बच्चों को सिखाएं ये 5 बातें, मिलेगी सबकी तारीफ

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 15, 2018
Quick Bites

  • अक्सर बच्चे गलत हरकतों से रिश्तेदारों के सामने आपको करते हैं शर्मिंदा।
  • गलत आदतों का कारण आपकी परवरिश होती है।
  • बच्चों को दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाएं।

अक्सर बच्चे रिश्तेदारों दोस्तों के सामने या कहीं बाहर जाने पर कुछ ऐसी हरकतें कर जाते हैं, जिनकी वजह से आपको शर्मिन्दा होना पड़ता है जैसे किसी से लड़ाई-झगड़ा करना, मारना, सामान छीनना, जिद करना आदि। बच्चों में इस तरह की आदतों का कारण आपकी परवरिश होती है। अगर आप शुरुआत से ही बच्चों की परवरिश में कुछ खास बातों का खयाल रखें, तो आपके बच्चे कभी भी आपको बाहर या घर में किसी के सामने शर्मिन्दा नहीं करेंगे, उल्टा लोग आपके बच्चों की तारीफ करेंगे।

अच्छी है शेयरिंग की आदत

भाई-बहनों या दोस्तों के साथ चीज़ें शेयर करने की आदत बच्चे में शुरू से ही विकसित करनी चाहिए। इससे न केवल रिश्तों में मज़बूती आती है बल्कि वह दूसरों की भावनाओं और ज़रूरतों का खयाल रखना भी सीखता है। अपने रोज़मर्रा के व्यवहार से उसे यह एहसास दिलाना ज़रूरी है कि कोई भी वस्तु या सुविधा केवल तुम्हारे लिए नहीं है। भाई-बहनों या दोस्तों को भी खिलौने से खेलने की इच्छा होती है, इसलिए तुम अपने साथ उन्हें भी खेलने का मौका दो। अगर परिवार में एक ही बच्चा है तो कभी-कभी आप जानबूझकर उससे चॉकलेट का छोटा टुकड़ा मांगें, कभी उसके  साथ कोई इंडोर गेम खेलें। इससे उसे दूसरों की अहमियत का एहसास होगा और वह शेयरिंग भी सीख जाएगा।

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सिखाएं इंतज़ार करना

आजकल अधिकतर परिवारों में इकलौते बच्चे होते हैं और उन्हें बिन मांगे ही हर सुविधा अपने आप मिल जाती है। इसलिए उनमें ज़रा भी धैर्य नहीं होता। अगर आपके घर में भी एक ही बच्चा है तो जब भी मौका मिले, उसे अपने साथ पार्क, शॉपिंग मॉल या मार्केट जैसी जगहों पर ले जाएं। वहां उसे यह देखने का अवसर मिलेगा कि हर कार्य के लिए सभी को अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है। हो सकता है, इससे उसे थोड़ी परेशानी हो पर बच्चे में यह आदत विकसित करना बहुत ज़रूरी है। $खासतौर पर पार्क जैसी जगहों पर कुछ बच्चे राइड्स से उतरने को तैयार नहीं होते, ऐसे में उसे यह समझाना बहुत ज़रूरी है कि तुम्हारे दोस्त इंतज़ार कर रहे हैं, इसलिए अब उन्हें भी खेलने दो। 

सहनशीलता का सबक

सही भावनात्मक विकास के लिए बच्चे को सहनशीलता का सबक सिखाना भी बहुत ज़रूरी है। इससे उसमें मुश्किल स्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। उसे यह एहसास दिलाना बहुत ज़रूरी है कि कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता। इसलिए अगर किसी गलती पर बड़े तुम्हें डांटते हैं तो उनसे नाराज़ होने के बजाय अपनी गलतियों को सहजता से स्वीकारते हुए, उन्हें सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। छोटे-छोटे घरेलू कार्यों में बच्चों से मदद लेनी चाहिए। इससे उनमें जैसी आदतों का विकास होगा।

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सहज हो संवाद

आजकल माता-पिता के पास बच्चों के साथ बातचीत के लिए समय नहीं होता। उनके मन में ढेर सारी बातें होती हैं, जिन्हें वे पेरेट्स को बताना चाहते हैं। इसलिए उसके साथ तनावमुक्त वातावरण में बातचीत के लिए थोड़ा समय ज़रूर निकालें। इस तरह अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो निश्चित रूप से आपका बच्चा संवेदनशील और समझदार बनेगा।

बच्चों के साथ वक्त बिताएं

जब घर में माता और पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं तो वो अपने बच्चों के साथ वक्त नहीं बिता पाते हैं। ये सच है कि वो अपने बच्चों को मेड और सभी जरूरी चीजें उपलब्ध कराते हैं लेकिन माता पिता को ये समझना चाहिए कि बच्चों को आपकी जरूरत है। इसलिए अगर आप वर्किंग है तब भी अपने बच्चों के साथ दिन में कम से कम 1 घंटा जरूर बिताएं। इस एक घंटे में अपने बच्चे से पूछे कि उसने दिनभर क्या किया या वो क्या सोच रहा है। इसलिए आपके और आपके बच्चों के बीच गैप कम रहेगा और बच्चा अपने दिल की आपको बता पाएगा।

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