न्यूरो (तंत्रिकाओं) से जुड़ी गड़बड़ी के कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियां, जानें 'मोटर न्यूरॉन डिसीज' के लक्षण

स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking) को भी मोटर न्यूरॉन डिजीज थी, जिसमें कि उनके दिमाग के अलावा शरीर का कोई भी हिस्सा काम नहीं करता था। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: May 07, 2021Updated at: May 07, 2021
न्यूरो (तंत्रिकाओं) से जुड़ी गड़बड़ी के कारण हो सकती हैं ये 5 बीमारियां, जानें 'मोटर न्यूरॉन डिसीज' के लक्षण

हमारे शरीर का हर एक एक्शन हमारे मस्तिष्क द्वारा संचालित होता है।  मस्तिष्क और शरीर, एक दूसरे से न्यूरॉन, जिन्हें तंत्रिका कोशिका भी कहा जाता है उसके द्वारा जुड़े होते हैं, जो कि सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में मदद करते हैं। पर क्या होगा अगर आपके  तंत्रिका कोशिका बीमार पड़े जाएं या फिर इनमें कोई गड़बड़ी आ जाए? दरअसल, इसके चलते हम अपने शरीर और मस्तिष्क का संतुलन तक खो सकते हैं। आसान भाषा में तंत्रिका कोशिकाओं से जुड़ी गड़बड़ी को समझें, तो इसे मोटर न्यूरॉन डिजीज (Motor Neuron Disease) कहा जाएगा। इसे विस्तार से समझने के लिए हमने लखनऊ के अजंता हॉस्पिटल के न्यूरो फिजिशियन डॉ. अरुण कुमार से बात की। उन्होंने हमें मोटर न्यूरॉन डिजीज को आसान भाषा में समझने में मदद की। 

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मोटर न्यूरॉन क्या है -What is Motor Neuron

मोटर न्यूरॉन ( (Motor Neuron) शरीर के वो सेल्स हैं, जो कि हमारे मसल्स को सही से काम करने के लिए इलेक्ट्रिकल इंपल्स यानी कि विद्युत तरंग भेजते हैं। आसान भाषा में समझें, तो ये मोटर न्यूरॉन्स मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की कोशिकाएं हैं जो कि मस्तिष्क से मांसपेशियों को आदेश भेजने, बोलने, निगलने और सांस लेने की अनुमति देती हैं और इन कामों को पूरा भी करवाते हैं। वहीं,  रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) का हिस्सा होते हैं और पूरे शरीर में मांसपेशियों, ग्रंथियों और अंगों से जुड़ते हैं।  ये न्यूरॉन्स रीढ़ की हड्डी से हड्डियों और मासूम मांसपेशियों जैसे कि आपके पेट में  विद्युत तरंग को संचारित करते हैं और इस तरह ये सीधे हमारी मांसपेशियों के सभी मूवमेंट्स को नियंत्रित करते हैं। 

क्या है मोटर न्यूरॉन डिजीज (Motor Neuron Disease)

डॉ. अरुण कुमार बताते हैं कि मोटर न्यूरॉन डिजीज (Motor Neuron Disease) एक मेडिकल टर्म है, जो कि आसानी से लोगों को समझ नहीं आता। ऐसे में लोग इसे मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी के रूप में समझते हैं। दरअसल, मोटर न्यूरॉन डिजीज कई स्थितियों के कारण होता है, जो कि ब्रेन और स्पाइन के नर्व को प्रभावित करते हैं। इसके चलते धीमे-धीमे ये प्रभावित नर्व काम करना बंद कर देते हैं। हालांकि, ये स्थितियां आम नहीं और खास कर मोटर न्यूरॉन की बीमारियों कुछ ही लोगों को  कुछ खास कारणों (Causes of Motor Neuron Disease) से होती है।  जैसे कि

  • - सबसे पहले तो ये जेनेटिक हो सकता है, यानी कि अगर आपके परिवार में किसी को ये था, तो वो आपको भी हो सकता है। ये किसी जीन म्यूटेशन के कारण होता है।
  • - वायरस के संपर्क में आने से
  • -ऑटोइम्यून की गड़बड़ियों के चलते, जिसकी वजह से आपके न्यूरॉन्स को नुकसान हो या इसमें सूजन आ जाए।
  • -  उम्र बढ़ने के कारण या किसी वजह से मोटर न्यूरॉन्स में बदलाव आना या इनका बढ़ना। 

 मोटर न्यूरॉन डिजीज के लक्षण-Symptoms of Motor Neuron Disease

हालांकि, ये मोटर न्यूरॉन डिजीज किसी भी उम्र में हो सकती है, पर आमतौर पर ये 40 से 45 की उम्र के बाद परेशान कर सकता है। इसके कुछ शुरुआती लक्षणों की बात करें, तो ये पहले एक ही अंग को प्रभावित करना शुरू करता है, जिसमें ये अंगों के कामकाज को धीमा करने लगता है। इसके बाद आप इसके लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं, जैसे कि

  • -ये शरीर के मसल्स को कमजोर बना देता है।
  • - ये मोटर न्यूरॉन को ऊपर और नीचे, दोनों तरफ से प्रभावित करने लगते हैं, जिसके चलते मसल्स में खिंचाव आने लगता है। यह मांसपेशियों के नियंत्रण को तेजी से नुकसान का पहुंचाता है।
  • -इसके चलते शरीर में लकवा (Paralysis)जैसी स्थिति उतपन्न होने लगती है। 
  • -मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन, मरोड़
  • - हाथ और पैर में कमजोरी
  • - आवाज में बदलाव आना
  • -निगलने या चबाने में दिक्कत
  • -थकान
  • -वजन कम होना
  • -सोचने-समझने और फैसला लेने में परेशानी
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 मोटर न्यूरॉन डिजीज के प्रकार- Types of Motor Neuron Disease

 मोटर न्यूरॉन डिजीज के प्रकार असल में प्रभावित न्यूरॉन पर आधारित होते हैं। जैसे कि

1. प्रोग्रेसिव बलबर पैलिसी -Progressive Bulbar Palsy

इस मोटर न्यूरॉन डिजीज में मोटर नर्व के दोनों साइड यानी कि ऊपर और नीचे दोनों प्रभावित हो जाते हैं। इसके चलते आपके बोलने या निगलने वाले मसल्स कमजोर हो जाते हैं और आपको इन कामों में परेशानी होती है। दरअसल, इन कामों को करने वाले नर्व हमारे दिमाग के निचले हिस्से में होते हैं, जिन्हें बल्ब कहा जाता है और इनमें ये लकवा जैसे स्थिति पैदा हो जाते के चलते इसे प्रोग्रेसिव बलबर पैलिसी (Progressive Bulbar Palsy)कहते हैं।  इसके बाद ये हाथ और पैर के मसल्स को प्रभाविक करने लगते हैं।

2. एमीट्रोफिक लेट्रल स्क्लेरोसिस-Amytrophic Lateral Sclerosis 

ये सबसे आम   मोटर न्यूरॉन डिजीज है, जिसमें कि शरीर में ऑवर एक्टिव रिफेक्स होते हैं और हमारे मसल्स में खिंचाव आने लगता है या ये कमजोर हो जाते हैं। कुछ मरीजों में इसके चलते इमोशनल बदलाव भी होने लगते हैं। इसमें सबसे पहले हाथ-पैर के मसल्स में सूजन आ जाता है और बाद में काम करना बंद कर देते हैं। इसके चलते बोलने और सांस लेने में दिक्कत होती है।

3. प्राइमरी  लेट्रल स्क्लेरोसिस- Primary Lateral Sclerosis

इसनेम ऊपरी  मोटर न्यूरॉन प्रभावित होता है और इसका पता करना थोड़ा मुश्किल होता है। एक दुर्लभ, न्यूरोमस्कुलर विकार है जो केंद्रीय मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है और पैर की मांसपेशियों के दर्द रहित लेकिन लगातार बढ़ती हुआ कमजोरी और कठोरता लाता है। इस तरह की कमजोरी मस्तिष्क के बल्ब की मांसपेशियों के आधार पर हाथ-पैर और मांसपेशियों को प्रभावित करने के लिए बढ़ कर सकती है।

4. प्रोग्रेसिव मस्कुलर एट्रोपी- Progressive Muscular Atrophy

इसमें निचले मोटर न्यूरॉन प्रभावित होते हैं और ये बीमारी धीमे-धीमे बढ़ती है। इसके साथ लोग लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। इसनेम शरीर के अलग-अलग मसल्स में धीमे-धीमे कमजोरी आने लगती है और वो अपनी क्षमता खोने लगते हैं। इसमें शरीर अचानक से काम करना बंद कर देता है, वजन तेजी से घटने लगता है और मसल्स में बीच-बीच में झटके आने लगते हैं। 

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5. स्पाइनल मस्कुलर एट्रोपी- Spinal Muscular Atrophy

ये परेशानी ज्यादातर बच्चों में होती है, जिनमें कि मोटर न्यूरॉन काम करना बंद कर देते हैं। ये जेनेटिक होता है। इसमें SMA1 जेनेटिक कोडिंग में बदलाव आ जाता है।  ये हाथ, पैर और पेट की मासंपेशियों को प्रभावित करते हैं। 

मोटर न्यूरॉन डिजीज (Motor Neuron Disease) अभी तक कोई खास इलाज उपलब्ध नहीं है हालांकि लक्षणों के आधार पर न्यूरो स्पेशलिस्ट इसका इलाज करते हैं। जैसे कि मरीज को ऑक्यूपेशनल थेरेपी दी जाती है, ताकि उनमें थोड़ा सुधार आए। शरीर को लचीला और मजबूत बनाए रखने के लिए फिजियोथेरेपी और कुछ खास एक्सरसाइज कराई जाती है। तंत्रिका तंत्र को ठीक रखने के लिए कुछ दवाएं दी जाती हैं, ताकि बीमारी आगे न बढ़े। ऐसा ही कुछ शरीर व मांसपेशियों की अकड़न दूर करने करने के लिए भी किया जाता है। 

पर ध्यान देने वाली बात ये है कि ऐसे मरीज इमोशनली कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में इन्हें अपने लोगों, दोस्तों और समाज की जरूरत है। इस बीमारी से पीड़ित कुछ खास लोग जिन्हें बोलने, पढ़ने और लिखने में परेशानी होती है उनके लिए उनके परिवार वाले कुछ अलग एक्सपर्ट्स की मदद ले सकते हैं। पर सबसे ज्यादा जरूरी है कि ऐसे लोगों की विशेष तौर पर देखभाल की जाए। 

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