अरंडी के तेल का उपयोग करते आए हैं। ज्यादातर लोग इसे एक दर्द निवारक दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कई स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार में अरंडी के तेल की प्रभावशीलता को माना गया है। अरंडी का तेल साबुन, कोटिंग्स, और लुब्रिकेंट्स जैसे उत्पादों में एक आम सामग्री है। इसमें कई एलर्जेनिक प्रोटीन शामिल हैं, जिसमें रिकिन भी शामिल है जो कभी गभार खतरनाक और जहरीला भी हो सकता है। हालांकि, इन संभावित खतरनाक पदार्थों को हटाने के बाद, लोग औषधीय प्रयोजनों के लिए अरंडी के तेल का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अरंडी का तेल कब्ज में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसे लोग चेहरे और त्वचा पर लगाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि आरंडी का तेल गर्भवती महिलाओं में लेबर पेन के दौरान फायदेमंद है या नुकसानदेह?

लेबर पेन में अरंडी के तेल का इस्तेमाल

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के अनुसार, अरंडी का तेल गर्भाशय के संकुचन और जलन का कारण हो सकता है। हालांकि ये श्रम संकुचन प्रतीत हो सकते हैं, वे वास्तविक श्रम की तुलना में पाचन संकट का परिणाम अधिक हैं। जिन मामलों में प्रसव पीड़ा प्रेरित करना आवश्यक हो जाता है, वहां ये मदद कर सकता है। विशेष रूप से तब, जब किसी गर्भवती महिला ने अपनी गर्भावस्था की पूरी अवधि यानि 40 सप्ताह पूरी कर ली है लेकिन फिर भी प्रसव के कोई आसार नहीं नजर आ रहे हैं और न ही संकुचन महसूस हो रहा है। तो ऐसे हालात में अक्सर प्रसव प्रेरित करना ही एक सहारा रह जाता है, इस प्रक्रिया में कैस्टर ऑयल या आरंडी का तेल काफी उपयोगी माना जाता है।

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क्या कहता है शोध?

एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि अरंडी का तेल लेने और श्रम उत्प्रेरण के बीच एक संबंध है। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि अगर कोई महिला 40 सप्ताह की गर्भवती है, तो अरंडी का तेल 24 घंटों के भीतर श्रम को प्रेरित कर सकता है। शोधकर्ताओं ने 5 साल की अवधि में 40 वें और 41 वें सप्ताह की गर्भावस्था में महिलाओं का उपयोग करके अध्ययन किया। इस अध्ययन में 2000 से ज्यादा महिलाओं को इसमें शामिल किया गया और पाया गया कि 57.7% महिलाएं जो अरंडी का तेल लेती हैं, 24 घंटों के भीतर लेबर पेन में चली गईं। केवल 4.2% महिलाएं में इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इस अध्ययन के प्रमाण बताते हैं कि अरंडी का तेल श्रम को प्रेरित करने में मदद कर सकता है।2018 के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं के पहले बच्चे हुए हैं, उनमें अरंडी का तेल लगाना अधिक प्रभावी है। शोधकर्ताओं ने 81 गर्भवती महिलाओं के अपने नमूने से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं बताया।

लेबर पेन में अरंडी तेल इस्तेमाल करने के खतरे और दुष्प्रभाव

पिछले अध्ययनों में, शोधकर्ताओं ने भ्रूण को किसी भी ज्ञात जोखिम के बारे में नहीं बताया है। हालांकि, कैस्टर ऑयल के सेवन से मां को साइड इफेक्ट्स का अनुभव हो सकता है। कुछ संभावित दुष्प्रभावों में शामिल हो सकते हैं:

  • निर्जलीकरण (डिहाईड्रेशन)
  • दस्त
  • पेट में ऐंठन
  • गर्भाशय के गैर-श्रम-संबंधी संकुचन

संवेदनशील पेट या अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियों वाली महिलाओं को कैस्टर ऑयल लेने से बचना चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों की पहले सिजेरियन डिलीवरी हुई है, उन्हें गर्भवती होने पर कभी भी कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

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लेबर पेन में कब इस्तेमाल करें अरंडी का तेल?

कुछ महिलाएं प्रसव पूर्व लेबर पेन में जा सकती हैं, जबकि अन्य अपनी अपेक्षित नियत तारीख से बाद लेबर पेन में जा सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई है, उन्हें कभी भी लेबर पेन लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे गर्भाशय का टूटना हो सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स एंड द सोसाइटी फॉर मैटरनल फॉटल मेडिसिन की मानें, तो कुछ अन्य कारणों से एक डॉक्टर लेबर पेन को प्रेरित कर सकता है:

  • -प्लेसेंटा से जुड़ी परेशानियों में (Placental abruption)
  • -गर्भाशय में संक्रमण के दौरान।
  • -भ्रूण के चारों ओर एमनियोटिक द्रव की कमी के कारण।
  • -गर्भ में पानी के कमी के कारण।
  • -उच्च रक्तचाप, मधुमेह या किसी अन्य स्थिति की उपस्थिति जो मां या भ्रूण को खतरे में डाल सकती है।
  • -ऐसी स्थिति में जब डिलीवरी बेहद जरूरी हो।

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