हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के होते हैं 4 स्टेज, जानें क्यों गंभीर होता है आखिरी स्टेज

हाइपरटेंशन एक गंभीर बीमारी है, इस स्थिति में व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इसे 4 भागों में बांटा गया है। जानें हाइपरटेंशन के 4 स्टेजों के बारे में

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 10, 2022Updated at: May 10, 2022
हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के होते हैं 4 स्टेज, जानें क्यों गंभीर होता है आखिरी स्टेज

Stages in Hypertension: दुनियाभर में अधिकतर लोग हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) की समस्या का सामना कर रहे हैं। रक्तचाप वह बल या दबाव है, जो किसी व्यक्ति का रक्त उनकी रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर लगाता है। जब रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, तो इस स्थिति को हाइपरटेंशन कहा जाता है। हृदय को रक्त पंप करने के लिए जितनी अधिक मेहनत करनी पड़ती है, ब्लड प्रेशर उतना अधिक हो सकता है। रक्तचाप को सिस्टोलिक और डायस्टोलिक में मापा जाता है। सिस्टोलिक ऊपर आता है, जबकि डायस्टोलिक नीचे आता है। जब सिस्टोलिक दबाव 120 मिमी एचजी से अधिक, डायस्टोलिक दबाव 80 मिमी एचजी से अधिक होता है, तो इस स्थिति को हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन कहा जाता है। हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग, स्ट्रोक और मौत के जोखिम को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। 

इस महीने हम अपने Campaign ‘focus of the month’ - Beat The Pressure में ब्लड प्रेशर से जुड़ी जरूरी जानकारियां और टिप्स आपके साथ शेयर कर रहे हैं। आज के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं हाइपरटेंशन के स्टेज के बारे में। तो चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-

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1. सामान्य ब्लड प्रेशर (Normal Blood Pressure)

जब 120 मिमी एचजी से कम सिस्टोलिक और 80 मिमी एचजी से कम डायस्टोलिक दबाव होता है, तो इस स्थिति को सामान्य ब्लड प्रेशर माना जाता है। इस स्थिति में दवाइयों की जरूरत नहीं होती है. लेकिन रक्तचाप को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना जरूरी है। साथ ही वजन को भी कंट्रोल में रखना जरूरी है। 

2. सामान्य से अधिक ब्लड प्रेशर (Elevated Blood Pressure)

अगर आपका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 120-129 मिमी एचजी के बीच है, डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80 मिमी एचजी से कम है, तो इसका मतलब है आपको रक्तचाप उच्च हो रखा है। यह हाई ब्लड प्रेशर का शुरुआती चरण हो सकता है। इस स्थिति में भविष्य में उच्च रक्तचाप होने का खतरा अधिक बना रहता है। इस स्थिति में भी दवाईयों की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी होता है। इसके साथ ही अच्छी डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी होता है।

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3. स्टेज 1 हाइपरटेंशन (Stage 1 Hypertension)

जब सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 130 से 139 mmHg के बीच होता है और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 80 से 89 mmHg के बीच होता है, तो इस स्थिति को स्टेज 1 कहा जाता है। यह हाइपरटेंशन की स्थिति होती है। इसमें डॉक्टर आपका दवाईयों का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा बढ़े हुए रक्तचाप को कम करने के लिए स्वस्थ आहार, जीवनशैली का भी खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। दवाइयों, अच्छी डाइट और लाइफस्टाइल से हाइपरटेंशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है

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4. स्टेज 2  हाइपरटेंशन (Stage 2 Hypertension)

अगर सिस्टोलिक दबाव 140 mmHg से अधिक है और डायस्टोलिक दबाव 90 mmHg से अधिक है, तो यह गंभीर स्थिति होती है। इस स्थिति में व्यक्ति को हार्ट फेलियर, स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है। इस स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी होता है। दवाओं, जीवनशैली में सही बदलाव, आहार और नियमित व्यायाम से उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है।

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अगर आपको हृदय रोग, डायबिटीज या मधुमेह  है, तो आप में ब्लड प्रेशर हाई होने का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा जिन लोगों का पारिवारिक उच्च रक्तचाप इतिहास रहा हो, उनमें भी हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा अधिक बना रहता है। हाइपरटेंशन से बचने के लिए आपको समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर की जांच करवाते रहना चाहिए। साथ ही एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना चाहिए।

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