ये हैं स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी 10 बीमारियां, डॉक्टर से जानें इनसे बचाव के उपाय

बचपन से लेकर बुढ़ापे तक, आपको स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी  इन 10 बीमारियों के बारे में जरूर जानना चाहिए। साथ ही जानें ये एक्सपर्ट टिप्स। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Sep 10, 2021Updated at: Sep 10, 2021
ये हैं स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी 10 बीमारियां, डॉक्टर से जानें इनसे बचाव के उपाय

स्केलेटल सिस्टम की बीमारी (skeletal system diseases in hindi) किसी को भी हो सकती है और ये हर उम्र में अलग होती है। स्केलेटल सिस्टम यानी कि हमारी हड्डियों का ढांचा। हड्डियां हमारे शरीर में कई जरूरी भूमिकाएं निभाती हैं जैसे कि शरीर को एक संरचना देना, अंगों और मांसपेशियों की रक्षा करना। लेकिन कई बार जन्म के साथ या उम्र बढ़ने पर कुछ पोषक तत्वों की कमी या फिर स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां कुछ बीमारियों का कारण बन जाती हैं। स्केलेटल सिस्टम की बीमारी कई प्रकार की होती हैं और ये बच्चे, वयस्कों और बूढ़े लोगों को अलग तरह से प्रभावित करती हैं। इसी बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने डॉ. कौशल कांत मिश्रा (Dr. Kaushal Kant Mishra), एसोसिएट डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला, नई दिल्ली से बात की। डॉ. मिश्रा ने हमें 10 बीमारियों के बारे में बताया और साथ ही इन बीमारियों का इलाज और बचाव के कुछ टिप्स भी शेयर किए। 

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image credit: Congenital Hand and Arm Differences

स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी 10 बीमारियां-Skeletal system diseases

1. बच्चों में जन्मजात विकृति (Congenital deformity)

बच्चों में  जन्मजात विकृति में उनके पैर टेढ़े हो सकते हैं या फिर उनके उंगलियों के नंबर ज्यादा या कम हो सकते हैं। इसके अलावा बच्चों में कूल्हे की विकृति (hip deformity) हो सकती है। इसके अलावा  जन्मजात विकृति की वजह से बच्चे के पैर बड़े या छोटे हो सकते हैं और बड़े होने पर उनके पीठ में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है कि बच्चे के पैदा होते ही हम इन तमाम चीजों पर ध्यान दें। कई बार पैर का टेढ़ा होना और उंगलियों का कम होना तो जल्दी पता चल जाता है पर कूल्हे की विकृति जल्दी पता नहीं हो पाती है पर बच्चा जब चलता है तो, तब इस बीमारी का पता चलता है। चिंताजनक बात ये है कि ये जन्मजात विकृति कभी भी दवाइयों से ठीक नहीं हो पाती और इसके लिए सर्जरी और प्लास्टर आदि की मदद ली जाती है। ये इलाज बच्चे के बड़े होने तक यानी कि 18 वर्ष  की आयु तक चलता रहता है।

2. रिकेट्स रोग (Rickets)

रिकेट्स में बच्चों की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ये इतनी कमजोर हो जाती हैं कि पैर बो शेप्ड (bow legs) के हो जाते हैं। ये विटामिन डी की कमी और कैल्शियम की कमी के कारण होता है। इसके लिए ट्रीटमेंट में बच्चों को विटामिन डी देते हैं और सूरज की रोशनी में खेलने के लिए कहते हैं। इसमें आपको अपने बच्चों को दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए।

3. बच्चों की कोहनी का खींच जाना (pulled elbow)

ये समस्या सबसे ज्यादा तब होती है जब बच्चा चलने लगता है तो लोग उसे हाथ से पकड़ कर खींचने लगते हैं या गलत तरीके से उठा लेते हैं, जिससे बच्चों में इंजरी हो जाती है। जब ये इंजरी बच्चों की कोहनी में होती है तो इसे पुल्ड एल्बो (pulled elbow) कहते हैं। इसमें कोहनी के ज्वाइंट्स खिसक जाते हैं और वहां इंजरी हो जाती है। ऐसे में आप पाएंगे कि बच्चे के हाथ को खिंचते ही वो रोने लगता है, जिसे आप पुल्ड एल्बो के लक्षण भी समझ सकते हैं। ऐसे में आपको अपने बच्चे को किसी हड्डियों के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए जो कि बच्चे के हाथों को स्ट्रेज करेंगे और ये ठीक हो जाएगा। अगर ये बार-बार हो तो, परेशान ना हो पर डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही आप इसे घर में भी कर सकते हैं। जैसे कि

-बच्चे के हाथ को 90 डिग्री की एंगल पर घुमाएं। यानी कि पहले हाथ को अंदर की तरफ ले जाएं और फिर उसे बाहर की तरह लें।

4. बड़े बच्चों में जुवेनाइल अर्थराइटिस (juvenile arthritis)

जुवेनाइल अर्थराइटिस अक्सर थोड़े बड़े बच्चों में होता है जिसमें कि उनकी जोड़ों में दर्द रहता है। हड्डियों में सूजन रहती है। ये कुछ ही बच्चों में होती है जिसमें कि बच्चों में दवाइयों के द्वारा इसका इलाज किया जाता है। अगर किसी बच्चे में एक साल से ज्यादा समय तक ज्वाइंट पेन रहता है तो, इसमें लंबे समय तक इलाज की जरूरत हो सकती है और कुछ मामलों में डॉक्टर सर्जरी को कह सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। 

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5.  महिलाओं में रूमेटाइड अर्थराइटिस (rheumatoid arthritis in young females)

18 साल से ज्यादा उम्र वाले वयस्कों में रूमेटाइड अर्थराइटिस की बीमारी होती है। हालांकि ये महिलाओं में ज्यादा होती हैं खास कर कि 20 से 40 साल तक की महिलाओं में। इस उम्र की महिलाओं में अगर जोड़ों में दर्द, उंगलियों में दर्द या फिर शरीर के अलग-अलग ज्वाइंट्स में दर्द  ज्यादा रहता है तो, ये रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण हो सकता है। इसके अलावा इस उम्र में वायरल अर्थराइटिस और यूरिक एसिड बढ़ने के कारण अर्थराइटिस भी हो सकता है। इसका इलाज लंबे समय तक चलता है और लगातार चलता है। इसमें डॉक्टर के अंदर इलाज में रहना जरूरी है नहीं तो ये समस्या बढ़ सकती है और घुटने और कंधे के ज्वाइंट्स खराब हो सकते हैं।

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image credit: Keck Medicine of USC

6. पुरुषों में एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस (ankylosing spondylitis in young males)

पुरुषों में खास कर कि यंग आदमियों में एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस की शिकायत ज्यादा होती है। खास कर कि 18 साल से लेकर 40 तक के पुरुषों में ये परेशानी ज्यादा होती है। इसमें पीठ में दर्द रहता है। शरीर में अकड़न बहुत ज्यादा होती है। इसमें मौसम के बदलाव के साथ क्रोनिक पेन हो सकता है। इसमें भी दवाइयों से इलाज किया जा सकता है। कुछ स्थितियों में सर्जरी की जाती है।

7. महिलाओं में ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia)

ऑस्टियोमलेशिया में विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसमें जल्दी जल्दी थकान होती है, शरीर में दर्द रहता है, हड्डियों में दर्द रहता है और ये बार-बार होता है। इसमें आप आराम करेंगी तो ये ठीक हो जाएगा पर फिर ये वापिस आ जाएगा। ऑस्टियोमलेशिया में लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर विटामिन डी और कैल्शियम देता है। 

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8. 60 के बाद ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)

महिलाओं में मेनोपॉज के बाद और पुरुषों में 60 के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसमें हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है जिससे बॉन मास कम हो जाता और हड्डियों में छेद होने लगता है। होता ये है कि हड्डियों का कैल्शिय शरीर से बाहर निकलने लगता है जिसका सबसे बड़ा कारण है हार्मोन डिसबैलेंस। इसमें शारीरिक रूप से एक्टिव रहना चाहिए, कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन सी से भरपूर फूड्स का सेवन करें। कई बार इसमें पैराथाइरॉइड हार्मोन इंजेक्शन दिया जाता है। 

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image credit:freepik

9. ऑस्टियोआर्थराइटिस  (osteoarthritis) 

ऑस्टियोआर्थराइटिस बुढ़ापे का गठिया को कहा जाता है। इसमें ज्वाइंट्स खराब होने लगते हैं। इससे आपको बचना चाहिए। इसमें अगर आपके ज्वाइंट्स पूरी तरह से खराब हो जाते हैं तो नी रिप्लेसमेंट करवाया जाता है। पर  रिप्लेसमेंट से पहले आप इसे दवाइयों की मदद से ठीक कर सकते हैं। इसलिए इससे बचाव के लिए 

  • -फिजिकल एक्टिविटी
  • -साइकिंग 
  • -वॉकिंग आदि करें।

10. ट्यूमर और कैंसर 

आखिरी में स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी बीमारियों में ट्यूमर और कैंसर आदि शामिल हैं। इसमें कुछ प्राइमेरी ट्यूमर हो सकते हैं तो, कभी सेकेंडरी ट्यूमर भी हो सकता है। इसमें कैंसर के प्रकार और स्थान के अनुसार इलाज किया जाता है।

तो, ये थे स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी 10 बीमारियां और उनसे बचाव के उपाय। तो अगर आप हमेशा स्वस्थ रहना चाहते हैं तो अपनी हड्डियों का ध्यान रखें। कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन डी लें। साथ शारीरिक गतिविधों को करते रहें। 

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