सूंघने की शक्ति खत्म होना (loss of smell) कोरोना के सबसे सटीक लक्षणों में से एक : शोध

कोरोना को लेकर हाल ही में दो शोध आए हैं, एक में कोरोना के सबसे सटीक लक्षण के बारे में बताया है, दूसरे में रिकवर होने वालों की डेथ रेट का खुलासा है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Jan 22, 2021Updated at: Jan 22, 2021
सूंघने की शक्ति खत्म होना (loss of smell) कोरोना के सबसे सटीक लक्षणों में से एक : शोध

भारत में कोरोना वायरस की रफ्तार जहां धीमी पड़ रही है, वहीं कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी की मानें, तो ब्रिटेन से आए कोरोना के नए स्ट्रेन से भारत में संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 145 पहुंच गई है। कल इस स्ट्रेन के 4 नए मामले मिले हैं। इस बीच शोधकर्ताओं ने कोरोना के सबसे सटीक लक्षण का पता लगा लिया है। जर्नल केमिकल्स सेन्सस (Journal Chemical Senses) में प्रकाशित दो नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के निष्कर्ष बताते हैं कि COVID-19 रोगियों में यूं तो कई सारे और बदलते हुए कोरोना के लक्षण (corona symptoms) देखे गए हैं, पर सूंघने की शक्ति खत्म होना  (loss of smell) लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों में से एक है।  

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सूंघने की शक्ति खत्म होना कोरोना का सबसे सटीक लक्षण

जर्नल केमिकल्स सेन्सस (Journal Chemical Senses) में प्रकाशित इस नए शोध के अनुसार, सूंघने की शक्ति खत्म होना  (loss of smell) सांस की बीमारियों के लक्षणों वाले रोगियों में COVID -19 का सबसे अच्छा पूर्वानुमानक हो सकता है। शोध में कुल 23 देशों के 4,500 से अधिक COVID-19 रोगियों का अध्ययन किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं ने लोगों से प्रश्नावली का जवाब मांगा। अध्ययन में पाया गया कि सूंघने की शक्ति खत्म होना 0-100 के पैमाने पर 79.7 था, जो कोरोना के कारण होने वाले एक बड़े संवेदी नुकसान को दर्शाता है।

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8 में से हर 1 व्यक्ति की कोरोना से रिवर होने के 140 दिनों के भीतर हो रही है मृत्यु 

लीसेस्टर विश्वविद्यालय और नेशनल स्टैटिस्टिक्स (University of Leicester and the Office for National Statistics) विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में किए गए एक और अध्ययन में पाया गया कि डिस्चार्ज किए गए कोरोना रोगियों में से 29.4% ने फिर से स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को विकसित किया और, जिसमें से 12.3% पीड़ितों की मृत्यु  हो गई। अध्ययन के लेखकों में से एक, प्रोफेसर कमलेश खुंटी की मानें, तो, " जो लोग कोरोना से रिवर हो कर घर जा रहे हैं, उन पर कोरोना का दीर्घकालिक प्रभाव रह जाता है, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो जा रही है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को लंबे समय कर कोविड-19 की तैयारियों के बारे में रणनीति बनाने और अधिक कुशल होने की आवश्यकता है। बता दें कि इन अध्ययन में 47,780 डिस्चार्ज रोगियों का अवलोकन किया गया है। हालांकि इस विषय पर शोधकर्ताओं को अभी और शोध करने की जरूरत है। 

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लोगों के लिए प्रभावी है कोरोना का टीका: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन 

इधर भारत में अब तक 9 लाख 99 हजार से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। पर बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके भीतर कोरोना वैक्सीन को लेकर कई सवाल हैं। इसे देखते हुए केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन सामने आए हैं और टीके के सुरक्षित होने को लेकर लोगों को आश्वासन दिया है। केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने अपने बयान में कहा है कि कोविड-19 टीका लगवाने से लोग संक्रमण से अपना बचाव कर सकेंगे और कुछ समय में यह महामारी जड़ से खत्म हो जाएगी। 

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बता दें कि कोरोना टीका लगवाने को लेकर सरकार लगातार लोगों को जागरूक बना रही है। कल केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने एक पोस्टर भी जारी किया है जो लोगों के बीच टीका लगवाने से संबंधित शंकाओं को दूर करेगा। इसके लिए उन्होंने आईईसी के पोस्टर जारी की है। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने टीकों से संबंधित सुरक्षा और प्रभावकारिता पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''यह विडंबना है कि एक ओर तो दूसरे देश हमसे टीके मांग रहे हैं वहीं, दूसरी ओर हमारे देश में एक ऐसा वर्ग है कि जो अपने संकीर्ण राजनीतिक फायदों के चलते इन टीकों के बारे में गलत जानकारी फैलाकर रहे हैं। इन लोगों पर भरोसा न करें। टीका सेफ है और आप इसे लगवा सकते हैं।''

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