Doctor Verified

ये 3 बीमारियां पहुंचाती हैं महिलाओं के गर्भाशय (बच्चेदानी) को नुकसान? डॉक्टर से जानें इनके लक्षण और कारण

Uterus Problems in Hindi: गर्भाशय महिलाओं का एक अहम अंग होता है। लेकिन कई बार महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Apr 06, 2022Updated at: Apr 06, 2022
ये 3 बीमारियां पहुंचाती हैं महिलाओं के गर्भाशय (बच्चेदानी) को नुकसान? डॉक्टर से जानें इनके लक्षण और कारण

What Diseases Affect the Uterus: गर्भाशय मूत्राशय और मलाशय के बीच स्थित होता है। गर्भाशय या गर्भ वह जगह है, जहां एक महिला के गर्भवती होने पर बच्चा बढ़ता है।  गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय बढ़ता है। लेकिन प्रसव के बाद गर्भाशय धीरे-धीरे अपने आकार में वापस आने लगता है। कई स्वास्थ्य स्थितियां गर्भाशय या गर्भ को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें से कुछ समस्याएं गंभीर तो कुछ सामान्य हो सकती हैं। आइए इस लेख में जानते हैं महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी किन-किन बीमारियों (What are Common Uterus Problems) का सामना करना पड़ता है।

गर्भाशय में होने वाली बीमारियां (What are Common Uterus Problems)

अल्टियस अस्पताल, एचबीआर की सलाहकार-स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर पूजा साहनी (Dr Pooja Sahni Consultant gynaecologist and laparoscopic surgeon Altius Hospital, HBR layout) बताती हैं कि गर्भधारण करने के लिए महिलाओं के गर्भाशय का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन कई बार महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस और प्रोलैप्स गर्भाशय को प्रभावित करने वाली सबसे आम स्थितियां हैं।

uterus

1. गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterus Endometriosis)

फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवारों में वृद्धि की स्थिति है। गर्भाशय छोटे से लेकर बड़ा हो सकता है। फाइब्रॉएड को कभी-कभी ट्यूमर कहा जाता है, लेकिन वे कैंसर नहीं होते हैं। दरअसल, फाइब्रॉएड ऊतकों पर हमला नहीं करता है, न ही शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है। इसलिए यह कैंसर से अलग होता है। 

हैवी ब्लीडिंग, अनियमित मासिक धर्म, खून की कमी, शारीरिक संबंध बनाने के दौरान दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेल्विक एरिया में दर्द और गर्भधारण करने में असमर्थता यानी इंफर्टिलिटी गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण (Uterus Endometriosis Symptoms) होते हैं। इसका पता आमतौर पर अल्ट्रासाउंड स्कैन द्वारा लगा जाता है। 

इसे भी पढ़ें - गर्भाशय (बच्चेदानी) को स्वस्थ रखने के लिए महिलाएं अपनाएं ये 6 तरीके, बढ़ेगी फर्टिलिटी

2. एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)

गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis Meaning in Hindi) कहा जाता है। एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग बनाने वाले ऊतक, गर्भाशय की गुहा के बाहर विकसित होने लगते हैं। ऊतक अंडाशय या मूत्राशय में बढ़ता है। दरअसल, जब ओवरी, बाउल और पेल्विस की लाइनिंग के ऊतकों पर एंडोमेट्रियल टिश्यू विकसित होने लगते हैं, तो एंडोमेट्रियोसिस की समस्या उत्पन्न होती है।

पीरियड्स के दौरान दर्द होना, पेल्विक एरिया में दर्द, डायरिया, कब्ज, पेशाब करने में दर्द होना और मल त्याग में मुश्किल एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण (Endometriosis Symptoms ) होते हैं। अल्ट्रासाउंड स्कैन के माध्यम से एंडोमेट्रियोसिस सिस्ट का पता चलता है। 

uterus

3. यूटेरो वैजाइनल प्रोलैप्स  (Utero Vaginal Prolapse)

डॉक्टर पूजा साहनी बताती हैं कि यूटेरो वैजाइनल प्रोलैप्स का मतलब है, गर्भाशय को अपनी जगह पर रखने वाली मांसपेशियां और लिगामेंट्स (Ligaments) कमजोर हो गए हैं। इसकी वजह से गर्भाशय नीचे की ओर खिसक जाता है या योनि से बाहर निकल जाता है। महिलाओं को यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। 

अचानक से पेशाब निकल आना, मूत्राशय को पूरी तरह से खानी करने में असमर्थता, योनि से कुछ बाहर आना, पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना आदि यूटेरो वैजाइनल प्रोलैप्स के लक्षण (Utero Vaginal Prolapse) हो सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें - गर्भाशय को स्वस्थ रखने के लिए महिलाएं जरूर करें ये 5 योगासन, फर्टिलिटी होगी मजबूत

गर्भधारण करने के लिए महिलाओं के गर्भाशय का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन ऊपर बताई गई कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो गर्भाशय को प्रभावित कर देती हैं। ऐसे में अगर आपको गर्भाशय में होने वाली बीमारी (Uterus Problems in Hindi) का कोई भी लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Disclaimer