मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे खास अनुभव होता है, जैसे ही घर में नन्हे मेहमान के आने की खबर मिलती है सभी खुश हो जाते हैं लेकिन इस खूबसूरत सफर के साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। इन्हीं में से एक है प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी गंभीर रूप ले सकती है। प्रेग्नेंसी में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर केवल एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। इस लेख में आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन से जानिए, प्रेग्नेंसी में हाई बीपी मां और शिशु के लिए कितना खतरनाक हो सकता है?
प्रेग्नेंसी में हाई BP कितना खतरनाक हो सकता है?
डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान जब किसी महिला का ब्लड प्रेशर 130/90 mmHg या उससे ज्यादा हो जाता है, तो इसे हाई बीपी माना जाता है। प्रेग्नेंसी में हाई बीपी का असर मां के कई अंगों पर पड़ सकता है।
- पहला बड़ा खतरा है प्री-एक्लेम्पसिया, जिसमें तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, हाथ-पैरों और चेहरे पर सूजन तथा पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है। यदि स्थिति गंभीर हो जाए तो दौरे पड़ने का खतरा रहता है।
- दूसरा जोखिम है लगातार हाई बीपी मस्तिष्क और दिल की ब्लड वैसेल्स पर दबाव डालता है, जिससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
- तीसरा खतरा है लिवर और किडनी डैमेज। हाई बीपी इन जरूरी अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे मां की सेहत पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
- कई मामलों में मां की जान बचाने के लिए समय से पहले डिलीवरी करानी पड़ती है।
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शिशु के लिए खतरे
हाई बीपी का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी गंभीर रूप से पड़ता है। जब प्लेसेंटा तक पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो शिशु के विकास में बाधा आ सकती है। समय से पहले जन्म यानी प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा भी बढ़ जाता है। समय से पहले जन्मे शिशुओं में सांस लेने में कठिनाई, इंफेक्शन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

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बचाव के उपाय
प्रेग्नेंसी में हाई बीपी को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप सबसे जरूरी कदम है। हर विजिट पर ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है। बैलेंस डाइट लें, नमक का सेवन सीमित रखें और ताजे फल-सब्जियां, प्रोटीन का सेवन करें और पर्याप्त पानी पिएं। तनाव से बचना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद लें और पॉजिटिव माहौल में रहें, यदि डॉक्टर दवा देते हैं, तो उसे नियमित रूप से लें और बिना सलाह के बंद न करें।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में हाई बीपी एक गंभीर लेकिन कंट्रोल की जा सकने वाली स्थिति है, सही समय पर पहचान, नियमित जांच और डॉक्टर की देखरेख से इस स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है।
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FAQ
क्या प्रेग्नेंसी में एक्सरसाइज सुरक्षित है?
हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉक, प्रेग्नेंसी योग या स्ट्रेचिंग फायदेमंद हो सकते हैं। इससे वजन कंट्रोल रहता है और डिलीवरी भी आसान हो सकती है लेकिन किसी भी एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।गर्भावस्था में ज्यादा तनाव लेने से क्या होता है?
ज्यादा तनाव से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और नींद प्रभावित हो सकती है। यह मां और शिशु दोनों की सेहत पर असर डाल सकता है।क्या प्रेग्नेंसी में ट्रैवल करना सुरक्षित है?
सामान्य और लो-रिस्क प्रेग्नेंसी में दूसरे ट्राइमेस्टर के दौरान ट्रैवल सुरक्षित मानी जाती है। लंबी जर्नी से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
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Feb 21, 2026 17:44 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Feb 21, 2026 17:44 IST
Modified By : Akanksha TiwariFeb 21, 2026 17:44 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Gunjan Sarin