ब्रीदिंग एक्सरसाइज की मदद से दिमागी अधेड़बुन होगी शांत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 13, 2014
Quick Bites

  • रोजमर्रा के कामों के साथ भी कर सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज।
  • बहुत अधिक तनाव के क्षणों में ब्रीदिंग लेवल बहुत बढ़ जाता है।  
  • हमे मुंह से नहीं बल्की हमेशा नाक से ही सांस लेनी चाहिए।
  • चलते हुए भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास कर सकते हैं।

रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम कई प्रकार के तनावों से गुजरते हैं। और सोते-जागते, खाते-पीते हर वक्त दिमाग में कोई न कोई परेशानी और उधेड़बुन चलती ही रहती है। जिसके चलते सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, कमर का दर्द, मोटापा, थकान और ऐसी ही अनेक परेशानियों हमें घेर लेती हैं। सांस हमारे जीवन का श्रोत होती है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सांसों का हमारे जीवन की वैसा ही महत्व है जैसा किसी गाडी में इंधन का ! इंधन खतम तो गाडी बंद ..वैसे ही सांसें बंद तो जीवन की गाडी भी बंद। ऐसे में ब्रीदिंग एक्सरसाइज की मदद से दिमागी अधेड़बुन और अन्य समस्याओं से झुटकारा पाया जा सकता है।  

 

जब हम सांस अंदर लेते हैं तो इसके साथ आक्सीजन रक्त के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं को पोषण देती है। हजारों साल पहले से सांसों को लेने और छोड़ने का महत्व रहा है जिसे आचार्यों ने प्राणयाम के अभ्यास के रूप में पेश कियाI केवल गहरी सांसों को लेने और छोड़ने से ही हमें कई लाभ प्राप्त होते हैं। तो सोचिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज का कितना लाभ होगा।

 

 

Breathing Exercises

 

 

 

बहुत अधिक तनाव के क्षणों में ब्रीदिंग लेवल बहुत बढ़ जाता है, जिससे मसल्स टेंशन, एंग्जाइटी, सिर में तेज दर्द आदि की शिकायत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में अगर कुछ आसान डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जाएं, तो शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है और वे शांत होते हैं।

 

सांस लेने के दो रास्ते होते हैं, एक सही दूसरा गलत। नाक से सांस लेना सही रास्ता है लेकिन मुंह से सांस लेना गलत है। हमेशा नाक से ही सांस लेनी चाहिए क्योंकि नाक के अन्दर छोटे-छोटे बाल होते हैं। जो सांस लेने पर हवा में मिली धूल को बाहर ही रोक लेते हैं। मुंह से सांस कभी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सांस के साथ धूल और हानिकारक कीटाणु अन्दर चले जाते हैं।

 

यदि आपने गहरी सांस लेने के लाभ ठीक से समझ लिये हैं तो आपके लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास करना भी बहुत सरल होगा क्योंकि आप इसका प्रयास पूरे मन से करेंगे। इसके लिए सबसे पहले आपको कुछ समय तक चैतन्य होकर सजगता पूर्वक अपनी आदत को सुधारते रहना होगा, जिससे आपकी स्वांस खूब गहरी हो जाती है और आपका सीना भी मजबूत हो जाता है। जिसके बाद बहुत जल्द ही आप इसके लाभ ले सकते हैं।


1- बिस्तर छोड़ने से पहले करीब दस मिनट तक खूब गीरे सांस भरें और छोड़ें। सांस लेने और छोड़ने में बराबर समय लगायें। प्रारम्भ में यह कुछ कठिन प्रतीत होगा किन्तु शीघ्र ही आप यह बहुत आसानी से कर पायेंगे।

2- आप दिन भर में कहीं भी पैदल चल कर जाते हैं तो आप तब भी साथ में कमाल की ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास कर सकते हैं जिससे आपकी गहरी सांस लेने की आदत भी पड जायेगी और व्यायाम भी हो जाता है। इसके लिए आप यह गिनें की कितने कदम चलने में आप सांस को अन्दर भर सकते हैं। माना की यह ४ कदम है। फिर आप यह भी गिनें की कितने कदम चलने पर आप सांस छोड़ सकते हैं, चलिए माना की 6 कदमI इस तरह से 4 कदम चलने पर स्वांस को पूरा गहरा भरना तथा 6 कदम चलने पर पूरा छोड़ देने के इस क्रम को निरंतर बनाए रखें।

3- आमतौर पर आप कितने सेकंड में सांस भरते तथा छोड़ते हैं इसे एक नोटबुक में नोट कर लें और रोज तरीख डालकर इस संख्या को रिकॉर्ड करते रहें।  बहुत ही जल्द आप देखेगें की यह संख्या बढ़ती जा रही है।

 

 

 

Breathing Exercises

 

 

 

ब्रीदिंग एक्सरसाइज के अन्य लाभ

यदि आप तनाव महसूस कर रहे हों या दिमाग में कोई ना कोई उधेड़बुन चलती रहती है तो ब्रीदिंग योग व ध्यान की मदद से आप इससे निजात पा सकते हैं।     

गहरी सांस लेने और छोडने से आपके श्वसन संस्थान पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इससे फेफड़ों की मांसपेशीयां मजबूत होती है। यदि आप जंकफूड खाने और अस्तव्यस्त दिनचर्या के कारण उत्पन्न थकान से परेशान हों तो ब्रीदिंग एक्सरसाइज आपके लिए एक सरल उपाय है।

 

वर्तमान खान-पान में आयी समस्याएं शरीर में कई प्रकार के टॉक्सिंस पैदा करती हैं, जबकि ब्रीदिंग एक्सरसाइज से शरीर को प्राप्त शुद्ध आक्सीजन इन टाक्सिंस को डी-टॉक्सिफाई कर देती हैं।

 

ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से आप हायपरटेंशन, थकान, सिरदर्द, घबराहट, नींद न आने जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

 

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