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रूबेला वायरस के डर से तुर्की ने लौटाया भारत का गेंहू, जानें क्या है यह बीमारी?

तुर्की ने भारत से भेजे गए गेंहू की खेप को यह कहते हुए वापस कर दिया है कि इसमें रूबेला वायरस का संक्रमण है, जानें इस बीमारी के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jun 03, 2022Updated at: Jun 03, 2022
रूबेला वायरस के डर से तुर्की ने लौटाया भारत का गेंहू, जानें क्या है यह बीमारी?

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण दुनियाभर में गेंहू का संकट पैदा हो गया है। जिसके बाद दुनियाभर के तमाम देशों की गेंहू की आपूर्ति भारत से हो रही है। लेकिन इन सबके बीच एक चुंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बढ़ती मंहगाई और गिरती करेंसी के बीच तुर्की में गेंहू संकट पैदा हुआ था जिसको लेकर भारत से गेंहू की खेप भेजी गयी थी। अब खबर यह आ रही है कि तुर्की ने भारत से भेजे गए गेंहू की खेप को यह कहकर वापस भेज दिया है कि गेंहू में रूबेला वायरस का संक्रमण है। जिसके बाद से दुनियाभर में इसकी चर्चा तेज हो गयी है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तुर्की ने फाइटोसैनिटरी की समस्या (Rubella Disease in Wheat in Hindi) का हवाला देते हुए भारत से भेजे गए 56,877 टन ड्यूरम गेहूं के जहाजों को 29 मई से ही वापस भेजना शुरू कर दिया है। तुर्की के अधिकारियों के बयान के मुताबिक गेंहू की जांच किये जाने पर इसमें रूबेला वायरस का पता चला है जिसके बाद तुर्की के कृषि और वानिकी मंत्रालय ने इसको वापस करने का फैसला लिया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह रूबेला वायरस क्या है? यह बीमारी इंसानों को कितना प्रभावित करती है? आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में सबकुछ।

क्या है रूबेला वायरस? (What is Rubella Virus?)

रूबेला एक तरह की संक्रामक बीमारी है जिसे जर्मन खसरा के नाम से भी जाना जाता है। रूबेला की बीमारी रूबेला वायरस के संक्रमण की वजह से होती है। इंसानों में रूबेला संक्रमण होने पर उन्हें बुखार, गले में खराश और चेहरे व स्किन पर रैशेज या दानें हो जाते हैं। इस बीमारी के लक्षण 3 से लेकर 5 दिनों तक बने रहते हैं। बाबू ईश्वर शरण सिंह हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ समीर के मुताबिक रूबेला का संक्रमण होने पर दिखने वाले लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। कुछ मरीजों में रूबेला वायरस का संक्रमण होने पर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने पर भी यह बीमारी दूसरे लोगों में पहुंच सकती है। रूबेला की बीमारी इतनी खतरनाक है कि यह गर्भवती महिला को होने पर गर्भ में पल रहे बच्चे को भी संक्रमित करती है और इससे पैदा होने वाले बच्चे में कई जन्म दोष हो सकते हैं। 

Rubella Disease in Wheat in Hindi

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रूबेला के लक्षण (Rubella Symptoms in Hindi)

रूबेला या जर्मन खसरा की बीमारी में दिखने वाले लक्षण आमतौर पर हल्के लक्षण होते हैं लेकिन ज्यादा लंबे समय तक संक्रमण के बने रहने पर मरीज की स्थिति गंभीर भी हो सकती है। यह बीमारी शिशुओं से लेकर किसी भी उम्र के लोगों में हो सकती है। आमतौर पर रूबेला का संक्रमण होने पर बुखार, गले में खराश और सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन जब यह संक्रमण बढ़ने लगता है तो इसके लक्षण भी गंभीर हो जाते हैं। रूबेला के संक्रमण में दिखने वाले प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं। 

  • लगातार बुखार
  • शरीर और चेहरे पर दानें
  • चेहरे पर लाल और गुलाबी रंग के चकत्ते
  • गले में खराश की समस्या
  • कफ और नाक बहने की समस्या
  • जोड़ों और हड्डियों में दर्द
  • आंखों में संक्रमण और लालिमा

कैसे फैलता है रूबेला वायरस? (Rubella Virus Causes in Hindi)

रूबेला, कंठमाला या जर्मन खसरा की समस्या ज्यादातर मामलों में संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उस संक्रमित व्यक्ति के बलगम या ड्रापलेट्स से संपर्क में आने से यह संक्रमण और तेजी से फैल सकता है।  गर्भवती महिला में यह संक्रमण होने पर गर्भ में पल रहे बच्चे में भी इस संक्रमण का खतरा रहता है। इसके अलावा कान में संक्रमण होने पर, मस्तिष्क की सूजन होने पर और जन्म से हृदय या अन्य अंगों से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित होने वाले व्यक्तियों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें इस संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। 

रूबेला की बीमारी का इलाज और बचाव (Rubella Disease Treatment And Prevention in Hindi)

रूबेला की बीमारी के इलाज के लिए रूबेला का टीका (Rubella Vaccine) सबसे ज्यादा प्रभावी सुरक्षा देता है। रूबेला का टीका मोनोवैलेंट फॉर्मूलेशन के आधार पर बनाया गया है जो कि इस बीमारी को रोकने के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। रूबेला के टीके को एमएमआर का टीका भी कहा जाता है। रूबेला का टीका बच्चों को 12 महीने से लेकर 15 महीने के बीच में दिया जाता है और उसके बाद 4 से 6 साल के बीच इसका शॉट दिया जाता है।  रूबेला वायरस संक्रमण से बचाव के लिए संक्रमित लोगों से दूरी बनाना चाहिए और बचपन में ही रूबेला का टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। 

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